Raja Bhaiya Met Yashwant Singh: राजनीति में मजबूत पकड़ रखने वाले रघुराज प्रताप उर्फ राजा भइया के राजनीति में आगे के दांव बदल सकते हैं। दरअसल, एमएलसी का चुनाव जीतने के बाद यशवंत सिंह से मुलाकात की। यह अंदाजा लगाया जा रहा कि राजा भैया जनसत्ता दल का विस्तार कर रहे।
यूपी विधान परिषद के चुनाव में भी बीजेपी ने सपा का सूपड़ा साफ कर दिया है। विधान परिषद (एमएलसी) में जहां 36 सीटों में 33 पर बीजेपी ने जीत दर्ज की है तो दो पर निर्दल प्रत्याशी और एक सीट पर रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया की जनसत्ता दल ने जीत दर्ज की है। जनसत्ता दल के प्रत्याशी के एमएलसी जीतने के बाद राजा भैया उत्साहित नजर आए। लखनऊ जाकर उन्होंने बीजेपी से निष्कासित यशवंत सिंह से मुलाकात कर बधाई दी। लेकिन क्या मुलाकात के पीछे है कोई बड़ी वजह हो सकती है।
विधान परिषद के चुनाव का परिणाम आ चुके हैं, जिसमें बीजेपी ने शानदार जीत दर्ज की है। वहीं, राजा भैया की पार्टी से अक्षय प्रताप सिंह उर्फ गोपाल प्रतापगढ़ से विधान परिषद सदस्य निर्वाचित हुए हैं। बता दें कि बीजेपी से 6 साल के लिए निष्कासित पूर्व एमएलसी यशवंत सिंह के बेटे विक्रांत सिंह रिशु भी आजमगढ़ से निर्दलीय जीते हैं। जीत के बाद राजा भैया देर रात लखनऊ पहुंचे और यशवंत सिंह से मुलाकात की। अंदाजा लगाया जा रहा है कि राजा भैया यशवंत सिंह से हाथ मिलाकर अपनी पार्टी में जगह देना चाह रहे हैं।
क्या जनसत्ता दल का होगा विस्तार
राजा भैया के यशवंत सिंह से मिलने के बाद कयास लगाए जा रहे कि जनसत्ता दल का अब विस्तार होगा। हालांकि राजा भैया ने अभी इस पर कोई बयान नही दिया। लेकिन सत्ता के गलियारों में राजा भैया की पार्टी जनसत्ता लोक दल के विस्तार की खूब चर्चा है। बीते दिनों राजा भैया ने कहा कि बड़े दल चुनाव हार गए या फिर लड़ने का साहस तक नहीं कर सके हैं। लेकिन बीजेपी के बाद जनसत्ता को जीत हांसिल हुई।
बीजेपी के बाद जनसत्ता दल चुनाव में विजयी
राजा भैया 1993 से लगातार विधायक निर्वाचित हो रहे हैं। राजा भैया ने अपनी जनसत्ता दल पीर्टी से प्रतापगढ़ निर्वाचन क्षेत्र से अक्षय प्रताप सिंह को उम्मीदवार बनाया था। जीत के बाद बातचीत के दौरान राजा भैया ने कहा कि एमएलसी चुनाव जनसत्ता दल के कार्यकर्ताओं की मेहनत की जीत है। प्रदेश में भाजपा के अलावा सिर्फ जनसत्ता दल ही चुनाव में विजय हासिल कर रही है। अकेले चुनाव लड़ने के सवाल पर राजा भैया ने कहा कि बहुत सारी पार्टियों की गलतफहमी दूर होती जा रही है।