
अपराध दर राष्ट्रीय औसत से कम, महिलाओं के खिलाफ अपराधों में दोषसिद्धि दर सबसे बेहतर (फोटो सोर्स : भाषा WhatsApp News Group)
UP Crime Rate: राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की ‘क्राइम इन इंडिया-2024’ रिपोर्ट में उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था को लेकर मिश्रित तस्वीर सामने आई है। एक ओर राज्य कुल अपराध दर, हत्या, दुष्कर्म, साइबर अपराध और बच्चों के खिलाफ अपराध जैसे कई मामलों में राष्ट्रीय औसत से बेहतर प्रदर्शन करता दिखाई दिया है, वहीं दूसरी ओर दहेज हत्या के मामलों में प्रदेश की स्थिति अब भी बेहद चिंताजनक बनी हुई है। रिपोर्ट के अनुसार उत्तर प्रदेश दहेज हत्या के मामलों में देश में पहले स्थान पर है।
पुलिस मुख्यालय द्वारा गुरुवार को जारी अपराध विश्लेषण के अनुसार, उत्तर प्रदेश अपनी विशाल आबादी के अनुपात में अपराध नियंत्रण के मामले में राष्ट्रीय औसत से बेहतर स्थिति में है। हालांकि सामाजिक अपराधों, विशेषकर दहेज हत्या जैसे मामलों में सुधार की रफ्तार अपेक्षा के अनुरूप नहीं मानी जा रही।
एनसीआरबी की रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय न्याय संहिता (BNS) और आईपीसी श्रेणी के तहत वर्ष 2024 में पूरे देश में कुल 35,44,608 आपराधिक मामले दर्ज किए गए। इनमें से 4,30,552 मामले अकेले उत्तर प्रदेश में दर्ज हुए। यह कुल राष्ट्रीय अपराध का लगभग 12.14 प्रतिशत है।
विशेषज्ञों के अनुसार उत्तर प्रदेश की आबादी देश की कुल जनसंख्या का करीब 17 प्रतिशत है। इतनी बड़ी आबादी के बावजूद राज्य की अपराध दर राष्ट्रीय औसत से कम होना प्रशासन के लिए राहत की बात मानी जा रही है। रिपोर्ट के अनुसार उत्तर प्रदेश की अपराध दर 180.2 प्रति लाख आबादी दर्ज की गई, जबकि राष्ट्रीय औसत 252.3 प्रति लाख आबादी रहा। इसी आधार पर कुल अपराध के मामले में उत्तर प्रदेश देश में 18वें स्थान पर रहा।
जहां कई अपराध श्रेणियों में उत्तर प्रदेश की स्थिति बेहतर रही, वहीं दहेज हत्या के मामलों ने एक बार फिर गंभीर चिंता पैदा की है। रिपोर्ट के अनुसार राज्य में दहेज हत्या की अपराध दर 1.8 दर्ज की गई, जबकि राष्ट्रीय औसत 0.8 है। इस श्रेणी में उत्तर प्रदेश देश में पहले स्थान पर रहा। रिपोर्ट का कहना है कि यह आंकड़ा केवल अपराध नहीं बल्कि समाज में गहराई तक जड़ जमा चुकी दहेज प्रथा की भयावह तस्वीर भी पेश करता है। महिलाओं के अधिकारों और सुरक्षा को लेकर लगातार चलाए जा रहे अभियानों के बावजूद दहेज हत्या जैसे मामलों में अपेक्षित कमी नहीं आ पाना सामाजिक चुनौती बना हुआ है।
महिला अधिकार कार्यकर्ताओं का मानना है कि दहेज उत्पीड़न और घरेलू हिंसा के मामलों में अभी भी कई घटनाएं रिपोर्ट तक नहीं हो पातीं। ग्रामीण क्षेत्रों में सामाजिक दबाव और पारिवारिक प्रतिष्ठा के कारण कई महिलाएं शिकायत दर्ज कराने से बचती हैं।
