लखनऊ

National Walking Day: हर साल 5 हजार से ज्यादा लोग सड़क पर पैदल चलकर गंवा रहे जान, डराने वाले हैं आंकड़े!

उत्तर प्रदेश में हर साल सड़क हादसों में 5 हजार से ज्यादा पैदल यात्री अपनी जान गंवा रहे हैं। आज राष्ट्रीय पैदल दिवस के मौके पर जानिए क्या है आखिर इन मौतों की असली वजह?
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Apr 01, 2026
पैदल यात्री मौत
प्रतीकात्मक तस्वीर - एआइ

National Walking Day: आज राष्ट्रीय पैदल यात्रा दिवस है। हर साल अप्रैल के पहले बुधवार को राष्ट्रीय पैदल यात्रा दिवस के रूप में मनाया जाता है। ऐसे में उत्तर प्रदेश की सड़कों पर पैदल चलना कितना सुरक्षित है ये जानना भी बेहद जरूरी है। हाल ही में आई एक रिपोर्ट के मुताबिक, यूपी में हर साल लगभग पांच से छह हजार लोग सिर्फ इसलिए अपनी जान गंवा देते हैं क्योंकि वे सड़क पर पैदल चल रहे थे। 'राष्ट्रीय पैदल यात्रा दिवस' के मौके पर यह कड़वा सच सामने आया है कि आधुनिकता की दौड़ में हम पैदल चलने वालों के लिए सुरक्षित जगह देना भूल गए हैं।

डराने वाले हैं आंकड़े

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की रिपोर्ट बताती है कि देश में होने वाले सड़क हादसों में जान गंवाने वाले हर 20 प्रतिशत लोग पैदल यात्री होते हैं। यानी सड़क पर मरने वाला हर पांचवा व्यक्ति पैदल चलने वाला है। उत्तर प्रदेश की स्थिति भी भयावह है। साल 2016 में जहां सड़क हादसों में मरने वालों का आंकड़ा 19,320 था, वहीं 2025 में यह बढ़कर 27,205 तक पहुंच गया है। इसमें पैदल यात्रियों की हिस्सेदारी 6,257 के करीब है।

फुटपाथ गायब, सड़कों पर चलना मजबूरी

इस जानलेवा स्थिति की सबसे बड़ी वजह है फुटपाथों का गायब होना। शहरों में जहां पैदल चलने वालों के लिए फुटपाथ होने चाहिए थे वहां अब अवैध कब्जे हैं। कहीं दुकानें सजी हैं तो कहीं गाड़ियां खड़ी हैं। नतीजतन, आम आदमी को तेज रफ्तार गाड़ियों के बीच सड़क पर चलना पड़ता है। पीछे से आती तेज रफ्तार गाड़ियां अक्सर इन राहगीरों को अपनी चपेट में ले लेती हैं जिससे हंसते-खेलते परिवार उजड़ रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट का आदेश

पैदल यात्रियों की बदहाली पर अब देश की सबसे बड़ी अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट ने भी कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने कहा है कि संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार) के तहत सुरक्षित और अतिक्रमण मुक्त फुटपाथ उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है। यह कोई सुविधा नहीं बल्कि नागरिकों का संवैधानिक अधिकार है। कोर्ट ने राज्यों को निर्देश दिया है कि न केवल फुटपाथ बनाए जाएं बल्कि उनका 'सुरक्षा ऑडिट' भी कराया जाए। हर प्रकार के अतिक्रमण को सख्ती से हटाया जाए। ताकि पैदल चलने वालों को चलने के लिए जगह मिल सके।

वेंडिंग जोन के नाम पर अवैध कब्जा

राजधानी लखनऊ समेत प्रदेश के कई जिलों में वेंडिंग जोन के नाम पर फुटपाथों को कानूनी रूप से घेर लिया गया है। नगर निगम और पुलिस की मिलीभगत से कई जगहों पर फुटपाथों पर कब्जे हो चुके हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भी चेतावनी दी है कि दुनिया के 80 प्रतिशत देशों में पैदल चलने वालों के लिए बुनियादी ढांचा ही नहीं है। पैदल यात्रियों को सड़क उपयोगकर्ता के तौर पर सबसे असुरक्षित समूह माना गया है जिनकी सुरक्षा अब प्राथमिकता होनी चाहिए। ऐसे में सरकार और प्रशासन को चाहिए कि वे सुनिश्चित करें कि फुटपाथ सिर्फ पैदल चलने वालों के लिए हों। जब तक फुटपाथ खाली नहीं होंगे तब तक सड़कों पर मौत का यह आंकड़ा कम नहीं होगा।

Updated on:
01 Apr 2026 02:46 pm
Published on:
01 Apr 2026 02:46 pm