National Sports Day 2021 : हर साल 29 अगस्त को हॉकी के जादूगर कहे जाने वाले पद्म भूषण मेजर ध्यान चंद की याद में राष्ट्रीय खेल दिवस मनाया जाता है। आईये जाने इस दिन से जुड़ी महत्त्व बाते और इसका इतिहास।
लखनऊ.National Sports Day 2021 : भारत में शायद ही कोई होगा जिसने मेजर ध्यान चंद का नाम न सुना हो। हॉकी के ये महान खिलाड़ी ने भारत ही नहीं बल्कि पुरे विश्व में अपना और भारत का नाम रौशन किया। मेजर ध्यान चंद का जन्म 29 अगस्त 1905 में इलाहाबाद (प्रयागराज), उत्तर प्रदेश में हुआ था और उन्हें बचपन से ही खेल कूद का बहुत शौक था, आगे चल के वो देश के महान हॉकी के खिलाड़ी बने। उनकी टीम ने लगातार 3 ओलिंपिक, 1928, 1932 और 1936 में स्वर्ण पदक जीता था। उन्होंने ब्रिटिश आर्मी के साथ अपने हॉकी खेलों की शुरुआत की और उसके बाद उन्होंने पीछे मुड़ के नहीं देखा। उन्होंने अपने जीवन में कुल 185 मैच खेले और करीब 570 गोल किये हैं। आगे चल के भारत सरकार ने इन्हे 1956 मे भारत का तीसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म भूषण से सम्मानित किया।
हिटलर के साथ डिनर
1936 के बर्लिन ओलंपिक में मेजर ध्यान चंद के बेहतरीन प्रदर्शन से प्रभावित होकर हिटलर ने उन्हे भोजन के लिए आमंत्रित किया था और जर्मनी की तरफ से खेलने का प्रस्ताव भी सामने रखा था। जिसे मेजर ध्यान चंद ने अस्वीकार करते हुए कहा कि वो हमेशा भारत के लिए ही खेलेंगे।
मेजर ध्यान चंद खेल पुरस्कार
हाल ही मे भारत सरकार ने राजीव गांधी खेल पुरस्कार का नाम बदल कर भारत के महान हॉकी खिलाडी मेजर ध्यान चंद के नाम पर कर दिया है। ये पुरस्कार भारत खेल जगत का सर्वोच्च पुरस्कार है जो हर साल भारत सरकार के खेल एवं युवा मंत्रालय द्वारा दीया जाता है। इसके अंतर्गत खिलड़ियों को सरकार की तरफ से पदक, प्रशस्ति पत्र और धन राशि दे कर उन्हे सम्मानित किया जाता है।
क्यों है इस साल का राष्ट्रीय खेल दिवस खास?
इस साल का राष्ट्रीय खेल दिवस अभी तक का सबसे खास खेल उत्सव है क्यों कि इस बार टोक्यो ओलंपिक मे भारतीय खीलाड़ियों द्वारा आज तक का सबसे बेहतरीन प्रदर्शन रहा। इस बार भारत के हिस्से मे कुल 7 मेडल आये जिसमे 1 स्वर्ण, 2 रजत और 4 कांस्य पदक रहे। नीरज चोपड़ा ने भाला फेंक मे स्वर्ण पदक लाकर एक नया इतिहास रचा और वहीं सिंधु लगातार दो बार ओलंपिक मे मेडल लाने वाली पहली भारतीय महिला बनी। इस बार के प्रदर्शन से युवाओं मे खेल को लेकर और जिज्ञासा बढ़ी है जिससे की आने वाली पीढी अधिक से अधिक मेडल लाकर देश का नाम विश्व भर मे रौशन करेगी।
रिपोर्ट- संध्या झा