एनसीआरबी रिपोर्ट के अनुसार हत्या और दुष्कर्म जैसे गंभीर अपराधों में उत्तर प्रदेश की स्थिति राष्ट्रीय औसत से बेहतर रही है। राज्य में हत्या की अपराध दर 1.3 दर्ज की गई, जबकि राष्ट्रीय औसत 1.9 रहा। इस श्रेणी में उत्तर प्रदेश 29वें स्थान पर रहा। तुलना करें तो झारखंड में हत्या की दर 3.7 और छत्तीसगढ़ में 3.3 दर्ज की गई, जो काफी अधिक है। इसी प्रकार दुष्कर्म के मामलों में उत्तर प्रदेश की अपराध दर 2.8 रही, जबकि राष्ट्रीय औसत 4.3 दर्ज किया गया। इस श्रेणी में राज्य 24वें स्थान पर रहा। रिपोर्ट के अनुसार चंडीगढ़ में दुष्कर्म की दर 16.6, गोवा में 13.3 और राजस्थान में 12.2 रही, जो राष्ट्रीय स्तर पर सबसे अधिक श्रेणियों में शामिल हैं।
रिपोर्ट के अनुसार महिलाओं के खिलाफ अपराधों की कुल दर उत्तर प्रदेश में 58.0 रही, जबकि राष्ट्रीय औसत 64.6 है। इस श्रेणी में राज्य 17वें स्थान पर रहा। तुलना करें तो दिल्ली में महिलाओं के खिलाफ अपराध की दर 130.7 और तेलंगाना में 128.6 दर्ज की गई, जो काफी अधिक है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि महिलाओं के खिलाफ अपराधों में केवल संख्या ही नहीं, बल्कि पीड़ितों को न्याय मिलने की प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण है। इसी मोर्चे पर उत्तर प्रदेश ने बेहतर प्रदर्शन किया है।
एनसीआरबी रिपोर्ट के अनुसार महिलाओं के खिलाफ अपराधों में दोषसिद्धि दर के मामले में उत्तर प्रदेश देश के अग्रणी राज्यों में शामिल रहा है। वर्ष 2024 में महिलाओं के विरुद्ध अपराधों में राज्य की दोषसिद्धि दर 76.6 प्रतिशत दर्ज की गई। इसका मतलब है कि अदालतों में सुनवाई पूरी होने वाले मामलों में बड़ी संख्या में अपराधियों को सजा मिली।
रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2024 में महिलाओं के खिलाफ अपराधों के कुल 3,52,664 मामले उत्तर प्रदेश की अदालतों में लंबित थे। इनमें से 27,639 मामलों की सुनवाई पूरी हुई और 21,169 मामलों में दोषियों को सजा सुनाई गई। विशेषज्ञों का मानना है कि दोषसिद्धि दर में सुधार पुलिस जांच, अभियोजन और अदालतों के बेहतर समन्वय को दर्शाता है।
एनसीआरबी के आंकड़ों के अनुसार बच्चों के खिलाफ अपराध के मामलों में भी उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय औसत से बेहतर स्थिति में रहा। राज्य में बच्चों के खिलाफ अपराध की दर 22.1 दर्ज की गई, जबकि राष्ट्रीय औसत 42.3 रहा। इस श्रेणी में उत्तर प्रदेश 27वें स्थान पर रहा। इसी तरह पाक्सो अधिनियम के तहत अपराध दर उत्तर प्रदेश में 9.5 रही, जबकि राष्ट्रीय औसत 15.6 है। इस श्रेणी में राज्य 23वें स्थान पर रहा। रिपोर्ट का कहना है कि बच्चों के खिलाफ अपराधों में जागरूकता अभियान, स्कूलों में सुरक्षा कार्यक्रम और पुलिस की सक्रियता का सकारात्मक असर दिखाई दे रहा है।
