Muslim Personal Law Board Demand to Make Blasphemy Law- ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (All India Muslim Law Board) ने अपील की है कि सरकार ईशनिंदा कानून बनाए। यूनिफॉर्म सिविल कोड मंजूर नहीं। बोर्ड के पदाधिकारियों और सदस्यों का कहना है कि मुस्लिम समाज इसे स्वीकार नहीं करेगा।
लखनऊ. Muslim Personal Law Board Demand to Make Blasphemy Law. ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (All India Muslim Law Board) ने अपील की है कि सरकार ईशनिंदा कानून बनाए। यूनिफॉर्म सिविल कोड मंजूर नहीं। बोर्ड के पदाधिकारियों और सदस्यों का कहना है कि मुस्लिम समाज इसे स्वीकार नहीं करेगा। उन्होंने समान नागरिक संहिता की चर्चाओं के बीच इस पर अपनी आपत्ति जताई है। दरअसल, कानपुर के मदरसा दारुल तालीम और सनअत जाजमऊ द्वारा 11 प्रस्ताव पारित किए गए हैं। इसमें धर्मांतरण, वक्फ संपत्तियों और गैर मजहब में शादी करने का विरोध शामिल है। बोर्ड ने कहा कि सरकार को ईशनिंदा कानून (Blasphemy Law) बनाना चाहिए।
पैगंबर पर टिप्पणी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई
बोर्ड ने सरकार से मांग की है कि मुस्लिमों पर समान नागरिक संहिता न लगाई जाए। उन्होंने कहा कि बोर्ड जबरन धर्मांतरण कराने वालों के खिलाफ है। बोर्ड ने यह भी कहा कि इस्लाम के पैगंबर पर टिप्पणी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। इसके साथ ही बोर्ड ने अधिवेशन में अल्पसंख्यकों, दलितों और अन्य कमजोर वर्गों पर बढ़ते अत्याचार को रोकने के लिए सरकार से विशेष पहल की मांग है।
गैर मजहबी विवाह से बचें
बोर्ड ने मुस्लिमों को हिदायत दी है कि वह गैर मजहबी विवाह से बचें क्योंकि इससे समाज में विभाजन पैदा होता है और सांप्रदायिक सौहार्द पैदा होता है। धार्मिक नियम और किताबें आस्था से जुड़ी हैं, इसलिए सिर्फ धर्म को समझने वालों को ही इसकी व्याख्या करने का अधिकार है। सरकारों या अन्य संस्थाओं को धार्मिक पुस्तकों या धार्मिक शब्दावली की व्याख्या करने से बचना चाहिए।