लखनऊ

मुन्ना बजरंगी की हत्या में बड़े नेता का नाम सामने आया, बुंदेलखंड में साजिश, बागपत में हत्या

मुन्ना बजरंगी के संबंध कांग्रेस के बड़े नेता कृपाशंकर सिंह के साथ होने की चर्चा  

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Jul 09, 2018
मुन्ना बजरंगी की हत्या में बड़े नेता का नाम सामने आया, बुंदेलखंड में साजिश, बागपत में हत्या

लखनऊ. मुन्ना बजरंगी की हत्या में पुलिस को खास सबूत हाथ लगे हैं। एसटीएफ मुताबिक, राजनीति में घुसपैठ की कोशिश ने मुन्ना बजरंगी को अपने आका मुख्तार अंसारी से दूर कर दिया था। इसी के बाद मुन्ना ने जौनपुर के मूल निवासी और महाराष्ट्र में कांग्रेस के बड़े नेता कृपाशंकर सिंह से संबंध जोड़ लिए थे। चर्चा है कि कृपाशंकर ने मुन्ना को सुरक्षित करने के लिए दिल्ली पुलिस के एक बड़े अधिकारी से मिलकर उसकी गिरफ्तारी मुंबई के मलाड से कराई थी। चर्चा में कितना दम है, इस बारे में कृपाशंकर से बात नहीं हो सकी है, लेकिन यह सच है कि मुन्ना बजरंगी को दिल्ली पुलिस ने मुंबई के मलाड इलाके से गिरफ्तार किया था। एसटीएफ के मुताबिक, मुन्ना की हत्या की साजिश झांसी जेल के अंदर रची गई थी, जबकि वारदात को अंजाम बागपत जेल के अंदर दिया गया। गौरतलब है कि मुख्तार अंसारी भी बुंदेलखंड की बांदा जेल में बंद है। बहरहाल, एसटीएफ को सुराग मिले हैं कि सोची-समझी साजिश के तहत हत्यारों ने पहले बागपत जेल में दाखिला लिया था। उन्हें मुन्ना के कुछ दिन बाद पेशी पर बागपत जेल आने की जानकारी थी। हत्याकांड में 9 एमएम की पिस्टल का इस्तेमाल किया गया था। चर्चा है कि मुन्ना बजरंगी की हत्या में किसी अंसारी का हाथ है। पुलिस ने अंसारी का पूरा नाम उजागर नहीं किया है।


अंतिम वक्त में सफेद बनियान और हॉफ पैंट में था मुन्ना

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अपनी जिंदगी के अंतिम वक्त में मुन्ना बजरंगी सफेद बनियान और सफेद पैंट पहने थे। सुबह-सुबह मौत का शिकार हुए मुन्ना की हत्या के बाद पहली तस्वीर सामने आई है। हत्यारे ने मुन्ना की कनपटी पर सटाकर फायर किया था। गोली लगने से उसका भेजा बाहर निकल आया और मुन्ना की मौत मौके पर हो गए। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, मुन्ना की हत्या में 9 एमएम की पिस्टल का इस्तेमाल किया गया था। कुल मिलाकर कुख्यात डॉन और दर्जनों जिंदगियों का कातिल मुन्ना बजरंगी की जिंदगी का अंत उसी रास्ते पर हुआ, जिस रास्ते पर पिता की इच्छा के खिलाफ चला था। मुन्ना बजरंगी का असली नाम प्रेम प्रकाश सिंह था। उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के पूरेदयाल गांव में वर्ष 967 में पैदा हुए मुन्ना को पिता पारसनाथ सिंह पढ़ा-लिखाकर बड़ा आदमी बनाने का सपना संजोए थे, लेकिन प्रेम प्रकाश उर्फ मुन्ना बजरंगी ने उनके अरमानों को कुचल दिया। उसने पांचवीं कक्षा के बाद पढ़ाई को छोड़ दिया और किशोर अवस्था तक आते-आते उसे कई ऐसे शौक लग गए, जो उसे जुर्म की दुनिया में ले जाने के लिए काफी थे।


गर्लफ्रेंड के चक्कर में मुख्तार से बिगड़े थे रिश्ते

थोड़ा फ्लैशबैक में जाने पर मालूम होता है कि मुन्ना के संबंध एक औरत के कारण मुख्तार से बिगड़े थे। जरायम की दुनिया में मुकाम बना चुके मुन्ना बजरंगी का झुकाव बसपा के साथ ही कांग्रेस की ओर था। इनके साथ ही वह भाजपा में भी पैठ बनाने की जुगत में लगा था। मुन्ना बजरंगी ने लोकसभा चुनाव में गाजीपुर लोकसभा सीट पर अपना डमी उम्मीदवार खड़ा करने का प्रयास किया था। इसी दौरान मुन्ना बजरंगी एक महिला को गाजीपुर से भाजपा का टिकट दिलवाने की कोशिश कर रहा था, जिसके चलते उसके मुख्तार अंसारी के साथ संबंध भी खराब हो गए। मुख्तार से बिगाड़ होने के बाद मुन्ना ने कांग्रेस का दामन थामा था। चर्चा है कि वह कांग्रेस के कद्दावर नेता कृपाशंकर सिंह की शरण में मुंबई पहुंच गया। गौरतलब है कि कृपाशंकर भी जौनपुर जिले के रहने वाले है, लेकिन मुंबई में रहकर सियासत करते थे। मुन्ना बजरंगी ने महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में नेता जी को सपोर्ट भी किया था।


कृपाशंकर ने कराया था समर्पण, पुलिस ने दिखाई गिरफ्तारी

उत्तर प्रदेश समते कई राज्यों में मुन्ना बजरंगी के खिलाफ मुकदमे दर्ज थे। वह पुलिस के लिए परेशानी का सबब बन चुका था। उसके खिलाफ सबसे ज्यादा मामले उत्तर प्रदेश में दर्ज हैं। 29 अक्टूबर 2009 को दिल्ली पुलिस ने मुन्ना को मुंबई के मलाड इलाके में नाटकीय ढंग से गिरफ्तार कर लिया था। मुन्ना को अपने एनकाउंटर का डर सता रहा था। चर्चा है कि कृपाशंकर की मदद से मुन्ना ने योजना के तहत दिल्ली पुलिस से गिरफ्तारी कराई थी। मुन्ना की गिरफ्तारी के इस ऑपरेशन में मुंबई पुलिस को भी ऐन वक्त पर शामिल किया गया था। दिल्ली पुलिस ने कहा था कि दिल्ली के विवादास्पद एनकाउंटर स्पेशलिस्ट राजबीर सिंह की हत्या में मुन्ना बजरंगी का हाथ होने का शक है। इसी कारण उसे गिरफ्तार किया गया।

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Published on:
09 Jul 2018 11:46 am
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