डिजिटल युग में साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं, लेकिन इस मामले में भी उत्तर प्रदेश की स्थिति राष्ट्रीय औसत से बेहतर रही। राज्य में साइबर अपराध की दर 4.6 दर्ज की गई, जबकि राष्ट्रीय औसत 7.3 रहा। इस श्रेणी में तेलंगाना 71.1 की दर के साथ सबसे ऊपर रहा। हालांकि पुलिस अधिकारियों का कहना है कि साइबर अपराध लगातार बदलते स्वरूप में सामने आ रहे हैं और इनके खिलाफ तकनीकी क्षमता बढ़ाने पर लगातार काम किया जा रहा है।
राजीव कृष्ण ने राज्य में अधिक एफआईआर दर्ज होने को लेकर कहा कि ज्यादा मामले दर्ज होना नकारात्मक नहीं बल्कि पारदर्शी और जवाबदेह पुलिसिंग का संकेत है। उन्होंने कहा कि यूपी पुलिस डिजिटल प्लेटफॉर्म पर मिलने वाली छोटी से छोटी शिकायत का भी संज्ञान ले रही है। ज्यादा एफआईआर का मतलब है कि लोग पुलिस पर भरोसा कर रहे हैं और पुलिस अधिक सुलभ हुई है। डीजीपी ने यह भी बताया कि वर्ष 2023 में राज्य की अपराध दर 181.3 थी, जो 2024 में घटकर 180.2 हो गई। उन्होंने कहा कि अपराध दर ही किसी राज्य की वास्तविक स्थिति का वैज्ञानिक आधार होती है।
रिपोर्ट के तीन वर्षीय तुलनात्मक आंकड़ों में यह भी सामने आया कि उत्तर प्रदेश में अपहरण, डकैती, लूट और चोरी जैसे अपराधों में कमी दर्ज की गई है। वर्ष 2023 में अपहरण के 14,272 मामले दर्ज हुए थे, जबकि 2024 में यह संख्या घटकर 5,306 रह गई। यह लगभग 62.8 प्रतिशत की गिरावट है। रिपोर्ट का मानना है कि पुलिस की तकनीकी निगरानी, सीसीटीवी नेटवर्क, डिजिटल ट्रैकिंग और अपराधियों के खिलाफ विशेष अभियान का इसका सकारात्मक असर पड़ा है।
हालांकि आंकड़े कई मामलों में राहत देने वाले हैं, लेकिन दहेज हत्या जैसे अपराध यह संकेत देते हैं कि कानून व्यवस्था के साथ-साथ सामाजिक सुधार भी उतना ही जरूरी है। रिपोर्ट का कहना है कि दहेज प्रथा, घरेलू हिंसा और महिलाओं के खिलाफ भेदभाव जैसी समस्याओं को केवल पुलिस कार्रवाई से पूरी तरह समाप्त नहीं किया जा सकता। इसके लिए सामाजिक जागरूकता, शिक्षा और सामूहिक जिम्मेदारी जरूरी है। महिला संगठनों का कहना है कि सरकार को दहेज विरोधी कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन के साथ-साथ ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में जागरूकता अभियान और तेज करने होंगे।
एनसीआरबी की रिपोर्ट उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था की एक मिश्रित तस्वीर पेश करती है। एक ओर राज्य कुल अपराध दर, हत्या, दुष्कर्म, साइबर अपराध और महिलाओं के खिलाफ अपराधों में राष्ट्रीय औसत से बेहतर स्थिति में दिखाई देता है, वहीं दहेज हत्या जैसे सामाजिक अपराध सरकार और समाज दोनों के लिए गंभीर चुनौती बने हुए हैं।
अब सबसे बड़ी चुनौती यही है कि अपराध नियंत्रण के साथ-साथ सामाजिक सोच में बदलाव कैसे लाया जाए, ताकि महिलाओं के खिलाफ हिंसा और दहेज हत्या जैसे अपराधों को जड़ से खत्म किया जा सके।
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Published on:
08 May 2026 10:25 am
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