लखनऊ

मायावती ने पीएफआई पर बैन को बताया, संघ का तुष्टिकरण

लोकसभा चुनाव 2024 नजदीक आ गए हैं। पार्टियां अपने वोट बैंक को लुभाने के लिए रोज कोई न कोई बयानबाजी करती हैं। सभी विपक्षी पार्टियां भाजपा के कामों, बयानों पर गहरी नजर रख रही है। खासतौर पर बसपा सुप्रीमो मायावती। आजकल वह फुल फार्म में हैं।  
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Updated: 30 Sep 2022, 11:32 AM IST
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Mayawati : राजस्थान में स्टांप पेपर्स पर लड़कियों की कथित नीलामी मामले में मायावती भड़कीं कहा, यह है कांग्रेस का असली क्रूर रूप

लोकसभा चुनाव 2024 नजदीक आ गए हैं। पार्टियां अपने वोट बैंक को लुभाने के लिए रोज कोई न कोई बयानबाजी करती हैं। सभी विपक्षी पार्टियां भाजपा के कामों, बयानों पर गहरी नजर रख रही है। खासतौर पर बसपा सुप्रीमो मायावती। आजकल वह फुल फार्म में हैं। केंद्र सरकार ने पीएफआई पर बैन लगा दिया है। बस मायावती भड़क गई। पीएफआई को बैन लगाने के फैसले पर बहुजन समाज पार्टी मुखिया मायावती ने केंद्र सरकार को आइना दिखाते हुए कहाकि, संघ तुष्टीकरण की नीति मानकर जनता में बेचैनी ज्यादा है।

आठ सहयोगी संगठनों पर प्रतिबन्ध

बसपा मुखिया मायावती ने शुक्रवार को ट्विटर के माध्यम से लिखा कि, केन्द्र द्वारा पीपुल्स फ्रण्ट आफ इण्डिया (पीएफआई) पर देश भर में कई प्रकार से टारगेट करके अन्ततः अब विधानसभा चुनावों से पहले उसे उसके आठ सहयोगी संगठनों के साथ प्रतिबन्ध लगा दिया है, उसे राजनीतिक स्वार्थ व संघ तुष्टीकरण की नीति मानकर यहाँ लोगों में संतोष कम व बेचैनी ज्यादा है।

सरकार की नीयत में खोट

बसपा सुप्रीमो मायावती ने आगे लिखा कि, यही कारण है कि विपक्षी पार्टियां सरकार की नीयत में खोट मानकर इस मुद्दे पर भी आक्रोशित व हमलावर हैं और आरएसएस पर भी बैन लगाने की मांग खुलेआम हो रही है कि अगर पीएफआई देश की आन्तरिक सुरक्षा के लिए खतरा है तो उस जैसी अन्य संगठनों पर भी बैन क्यों नहीं लगना चाहिए?

मायावती ने सपा पर भी साधा निशाना

ऐसा नहीं है कि मायावती के निशाने पर सिर्फ भाजपा ही है। गुरुवार को सपा पर हमला किया और मायावती ने कहा कि समाजवादी पार्टी द्वारा अपने चाल, चरित्र, चेहरा को 'अंबेडकरवादी' दिखाने का प्रयास वैसा ही ढोंग, नाटक व छलावा है जैसा कि वोटों के स्वार्थ की खातिर अन्य पार्टियां अक्सर ऐसा करती रहती हैं। इनका दलित व पिछड़ा वर्ग प्रेम मुंह में राम बगल में छुरी को ही चरितार्थ करता है।

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