उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव के लिए तैयारियां जोरों पर हैं। सूबे में 11 राज्यसभा सीटें खाली हो रही हैं। चार जुलाई को यूपी के 11 राज्यसभा सदस्यों का कार्यकाल खत्म हो रहा है। वैसे तो असली मुकाबला भाजपा और सपा के बीच है। बहुजन समाज पार्टी और कांग्रेस तो सिर्फ चुनाव का खेल देखेंगी। पर राजा भैया साबित होंगे ट्रंप कार्ड जानें कैसे ...
उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव के लिए तैयारियां जोरों पर हैं। सूबे में 11 राज्यसभा सीटें खाली हो रही हैं। चार जुलाई को यूपी के 11 राज्यसभा सदस्यों का कार्यकाल खत्म हो रहा है। वैसे तो असली मुकाबला भाजपा और सपा के बीच है। बहुजन समाज पार्टी और कांग्रेस तो सिर्फ चुनाव का खेल देखेंगी। ये दोनों दल एक भी सीट जीतने की स्थिति में नहीं हैं। इस चुनाव में सबसे बड़ा नुकसान बसपा और कांग्रेस को होने वाला है। पर यूपी से राज्यसभा की 11वीं सीट पर किसी भी उम्मीदवार की जीत के लिए कांग्रेस, राजा भैया का जनसत्ता दल (लोकतांत्रिक) और बसपा का रोल अहम हो जाता है। कांग्रेस 2, जनसत्ता दल (लोकतांत्रिक) 2 और बसपा 1 विधायक हैं। सपा को कांग्रेस से समर्थन मिलना लगभग तय है। राजा भैया - अखिलेश यादव के बीच थोड़ी तल्खी बढ़ी थी तो भाजपा गठबंधन के साथ रह सकते हैं। उत्तर प्रदेश से जुलाई में खाली हो रहे 11 राज्यसभा सदस्यों के पद के लिए चुनाव 10 जून को होगा।
राज्यसभा के लिए यूपी से 31 सदस्य
उत्तर प्रदेश में कुल 31 सदस्य राज्यसभा के लिए चुने जाते हैं। जुलाई में यूपी से राज्यसभा की 11 सीटें खाली हो रही हैं। इनमें भाजपा 5, सपा 3, बसपा 2 और 1 कांग्रेस का सांसद हैं। इनमें भाजपा के जफर इस्लाम, शिव प्रताप शुक्ला, संजय सेठ, सुरेंद्र नागर और जयप्रकाश निषाद हैं। तो समाजवादी पार्टी के सुखराम सिंह यादव, रेवती रमण सिंह और विशंभर प्रसाद निषाद, बसपा के सतीश चंद्र मिश्रा और अशोक सिद्धार्थ तथा कांग्रेस के कपिल सिब्बल शामिल हैं।
राजा भैया, कांग्रेस, बसपा सभी महत्वपूर्ण
यूपी विधानसभा चुनाव 2022 में भाजपा गठबंधन के पास 273 विधायक हैं। सपा गठबंधन के बैनर पर 125 विधायक चुनाव जीते हैं। कांग्रेस 2, जनसत्ता दल (लोकतांत्रिक) 2 और बसपा 1 विधायक हैं। राज्यसभा की सीट के लिए कम से कम 37 विधायकों का वोट चाहिए। तो भाजपा सात सीटों पर आसानी से विजय पा जाएगी। और कम से कम तीन राज्यसभा सीटें सपा गठबंधन जीत जाएगी। तो असली मुकाबला फंसेगा 11वीं सीट पर। इस सीट के लिए राजा भैया, कांग्रेस और बसपा सभी महत्वपूर्ण हो जाते हैं।
भाजपा का ही पलड़ा रहेगा भारी
यह तो तय है कि कांग्रेस का समर्थन समाजवादी पार्टी को जाएगा। अखिलेश यादव और राजा भैया के रिश्तें हाल फिलहाल ठीक नहीं हैं। तो यह करीब करीब तय समझें की राजा भैया के दल का भगवा को समर्थन रहेगा। बसपा कुछ भी कर सकती है। सात उम्मीदवारों को वोट देने के बाद भाजपा के पास 24 और सपा के पास 19 अतिरिक्त वोट रहेंगे। इन आंकड़ों के आधार पर कहा जा सकता है कि राज्यसभा चुनाव में भाजपा का ही पलड़ा भारी रहेगा।