लखनऊ के चारबाग स्टेशन पर करीब तीन सौ ट्रेनों का हर रोज आवागमन होता है।
लखनऊ. स्टेशनों और सार्वजनिक स्थानों पर भगदड़ के कारण होने वाली मौतों के लिए प्रमुख रूप से रेल प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों के बीच भीड़ प्रबंधन को लेकर सामंजस्य की कमी जिम्मेदार होती है। लखनऊ रेलवे स्टेशन पर भले ही हाल के दिनों में कोई बड़ी घटना न हुई हो लेकिन फुट ओवर ब्रिज की स्थिति और उनपर यात्रियों की संख्या का दवाब हादसे को निमंत्रण देता नजर आता है। रेलवे स्टेशन पर अचानक ट्रेन के प्लेटफार्म बदलने की स्थिति में कई बार भगदड़ की घटनाएं हो चुकी हैं।
लखनऊ के चारबाग स्टेशन पर करीब तीन सौ ट्रेनों का हर रोज आवागमन होता है। अनुमान है कि हर रोज इस स्टेशन से डेढ़ लाख पैसेंजर गुजरते हैं। इसके अलावा लखनऊ जंक्शन पर भी यात्रियों की खासी भीड़ सफर करती है। वर्तमान में दोनों स्टेशनों पर एक-एक फुट ओवर ब्रिज है। चारबाग स्टेशन पर दो और लखनऊ जंक्शन पर एक नया फुट ओवर ब्रिज बनाने पर काम चल रहा है। रेलवे की योजना इन स्टेशनों पर एस्केलेटर लगाने की भी है लेकिन वर्तमान में जो स्थिति है, वह बेहद खतरनाक है। रेलवे के फुट ओवर ब्रिज आठ से दस फुट चौड़ाई के हैं। भीड़ अधिक होने पर इन पर दवाब बढ़ जाता है और अक्सर भगदड़ जैसी स्थिति देखने को मिलती है। इस संबंध में रेलवे की उपभोक्ता सलाहकार समितियों की बैठक के दौरान यात्री और जन प्रतिनिधि कई बार फुट ओवर ब्रिज की संख्या बढ़ाने और उनको चौड़ा करने की मांग भी उठा चुके हैं।
उत्तर रेलवे के लखनऊ मंडल के डीआरएम सतीश कुमार कहते हैं कि स्टेशन पर सुरक्षा को लेकर समय-समय पर समीक्षा बैठकें आयोजित होती हैं।भीड़भाड़ वाले दिनों में सुरक्षा बलों की विशेष ड्राइव चलाई जाती है। सीसीटीवी के कंट्रोल रूम से स्टेशन पर यात्रियों की गतिविधियों की मॉनिटरिंग की जाती है। जिन स्टेशनों पर भीड़ अधिक होती हैं, वहां अतिरिक्त हेल्प सेंटर खोले जाते हैं और अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की जाती है।