लखनऊ

Phalodi Satta Bazar के अनुमानों को फेल करेगा पीएम मोदी का ये दांव, मिल्कीपुर चुनाव पर डालेगा असर

PM Modi Mahakumbh Visit: 5 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का महाकुंभ दौरा एक चुनावी रणनीति की तरह देखा जा रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक, इस दौरे का असर विधानसभा चुनावों के परिणाम पर पड़ सकता है। आइए जानते हैं कि यह दौरा विधानसभा चुनाव के मतदाताओं को कैसे प्रभावित कर सकता है…

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Jan 25, 2025

Phalodi Satta Bazar, Milkipur By Election 2025: 5 फरवरी को होने वाले मिल्कीपुर विधानसभा चुनाव और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयागराज दौरे के बीच दिलचस्प सियासी समीकरण उभर कर सामने आ रहे हैं। एक ओर प्रधानमंत्री मोदी महाकुंभ में डुबकी लगाने के लिए प्रयागराज पहुंचेंगे तो दूसरी ओर मिल्कीपुर में वोटर प्रत्याशियों की किस्मत का फैसला करेंगे। अब सवाल यह है कि क्या पीएम मोदी का महाकुंभ दौरा चुनावी नतीजों पर कोई प्रभाव डालेगा?

क्या कहते हैं राजनीतिक विशेषज्ञ? 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का महाकुंभ दौरा धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से काफी महत्वपूर्ण है। यह दौरा उनके समर्थकों को आकर्षित कर सकता है। साथ ही, इसी दिन दिल्ली और उत्तर प्रदेश के मिल्कीपुर में चुनाव है, जिसकी वजह से यह दौरा मतदाताओं की भावनाओं को मजबूत कर सकता है, विशेष रूप से वे लोग जो धर्म और संस्कृति से जुड़ी योजनाओं और कार्यक्रमों को महत्व देते हैं। इसके साथ ही, पीएम मोदी का प्रयागराज दौरा और महाकुंभ में उनकी उपस्थिति निश्चित रूप से मीडिया में प्रमुखता से छाएगी, और इसका असर चुनावी माहौल पर पड़ सकता है।

वोटरों को साधने की रणनीति

5 फरवरी को जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का धार्मिक और आध्यात्मिक स्वरूप दिल्ली और मिल्कीपुर के मतदाताओं के सामने होगा, तो भाजपा को इस मौके का भरपूर फायदा उठाने की उम्मीद है। भाजपा की चुनावी रणनीति यह है कि इस इवेंट से विधानसभा चुनाव में उनकी स्थिति मजबूत हो जाएगी। इस अवसर का इस्तेमाल भाजपा अपने मतदाताओं को पक्ष अपने फेवर में मोड़ सकती है। इसके साथ ही, भाजपा उन समर्थकों को भी साध लेगी, जो पूर्व सांसद लल्लू सिंह की वजह से भाजपा से दूरी बना रहे थे।

क्या कहता है फलोदी सट्टा बाजार का आंकड़ा?

मिल्कीपुर विधानसभा चुनाव को लेकर फलोदी सट्टा बाजार ने एक दिलचस्प समीकरण सामने रखा है। सट्टा बाजार के अनुसार, चंद्रशेखर आजाद ‘रावण’ के उम्मीदवार सूरज चौधरी को मैदान में उतारने से सपा और भाजपा दोनों के लिए समीकरण बदल गए हैं। इस कदम ने चुनावी गणनाओं में नया मोड़ दिया है, जिससे सपा और भाजपा दोनों के बीच मुकाबला और भी कड़ा हो गया है।

इस सीट पर बसपा और कांग्रेस के पारंपरिक वोटर और दलित वोटर्स निर्णायक साबित हो सकते हैं। इसके अलावा, मिल्कीपुर में सपा और अवधेश प्रसाद का प्रभाव भी इस चुनावी दौड़ को दिलचस्प बना रहा है, जिससे गेंद फिलहाल सपा के पाले में दिख रही है।

क्या कहता है मिल्कीपुर का इतिहास?

मिल्कीपुर उपचुनाव में इस बार आजाद समाज पार्टी की एंट्री से त्रिकोणीय मुकाबला है। वहीं, भाजपा और सपा के लिए यह सीट प्रतिष्ठा का सवाल बन गई है। मिल्कीपुर के इतिहास को देखें तो यह विधानसभा सीट भाजपा के लिए हमेशा से संघर्षपूर्ण रहा है। साल 1967 से लेकर अब तक इस सीट पर 17 बार हुए विधानसभा चुनाव, लेकिन भाजपा सिर्फ तीन बार जीत हासिल कर पाई है। वहीं, सपा ने इस सीट पर 6 बार जीत का परचम लहराया है।

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