
प्रदर्शन, तोड़फोड़ और आरोपों के बीच वीसी व महिला आयोग आमने-सामने (फोटो सोर्स : WhatsApp News Group)
KGMU Controversy Aparna Yadav Campus Protest: किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) में हालिया घटनाक्रम को लेकर सियासी और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। एक ओर जहां केजीएमयू की कुलपति (वीसी) प्रोफेसर सोनिया नित्यानंद ने परिसर में प्रदर्शन और तोड़फोड़ करने वालों के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए प्रेस कॉन्फ्रेंस कर एफआईआर दर्ज कराने की घोषणा की है, वहीं दूसरी ओर उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए अलग प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कई सवाल खड़े किए हैं। इस पूरे मामले ने अब कानून-व्यवस्था, महिला सुरक्षा, प्रशासनिक जवाबदेही और राजनीतिक हस्तक्षेप जैसे कई पहलुओं को जन्म दे दिया है।
केजीएमयू की कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद ने मीडिया से बातचीत में स्पष्ट कहा कि विश्वविद्यालय परिसर में किसी भी प्रकार का अनुशासनहीनता व्यवहार, नारेबाजी, तोड़फोड़ और जबरन प्रवेश बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने बताया कि हाल ही में एक समूह द्वारा वीसी कार्यालय में घुसकर आपत्तिजनक नारे लगाए गए और परिसर की शांति भंग की गई।
वीसी ने कहा कि इस घटना को लेकर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि पूरे प्रकरण की जानकारी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी दी जा चुकी है। कुलपति के अनुसार, विश्वविद्यालय एक शैक्षणिक और चिकित्सकीय संस्थान है, न कि राजनीतिक या वैचारिक प्रदर्शन का मंच।
वीसी ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह भी बताया कि प्रदर्शन के दौरान महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव के साथ बड़ी संख्या में हिंदूवादी संगठनों से जुड़े लोग परिसर में पहुंचे थे। आरोप है कि इन लोगों ने नारेबाजी करते हुए वीसी कार्यालय में प्रवेश किया और माहौल तनावपूर्ण बना दिया। प्रशासन का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान कुछ स्थानों पर तोड़फोड़ भी की गई, जिससे विश्वविद्यालय की संपत्ति को नुकसान पहुंचा।
वीसी के बयान के बाद महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव ने भी केजीएमयू प्रकरण को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर प्रशासन पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि वह एक संवैधानिक पद पर हैं और महिला आयोग की प्रतिनिधि के रूप में केवल जानकारी लेने के उद्देश्य से केजीएमयू पहुंची थीं।
अपर्णा यादव ने आरोप लगाया कि वह करीब 10 मिनट तक कुलपति कार्यालय के बाहर खड़ी रहीं, लेकिन उनसे मिलने कोई भी अधिकारी या स्वयं कुलपति नहीं आईं। उन्होंने कहा कि महिला आयोग को केजीएमयू प्रशासन ने क्या समझ रखा है? मैं कोई प्रदर्शन करने नहीं गई थी, केवल जानकारी लेने गई थी।”
अपर्णा यादव ने बताया कि उन्होंने पीड़िता से व्यक्तिगत रूप से बातचीत की है। पीड़िता ने उन्हें बताया कि उसने घटना की जानकारी केजीएमयू के संबंधित एचओडी को दी थी, लेकिन इसके बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उनका आरोप है कि घटना के दो दिन बाद ही आरोपी रमीज उद्दीन फरार हो गया, जबकि वह केजीएमयू प्रशासन के संपर्क में था। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि समय रहते कार्रवाई की जाती, तो आरोपी फरार नहीं होता।
महिला आयोग की उपाध्यक्ष ने यह भी दावा किया कि पीड़िता पर बयान बदलने का दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने इस मामले में बयान दिए हैं, उन पर दबाव बनाया जा रहा है कि वे अपने बयान बदल लें। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि केजीएमयू के एक वरिष्ठ डॉक्टर ने पीड़िता से कहा कि वह महिला आयोग क्यों गई। इस बयान ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है।
अपर्णा यादव ने केजीएमयू की विशाखा कमेटी द्वारा जारी की गई रिपोर्ट पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट निष्पक्ष नहीं लगती और कई अहम तथ्यों को नजरअंदाज किया गया है। उनका कहना है कि विशाखा कमेटी का गठन महिला सुरक्षा के लिए किया जाता है, लेकिन यदि उसी पर सवाल उठने लगें, तो यह संस्थान की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है।
अपर्णा यादव ने यह भी दावा किया कि केजीएमयू में महिलाओं के साथ छेड़छाड़ और धर्मांतरण से जुड़े आरोप सामने आ रहे हैं, लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन इस पर चुप्पी साधे हुए है। उन्होंने कहा कि यदि ये आरोप सही हैं, तो यह केवल एक व्यक्ति का मामला नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की विफलता है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एक और बड़ा आरोप सामने आया। अपर्णा यादव ने कहा कि केजीएमयू में पिछले दो वर्षों से बिना लाइसेंस के ब्लड बैंक संचालित किया जा रहा है। यदि यह आरोप सही साबित होता है, तो यह मरीजों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला बन सकता है। उन्होंने मांग की कि इस पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो।
इस पूरे घटनाक्रम में केजीएमयू प्रशासन और महिला आयोग आमने-सामने नजर आ रहे हैं। एक ओर विश्वविद्यालय प्रशासन परिसर की शांति और अनुशासन का हवाला दे रहा है, वहीं दूसरी ओर महिला आयोग प्रशासन पर पीड़िता की अनदेखी और आरोपी को संरक्षण देने के आरोप लगा रहा है।
Updated on:
10 Jan 2026 12:01 am
Published on:
09 Jan 2026 07:51 pm
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