लखनऊ

‘बार-बार चुनाव से रुकता है विकास’, One Nation One Election पर केशव प्रसाद मौर्य का बयान, बताया क्यों है जरूरी

Keshav Prasad Maurya: उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने 'वन नेशन, वन इलेक्शन' का समर्थन करते हुए कहा कि इससे जनता का पैसा बचेगा और विकास कार्यों में तेजी आएगी।
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Jul 14, 2026
One Nation One Election Keshav Prasad Maurya UP Deputy CM
केशव प्रसाद मौर्य का बयान (photo-x @/kpmaurya1)

Lucknow News: वन नेशन, वन इलेक्शन (One Nation, One Election) को लेकर एक बार फिर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। इस बीच उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने इस प्रस्ताव का खुलकर समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि अगर पूरे देश में लोकसभा और विधानसभा के चुनाव एक साथ होंगे, तो इससे देश का समय और जनता का पैसा दोनों बचेंगे। साथ ही विकास कार्यों में भी तेजी आएगी।

क्या बोले केशव प्रसाद मौर्य?

लखनऊ में मीडिया से बातचीत के दौरान केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि 'वन नेशन, वन इलेक्शन' देश के हित में एक महत्वपूर्ण कदम है। उनका कहना था कि आजादी के शुरुआती वर्षों में लोकसभा और विधानसभा के चुनाव एक साथ ही कराए जाते थे।उन्होंने आरोप लगाया कि बाद के वर्षों में अलग-अलग राज्यों की सरकारों को समय से पहले हटाने जैसी घटनाओं के कारण चुनावी प्रक्रिया का पूरा ढांचा बदल गया। इसके चलते अब अलग-अलग समय पर चुनाव कराना पड़ता है।

चुनाव पर खर्च होने वाला पैसा विकास में लगेगा

डिप्टी सीएम ने कहा कि बार-बार चुनाव होने से सरकारी खजाने पर बड़ा आर्थिक बोझ पड़ता है। उनके मुताबिक, चुनावों में खर्च होने वाला पैसा अगर विकास कार्यों पर लगाया जाए, तो गरीबों, किसानों और आम लोगों को ज्यादा फायदा मिलेगा। उन्होंने कहा कि लगातार चुनाव होने की वजह से सरकारी मशीनरी भी लंबे समय तक चुनावी प्रक्रिया में व्यस्त रहती है, जिससे कई विकास योजनाओं की रफ्तार प्रभावित होती है।

प्रधानमंत्री की सोच का किया समर्थन

केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में तैयार किए गए 'वन नेशन, वन इलेक्शन' के विजन का भारतीय जनता पार्टी पूरी तरह समर्थन करती है। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था देश के भविष्य के लिए जरूरी है और इसे लागू किया जाना चाहिए।

वन नेशन, वन इलेक्शन क्या है?

वन नेशन, वन इलेक्शन का मतलब है कि देशभर में लोकसभा और सभी राज्यों की विधानसभा के चुनाव एक ही समय पर कराए जाएं। इससे बार-बार चुनाव कराने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इस प्रस्ताव के समर्थकों का मानना है कि इससे चुनावी खर्च कम होगा, प्रशासनिक कामकाज बाधित नहीं होगा और विकास कार्यों में निरंतरता बनी रहेगी। वहीं, विपक्ष के कई दल इस प्रस्ताव पर अलग राय रखते हैं। उनका कहना है कि इसे लागू करने से पहले संवैधानिक और व्यावहारिक पहलुओं पर व्यापक चर्चा जरूरी है।

अभी क्या स्थिति है?

फिलहाल वन नेशन, वन इलेक्शन को लेकर केंद्र सरकार स्तर पर चर्चा जारी है। इसे लागू करने के लिए संवैधानिक संशोधनों समेत कई कानूनी प्रक्रियाओं की जरूरत होगी। ऐसे में अंतिम फैसला संसद और निर्धारित संवैधानिक प्रक्रिया के बाद ही होगा। केशव प्रसाद मौर्य का यह बयान ऐसे समय आया है, जब देश में इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस लगातार तेज होती जा रही है। आने वाले समय में इस विषय पर केंद्र और विपक्ष के बीच और भी चर्चा देखने को मिल सकती है।

Updated on:
14 Jul 2026 01:09 pm
Published on:
14 Jul 2026 01:09 pm