Maulana Arshad Madni Statement: दिल्ली में जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अधिवेशन में मौलाना अरशद मदनी ने सरकार और सांप्रदायिक ताकतों पर तीखा हमला बोला है। मदनी के बयान पर बजरंग दल ने प्रतिक्रिया दी है।
Maulana Arshad Madni Statement: दिल्ली में आयोजित जमीयत उलेमा-ए-हिंद के दो दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन में कौमी और सियासी हलचल तेज हो गई है। अधिवेशन को संबोधित करते हुए जमीयत के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने केंद्र सरकार और सांप्रदायिक ताकतों पर जमकर निशाना साधा। मौलाना मदनी ने दो टूक शब्दों में कहा कि देश का मुसलमान बेहद मजबूत है, वह न कभी झुका है और न ही आगे कभी झुकेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ ताकतें देश के अमन, चैन और भाईचारे को नुकसान पहुंचाने का प्रयास कर रही हैं।
मौलाना मदनी ने देश के मौजूदा हालात पर चिंता जताते हुए कहा कि आज हर तरफ नफरत फैलाने की कोशिश हो रही है। अल्पसंख्यकों को निशाना बनाया जा रहा है, लेकिन कानून के रखवाले इस पर खामोश बैठे हैं। उन्होंने हाल के चुनावों का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि आचार संहिता की खुलेआम धज्जियां उड़ाई गईं और एक वर्ग विशेष को धमकियां दी गई। मदनी ने कहा कि देश को एक अलग सोच के हिसाब से बदलने की कोशिश हो रही है, जो हमारे संविधान के खिलाफ है।
मस्जिदों, मकबरों और मदरसों को अवैध बताकर गिराए जाने की कार्रवाई पर मौलाना मदनी ने कड़ा ऐतराज जताया। इसके साथ ही उन्होंने भाजपा शासित राज्यों में वंदे मातरम् को अनिवार्य किए जाने के फैसले को संविधान की प्रस्तावना के खिलाफ बताया। उन्होंने साफ कहा कि वंदे मातरम् को राष्ट्रगान 'जन गण मन' के बराबर दर्जा देकर जबरन थोपना गलत है। अगर सरकार ने इन फैसलों को वापस नहीं लिया तो जमीयत इसके खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाएगी।
मौलाना मदनी के बयान पर हिंदूवादी संगठनों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। बजरंग दल के पूर्व प्रांत संयोजक विकास त्यागी ने पलटवार करते हुए कहा कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है और यह सिर्फ संविधान और कानून की मर्यादा से चलेगा, किसी की भड़काऊ बयानबाजी से नहीं। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे बयानों के जरिए अल्पसंख्यकों को समाज की मुख्य धारा से अलग करने और टकराव पैदा करने की कोशिश की जा रही है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
मौलाना मदनी के इस बयान के बाद देवबंद सहित पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सियासी और सामाजिक गलियारों में बहस छिड़ गई है। जहां एक पक्ष इसे अल्पसंख्यकों के अधिकारों की मजबूत आवाज बता रहा है, तो वहीं कुछ का मानना है कि ऐसे तीखे बयानों से जमीनी स्तर पर सांप्रदायिक सौहार्द प्रभावित हो सकता है। इस बढ़ते विवाद को देखते हुए स्थानीय पुलिस और खुफिया खुफिया एजेंसियां भी सतर्क हो गई हैं।