
UP Assembly Election 2027: उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले जातियों और उनके वोट बैंक को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री और सुभासपा अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव यादव समाज में भी अपने और पराए का फर्क करते हैं। राजभर ने घोसी यानी ग्वाला और कमरिया समाज का जिक्र करते हुए अखिलेश से 2017 से 2024 के बीच दोनों वर्गों को दिए गए टिकटों का हिसाब मांगा है।
ओम प्रकाश राजभर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अखिलेश यादव को संबोधित करते हुए लिखा कि गुड मॉर्निंग मित्र अखिलेश यादव, पता है अभी भी आप स्वपनलोक में ही खोए होंगे। मगर गाय-भैंस की सेवा करने वाले अहीर भाई जाग चुके हैं और आपका सब खेल समझने भी लगे हैं। राजभर ने आगे अहीर समाज के भीतर दो वर्गों का जिक्र करते हुए अखिलेश पर निशाना साधा। उन्होंने लिखा कि हम अबतक यही जानते थे कि अहीर दो ही प्रकार के होते हैं! एक कृष्ण वाले, दूसरे वाले आप और आपके सपाई। लेकिन अब पता चल रहा है कि आप तो सच में अहीरों में भी 15 परसेंट वाले ही हैं और इस 15 परसेंट का बदला आप 85 परसेंट से ले रहे हैं।
कैबिनेट मंत्री ने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव यादव समाज के सभी वर्गों को एक नजर से नहीं देखते। उन्होंने घोसी यानी ग्वाला और कमरिया समाज का जिक्र करते हुए कहा कि पहले लगाता था कि आप यादवों को एक नजर से देखते होंगे पर ऐसा नहीं है, आपके लिए तो उसमें भी अपने और पराए हैं। 85 फीसदी वाले घोसी यानी ग्वाला आपको बिल्कुल नहीं सुहाते, आपके लिए तो बस 15 फीसदी वाले कमरिया ही 'आपके अपने' हैं।
ओम प्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव पर जाति के आधार पर समाज को बांटने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पहले धर्म के नाम पर लोगों को बांटा जाता था, लेकिन अब जाति के भीतर भी भेदभाव किया जा रहा है। उन्होंने लिखा कि बताइए भला! पहला ऐसा यादव नेता देखा जो अहीर-अहीर में भेद करता हो। आपके पहले वालों ने पहले धर्म के नाम पर जनता को बांटा, आप जाति के नाम पर बांटते-बांटते अब अहिर-अहिर में दो आंख करने लगे। अपने पोस्ट के आखिर में राजभर ने अखिलेश यादव को निशाने पर लेते हुए 2027 विधानसभा चुनाव का जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि 85 फीसदी वाला ग्वाला समाज आगामी चुनाव में सपा अध्यक्ष को 2022 से भी बुरे दौर में पहुंचाएगा।