लखनऊ

पंचायत चुनाव: पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष रिटायर्ड जस्टिस राम औतार सिंह कौन हैं? और किस-किस को किया गया शामिल

Panchayat Chunav Update: यूपी में राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग गठित हो चुका है। जानिए,पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष रिटायर्ड जस्टिस राम औतार सिंह के बारे में।

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May 21, 2026
पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष रिटायर्ड जस्टिस राम औतार सिंह के बारे में जानिए, फोटो सोर्स-पत्रिका न्यूज

Panchayat Chunav Update: उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) सरकार ने त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) आरक्षण तय करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके लिए राज्य सरकार ने ‘उत्तर प्रदेश राज्य स्थानीय ग्रामीण निकाय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग’ का गठन किया है। यह आयोग पंचायत चुनाव में ओबीसी आरक्षण को लेकर अध्ययन करेगा और अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगा।

सरकार के इस फैसले को पंचायत चुनाव और आगामी विधानसभा चुनाव 2027 के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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कौन हैं रिटायर्ड जस्टिस राम औतार सिंह जो हैं आयोग के अध्यक्ष

इलाहाबाद हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति राम औतार सिंह (Ram Autar Singh) को आयोग का अध्यक्ष बनाया गया है। जस्टिस राम औतार सिंह करीब 35 वर्षों तक न्यायिक सेवाओं में रहे हैं और उन्होंने कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं। उनका जन्म 15 जनवरी 1949 को उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में हुआ था। उन्होंने वर्ष 1976 में पीसीएस (न्यायिक सेवा) से अपने करियर की शुरुआत की थी। इसके बाद 1991 में उन्हें प्रमोशन देकर उच्च न्यायिक सेवा में भेजा गया।

जिला जज से हाईकोर्ट जज तक का सफर

जस्टिस राम औतार सिंह वर्ष 2005 में जिला एवं सत्र न्यायाधीश बने। बाद में 13 अप्रैल 2009 को उन्हें इलाहाबाद हाईकोर्ट में अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया गया। इसके बाद 24 दिसंबर 2010 को उन्होंने स्थायी न्यायाधीश के रूप में शपथ ली। वे 14 जनवरी 2011 को सेवानिवृत्त हुए थे। हालांकि रिटायरमेंट के बाद भी उन्हें समय-समय पर प्रशासनिक और कानूनी जिम्मेदारियां सौंपी जाती रही हैं।

पांच सदस्यीय टीम करेगी अध्ययन

राज्य सरकार ने आयोग में दो रिटायर्ड अपर जिला जज बृजेश कुमार और संतोष विश्वकर्मा को सदस्य बनाया है। इसके अलावा सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी डॉ. अरविंद चौरसिया और एसपी सिंह को भी आयोग में शामिल किया गया है।

यह आयोग पंचायतों में ओबीसी आरक्षण को लेकर सामाजिक और प्रशासनिक अध्ययन करेगा और छह महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सरकार को देगा। इसी रिपोर्ट के आधार पर पंचायत चुनावों में ओबीसी आरक्षण का निर्धारण किया जाएगा।

रिपोर्ट आने तक नहीं होंगे चुनाव?

उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव मई महीने में प्रस्तावित थे, लेकिन अब इनके अगले वर्ष तक टलने की संभावना जताई जा रही है, क्योंकि आयोग को अपनी रिपोर्ट देने में छह महीने का समय लगेगा और इसी बीच फरवरी-मार्च 2027 में विधानसभा चुनाव का समय भी आ जाएगा। ऐसे में माना जा रहा है कि पंचायत चुनाव विधानसभा चुनाव के बाद ही कराए जाएंगे।

प्रदेश में 58 हजार से ज्यादा पंचायत संस्थाएं

उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव बेहद व्यापक स्तर पर होते हैं। प्रदेश में कुल 57,695 ग्राम पंचायतें, 826 क्षेत्र पंचायतें और 75 जिला पंचायतें हैं। यानी कुल मिलाकर 58,596 पंचायत संस्थाओं के लिए चुनाव कराए जाने हैं। इसी वजह से ओबीसी आरक्षण को लेकर सरकार बेहद सतर्कता और कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ना चाहती है, ताकि भविष्य में किसी तरह का कानूनी विवाद न खड़ा हो।

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