लखनऊ

राजा भैया की पत्नी भावनी सिंह की अर्जी पर कोर्ट ने उठाया सख्त कदम! MLC के खिलाफ होगी FIR दर्ज, क्या है पूरा मामला?

Raja Bhaiya Bhanvi Singh and Akshay Pratap Singh News: राजा भैया की पत्नी भावनी सिंह की अर्जी पर कोर्ट ने सख्त कदम उठाया है। जानिए पूरा मामला क्या है?
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May 08, 2026
order issued to register case against mlc akshay pratap singh after raja bhaiya wife bhanavi levelled allegations
एमएलसी अक्षय प्रताप सिंह पर केस दर्ज करने का आदेश। फोटो सोर्स-पत्रिका न्यूज

Raja Bhaiya Bhanvi Singh and Akshay Pratap Singh News: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में जनसत्ता दल लोकतांत्रिक से जुड़े MLC अक्षय प्रताप सिंह की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। MP-MLA कोर्ट ने धोखाधड़ी और कंपनी हड़पने के आरोपों के मामले में उनके खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश दिया है। यह आदेश राजा भैया की पत्नी भानवी सिंह की ओर से दाखिल अर्जी पर सुनवाई के बाद दिया गया। कोर्ट ने हजरतगंज पुलिस को अक्षय प्रताप सिंह समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू करने के निर्देश दिए हैं।

साझेदारी फर्म में करोड़ों के निवेश का दावा

भानवी सिंह की ओर से कोर्ट में दाखिल अर्जी में कहा गया कि उन्होंने 10 फरवरी 2014 को अक्षय प्रताप सिंह और अन्य लोगों के साथ मिलकर एक साझेदारी फर्म का पंजीकरण कराया था। आरोप है कि इस फर्म में करोड़ों रुपये का निवेश किया गया और फर्म के नाम पर 5 करोड़ रुपये से अधिक की चल-अचल संपत्तियां बनाई गईं। भानवी का आरोप है कि वर्तमान में इन संपत्तियों पर अक्षय प्रताप सिंह का कब्जा है और उन्होंने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर फर्म की संपत्तियों को हड़पने की साजिश रची।

जाली हस्ताक्षर और फर्जी दस्तावेज बनाने का आरोप

याचिका में दावा किया गया कि आरोपियों ने फर्म के पंजीकरण से जुड़े अभिलेखों में हेरफेर की। आरोप है कि भानवी सिंह के जाली हस्ताक्षर कर 15 नवंबर 2020 को फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए। इतना ही नहीं, फर्म के पंजीकरण का पता भी बदलकर अक्षय प्रताप सिंह के लखनऊ स्थित निजी आवास का कर दिया गया। भानवी की ओर से इसे सुनियोजित धोखाधड़ी बताते हुए कोर्ट से आपराधिक कार्रवाई की मांग की गई थी।

पहले परिवाद के रूप में दर्ज हुई थी अर्जी

इस मामले में शुरुआत में विशेष एसीजेएम कोर्ट ने सीधे FIR दर्ज करने का आदेश नहीं दिया था। अदालत ने भानवी सिंह की अर्जी को परिवाद के रूप में पंजीकृत करने का निर्देश दिया था। इस आदेश को चुनौती देते हुए भानवी सिंह ने सत्र न्यायालय में निगरानी याचिका दाखिल की।

सत्र न्यायालय ने मामले की सुनवाई के बाद निचली अदालत के आदेश को रद्द कर दिया और निर्देश दिया कि प्रार्थना पत्र पर दोबारा सुनवाई कर कानून के मुताबिक नया आदेश पारित किया जाए।

हाईकोर्ट से भी नहीं मिली राहत

बताया गया कि MP-MLA कोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए अक्षय प्रताप सिंह ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उन्होंने निगरानी याचिका दाखिल कर निचली अदालत के आदेश को निरस्त करने की मांग की थी।

हालांकि, हाईकोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी और सत्र न्यायालय के आदेश को सही ठहराया। इसके बाद विशेष एसीजेएम कोर्ट ने अक्षय प्रताप सिंह, रोहित कुमार सिंह, अनिल सिंह, रामदेव यादव समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर जांच कराने का आदेश जारी कर दिया।

राजनीतिक गलियारों में बढ़ी चर्चा

राजा भैया के परिवार से जुड़े इस मामले ने प्रदेश की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। कोर्ट के आदेश के बाद अब पुलिस जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई करेगी। मामले को लेकर राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर नजरें टिकी हुई हैं।