
Pankaj Chaudhary Sonia Gandhi Citizenship: उत्तर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी ने सोनिया गांधी के मतदाता सूची में नाम दर्ज होने से जुड़े पुराने मामले को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले दो दिनों से संवैधानिक संस्था को लेकर एनडीए को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है, जबकि दूसरी ओर मतदाता सूची और नागरिकता से जुड़े गंभीर सवालों का जवाब विपक्ष को देना चाहिए। चौधरी ने कहा कि मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने की प्रक्रिया और उससे जुड़े दस्तावेजों की पारदर्शिता लोकतांत्रिक व्यवस्था की बुनियाद है।
पंकज चौधरी ने अपने बयान में सोनिया गांधी के भारतीय नागरिक बनने की तारीख और उससे पहले मतदाता सूची में नाम आने के आरोप का उल्लेख करते हुए सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि उपलब्ध दस्तावेजों और अदालत में चल रही कार्यवाही से इस मामले में कई प्रश्न सामने आए हैं। हालांकि, इस मामले में लगाए गए आरोपों की अंतिम कानूनी पुष्टि अभी नहीं हुई है और अदालत ने फिलहाल जांच से जुड़े पूर्व आदेश को निरस्त कर मामले को दोबारा सुनवाई के लिए भेजा है।
सोनिया गांधी की नागरिकता और मतदाता सूची में नाम शामिल होने का मामला नया नहीं है। अदालत में दाखिल शिकायत के अनुसार आरोप है कि सोनिया गांधी का नाम 1980 की मतदाता सूची में शामिल था, जबकि उन्होंने 30 अप्रैल 1983 को भारतीय नागरिकता हासिल की थी। इसी आधार पर शिकायतकर्ता की ओर से मतदाता सूची में नाम दर्ज किए जाने की प्रक्रिया की जांच और कार्रवाई की मांग की गई थी।
इस मामले को लेकर भाजपा की ओर से लगातार राजनीतिक सवाल उठाए जाते रहे हैं। पंकज चौधरी ने भी इसी विवाद को आधार बनाते हुए कांग्रेस से जवाब मांगने की बात कही है। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि किसी व्यक्ति के दस्तावेजों या मतदाता सूची में नाम दर्ज होने की प्रक्रिया में अनियमितता हुई है तो उसकी जांच होनी चाहिए और जिम्मेदार लोगों को जवाब देना चाहिए।
मामले में हालिया घटनाक्रम के बाद राजनीतिक बहस तेज हुई है। दिल्ली की राउज एवेन्यू अदालत के विशेष न्यायाधीश ने उस मजिस्ट्रेट आदेश को निरस्त कर दिया, जिसमें सोनिया गांधी के खिलाफ मतदाता सूची में नाम शामिल किए जाने के आरोपों की जांच की मांग को आगे बढ़ाने से इनकार किया गया था। अदालत ने मामले को दोबारा संबंधित अदालत के पास भेजते हुए कानून के अनुसार नए सिरे से और कारणयुक्त आदेश पारित करने को कहा है।
अदालत के इस आदेश का अर्थ यह नहीं है कि सोनिया गांधी के खिलाफ लगाए गए आरोप अदालत ने साबित कर दिए हैं। अदालत ने फिलहाल पूर्व आदेश की कानूनी प्रक्रिया और उसमें दिए गए कारणों को लेकर आपत्ति दर्ज करते हुए मामले पर दोबारा विचार करने का रास्ता खोला है। मामले की अगली सुनवाई 29 सितंबर को प्रस्तावित है। ऐसे में अंतिम कानूनी निष्कर्ष आगे की न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा।
पंकज चौधरी के बयान में फॉर्म-6 में बदलाव का मुद्दा भी प्रमुखता से सामने आया। नए मतदाता के रूप में नाम दर्ज कराने के लिए चुनाव आयोग का फॉर्म-6 इस्तेमाल किया जाता है। हाल में इस फॉर्म को लेकर भी राजनीतिक और संस्थागत बहस हुई है। चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि मौजूदा फॉर्म-6 में बदलाव नहीं किया गया है और विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर से जुड़ा नया हिस्सा अलग एनेक्सर के रूप में जोड़ा गया है।
ऐसे में फॉर्म-6 को लेकर उठाए जा रहे राजनीतिक सवाल और सोनिया गांधी के पुराने मतदाता सूची विवाद को अलग-अलग संदर्भों में देखना जरूरी है। एक मामला मौजूदा चुनावी प्रक्रिया में फॉर्म और एसआईआर से संबंधित है, जबकि सोनिया गांधी से जुड़ा विवाद दशकों पुरानी मतदाता सूची में नाम शामिल किए जाने के आरोपों पर आधारित है।
पंकज चौधरी ने कहा कि लोकतंत्र में मतदाता सूची की विश्वसनीयता बेहद महत्वपूर्ण है। उनका कहना है कि जो लोग चुनावी प्रक्रिया और संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हैं, उन्हें ऐसे मामलों में भी पारदर्शिता के साथ जवाब देना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सोनिया गांधी के मामले में यदि दस्तावेजों के इस्तेमाल या मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने में कोई गड़बड़ी हुई है तो संबंधित लोगों को इसकी जिम्मेदारी स्वीकार करनी चाहिए। उन्होंने विपक्ष से देशवासियों के सामने स्थिति स्पष्ट करने और माफी मांगने की मांग भी की। हालांकि, यह भाजपा प्रदेश अध्यक्ष की राजनीतिक प्रतिक्रिया है। अदालत में लंबित मामले में आरोपों की सत्यता का निर्धारण अभी बाकी है।
सोनिया गांधी के मतदाता सूची विवाद के फिर चर्चा में आने के बाद भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज होने के संकेत हैं। भाजपा इसे मतदाता सूची की विश्वसनीयता और लोकतांत्रिक प्रक्रिया से जोड़ रही है, जबकि मामले का कानूनी पक्ष अभी अदालत के समक्ष विचाराधीन है। इस पूरे विवाद में सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि अदालत ने पहले की अस्वीकृति को बरकरार नहीं रखा और मामले को नए सिरे से विचार के लिए भेजा है। अब आगे की सुनवाई और संबंधित पक्षों की दलीलों के बाद यह स्पष्ट होगा कि जांच को किस दिशा में आगे बढ़ाया जाता है। ऐसे में राजनीतिक आरोपों और न्यायिक निष्कर्षों के बीच अंतर बनाए रखना जरूरी होगा।
पंकज चौधरी ने अपने बयान के जरिए मतदाता सूची, नागरिकता और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवालों को राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में संस्थाओं पर सवाल उठाने से पहले सभी पक्षों को अपने रिकॉर्ड और दस्तावेजों के बारे में भी स्पष्टता रखनी चाहिए। फिलहाल सोनिया गांधी से जुड़ा मामला अदालत में विचाराधीन है और इसकी अगली सुनवाई पर सभी की नजर रहेगी। अदालत की आगे की कार्यवाही से यह तय होगा कि शिकायत में लगाए गए आरोपों पर जांच किस स्तर तक जाती है। वहीं, भाजपा की ओर से इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक सवाल उठाए जा रहे हैं और कांग्रेस से जवाब की मांग की जा रही है।