लखनऊ

इस तस्वीर को शेयर कर पंखुड़ी पाठक का छलका दर्द, कहा राजनीतिक दलों में इस मुद्दे पर चुप्पी साधे बैठे हैं

ट्विटर पर इस तस्वीर को शेयर कर पंखुड़ी पाठक ने कही ये बड़ी बात
2 min read
Jun 08, 2018
pankhuri pathak
इस तस्वीर को शेयर कर पंखुड़ी पाठक का छलका दर्द, कहा राजनीतिक दलों में इस मुद्दे पर चुप्पी साधे बैठे हैं

लखनऊ. बढ़ते पॉलयूशन ने लोगों की नाक में दम कर रखा है। ये मुद्दा राजधानी लखऩऊ समेत की शहरों में उठा है लेकिन शायद ही कभी किसी पॉलिटिकल पार्टी ने इस पर बात की होगी। ये बात हम नहीं बल्कि समाजवादी पार्टी की प्रवक्ता पंखुड़ी पाठक ने कहा है। ट्विटर पर धूल भरे प्रदूषण की फोटो शेयर कर उन्होंने कहा है कि बढ़ता प्रदूषण आज भारत की सबसे बढ़ी चुनौती बन कर उभर रहा है। लेकिन अफसोस की बात है कि वे हमारे राष्ट्रीय प्रवचन का हिस्सा नहीं हैं। राजनीतिक दलों में से कोई भी इस मुद्दे को उजागर करने की आवश्यकता महसूस नहीं करता क्योंकि इसका कोई राजनीतिक मूल्य नहीं है।

खतरनाक है ये प्रदूषण

जाहिर है कि प्रदूषण किसी जानलेवा बीमारी से कम नहीं है। सेंटर फॉर एन्वॉयरमेंट एंड एनर्जीडेवलपमेंट (सीड) की रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक 'नो व्हाट यू ब्रीथ' बढ़ते प्रदूषण के कारण प्रीमैच्योर मोर्टेलिटी रिपोर्ट 300 के पास पहुंची है। इसका मतलब सिर्फ प्रदूषण के कारण कई लोगों की समय से पहले ही मौत हो जाती है और इसका आंकड़ा घटने की बजाय बढ़ता ही जा रहा है। एक रिपोर्ट के अनुसार लखनऊ की इंडेक्य वैल्यू 173 है, जो कि कुछ हद तक ठीक है। लेकिन जिस कदर धूल भरी आंधी आती है, उससे और बाकी कारणों से प्रदूषण का स्तर बढ़ता ही जा रहा है और ये खतरनाक है।

गाड़ियों से होता प्रदूषण

एक रिपोर्ट के अनुसार, लखनऊ में साल 2000 के बाद से वाहनों की संख्या 75 प्रतिशत बढ़ गई है, जबकि कार्बन पार्टिकल्स के स्तर में भी 2002 से 2014 के दौरान 60 प्रतिशत तक का इजाफा हुआ है। इसी के साथ शहर में कम से कम 800 बसें संचालित हैं लेकिन उन बसों का कोई फिटनेस नहीं है।

मुद्दे को उजागर करने की है जरूरत

प्रदूषण से होने वाली बीमारी या फिर यूं कहें कि इससे होने वाली स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के बारे में जानता हर कोई है लेकिन इस पर बात कोई नहीं करता।

Published on:
08 Jun 2018 04:27 pm