लोकसभा चुनाव 2019 अभी दूर हैं लेकिन चुनाव के मुद्दे क्या होंगे? किसकी रणनीति क्या होगी? रूपरेखा तय होने लग गई है।
हरिओम द्विवेदी
लखनऊ. 2019 के आम चुनाव अभी दूर हैं। लेकिन, यूपी में चुनाव के मुद्दे क्या होंगे? किसकी रणनीति क्या होगी? इसकी रूपरेखा तय होने लग गई है। राम मंदिर का मामला अभी उच्चतम न्यायालय में है। सुनवाई जारी है। आम चुनाव तक इस पर कोई फैसला आएगा या नहीं, इस पर संशय है। इसलिए भाजपा ने अपने दूसरे थोक वोट बैंक पर अभी से ध्यान केंद्रित कर दिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा में उत्तर प्रदेश के अति दलितों औऱ अति पिछड़ों को अलग से आरक्षण दिये जाने की घोषणा करके बसपा सुप्रीमो मायावती और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के वोटबैंक को साधने की चाल चल दी है। गौरतलब है कि 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा की जीत की वजह गैर यादव-गैर जाटव ध्रुवीकरण अहम वजह रही थी।
अति पिछड़ों-अति दलितों को लुभाने की चाल
उप्र में पिछड़ी जातियां राजनीति में अहम स्थान रखती हैं। इसलिए इन्हें रिझाने की जब-तब कोशिशें होती रही हैं। सूबे में पिछड़ों और दलितों को कोटे में कोटा दिए जाने की पहली कवायद राजनाथ सिंह के मुख्यमंत्रित्व काल में भी हुई थी। तब इसके लिए उन्होंने वरिष्ठ मंत्री हुकुम सिंह की अध्यक्षता में सामाजिक न्याय समिति का गठन किया था, जिसके तहत पिछड़ा वर्ग में से दो दर्जन से अधिक जातियों को तकरीबन 17 फीसदी आरक्षण अलग से दिए जाने की सिफारिश की गई थी। इसी तरह अनुसूचित जाति में जो काफी पिछड़ी जातियां हैं उनको अलग से आरक्षण दिए जाने की सिफारिश की गयी थी। समिति ने काका कालेलकर आयोग, मंडल आयोग, उत्तर प्रदेश सर्वाधिक पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्टों के आधार पर 'आरक्षण में आरक्षण' का फॉर्मूला दिया था। लेकिन, उच्चतम न्यायालय में रोक की वजह से सामाजिक न्याय समिति की सिफारिशों को लागू नहीं किया गया था।
योगी ने छीना सपा-बसपा का मुद्दा
उत्तर प्रदेश में पिछड़ा और अति पिछड़ा, अति दलित का मुद्दा एक फिर से गरम होने लगा है। बसपा और सपा इस मुद्दे को आगे बढ़ाते इसके पहले योगी आदित्यनाथ ने इन्हें अलग से आरक्षण दिये जाने की घोषणा कर दी है। खास बात यह है कि अप्रत्यक्ष तौर पर इस मुहिम को भाजपा के सांसद और सरकार में सहयोगी दल आगे बढ़ा रहे हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा उपचुनाव में हार के बाद बीजेपी ने सपा-बसपा के कोर वोटर में सेंध लगाने की नीति के तहत सालों पुराने मुद्दे को फिर से जिंदा करने की कोशिश की है।
नेताओं की उलटबयानी पर मौन है भाजपा
बहराइच से भाजपा सांसद सावित्रीबाई फुले ने तो केंद्र सरकार पर आरक्षण खत्म करने की साजिश तक का आरोप लगा दिया है। लेकिन, ताज्जुब है गंभीर आरोप के बाद भी भाजपा नेतृत्व चुप है। मतलब साफ है कि पार्टी हाईकमान खुद इस मुद्दे को हवा दे रहा है। सावित्रीबाई फुले नमो बुद्धाय जनसेवा समिति के बैनर तले अति पिछड़ों और अति दलितों को अलग से आरक्षण देने, पदोन्नति में आरक्षण और निजी क्षेत्र में आरक्षण देने जैसी मांग की है। इसके लिए वो एक अप्रैल स्मृति उपवन, लखनऊ में एक बड़ी रैली भी करने जा रही हैं, वहीं राज्य सरकार के सहयोगी दल सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर भी अति पिछड़ा, सर्वाधिक पिछड़ा और अति दलित वर्ग के आरक्षण की मांग कर रहे हैं। वह भी 10 अप्रैल को राजधानी में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के सामने ये सभी मुद्दे उठायेंगे। राजभर बार-बार सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल रहे हैं, लेकिन, पार्टी आलाकमान उनके मुद्दे पर भी मौन है।
आरक्षण पर सीएम योगी का ऐलान
बजट सत्र के दौरान उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उनकी सरकार अति पिछड़ों तथा अति दलितों को आरक्षण देगी। उन्होंने कहा कि जिन कमजोर वर्ग के लोगों को वास्तव में आरक्षण की आवश्यकता थी, उन्हें अभी तक नहीं मिला पाया। अति पिछड़ों तथा अति दलितों को आरक्षण देने के लिए सरकार जल्द ही एक उच्चस्तरीय कमेटी बनाएगी। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में अभी तक एससी के लिये 15 फीसदी, एसटी के लिए 7.5 फीसदी और ओबीसी के लिये 27 फीसदी आरक्षण है।
इन राज्यों में अति पिछड़ों को अलग से आरक्षण
देश के 11 राज्यों में अति पिछड़ों को अलग से आरक्षण दिया गया है। इनमें बिहार, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु, पुंडुचेरी, हरियाणा, उड़ीसा, पश्चिम बंगाल, केरल, जम्मू-कश्मीर शामिल हैं।
2011 की जनगणना के मुताबिक उत्तर प्रदेश की आबादी में दलितों-पिछड़ों का अनुपात
पिछड़े- 42 फीसदी
कुशवाहा- 14 फीसदी (मौर्य, शाक्य, सैनी आदि)
मल्लाह/निषाद- 5 फीसदी
कुर्मी- 3.5 फीसदी
यादव- 6 फीसदी
गुर्जर- 0.8 फीसदी
गड़रिया- 2 फीसदी
कश्यप- 2 फीसदी
लोध- 1.82 फीसदी
जाट- 1.73 फीसदी
कुम्हार- 1.48 फीसदी
तेली- 1.43 फीसदी
नाई- 1.16 फीसदी
बढ़ई- 1.13 फीसदी
अन्य पिछड़ा वर्ग- 11 फीसदी (हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई व बौद्ध मिलाकर)
दलित (अनुसूचित जाति)
जाटव- 11.3
पासी- 3
कोरी- 1.4
अन्य दलित- 4.6