
Jayant Chaudhary RLD West UP Campaign: राष्ट्रीय लोक दल (आरएलडी) ने 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर अपनी जमीनी तैयारी तेज कर दी है। पार्टी ने सोमवार को हाथरस के मुरसान स्थित जीएसएएस इंटर कॉलेज मैदान से सात दिवसीय ‘स्वाभिमान सम्मान पदयात्रा एवं समरसता अभियान’ का शंखनाद किया। यह अभियान पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गांव-गांव में जनसंपर्क बढ़ाने और नए सामाजिक समीकरण साधने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
अभियान की शुरुआत स्वतंत्रता संग्राम सेनानी राजा महेंद्र प्रताप सिंह की प्रतिमा पर माल्यार्पण के साथ हुई। जनसभा में रालोद संसदीय बोर्ड अध्यक्ष केसी त्यागी, प्रदेश अध्यक्ष ऐश्वर्य राज सिंह, सादाबाद विधायक प्रदीप चौधरी उर्फ गुड्डू भैया, जिलाध्यक्ष चौधरी श्याम सिंह और वरिष्ठ नेता प्रवीण पोनिया समेत कई दिग्गज नेता मौजूद रहे। नेताओं ने पार्टी कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे गांव-गांव जाकर लोगों से सीधा संवाद करें और सामाजिक समरसता का संदेश पहुंचाएं।
यह पदयात्रा सात दिनों तक चलेगी, जिसमें कार्यकर्ता पश्चिमी यूपी के विभिन्न गांवों में घूमकर किसानों, युवाओं और अन्य वर्गों से संपर्क करेंगे। आरएलडी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी ने इस जनसंपर्क अभियान को चुनावी तैयारियों का अहम हिस्सा बताया है।
आरएलडी पारंपरिक रूप से जाट वोट बैंक पर निर्भर रही है, लेकिन अब पार्टी अपनी पहुंच बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही है। हाल के महीनों में गठित ‘टीम आरएलडी’ के जरिए हर गांव और वार्ड में कार्यकर्ता नियुक्त किए गए हैं। यह टीम स्थानीय मुद्दों की जानकारी सीधे पार्टी नेतृत्व तक पहुंचाती है। पश्चिमी यूपी के हस्तिनापुर, ब्रज और रुहेलखंड क्षेत्रों में संगठन मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है।
पार्टी 29 अति पिछड़ी जातियों (एमबीसी) को प्रतिनिधित्व देकर नया वोट बैंक तैयार करने की कोशिश में है। इनमें गोसाईं, गड़ेरिया, माली-सैनी, कहार, कुम्हार, तेली, नाई समेत कई समुदाय शामिल हैं। इन जातियों को संगठन में जगह देकर आरएलडी जाट-केंद्रित छवि से आगे बढ़ना चाहती है। सामाजिक समरसता अभियान इसी रणनीति का हिस्सा है, जिसमें भेदभाव खत्म करने और सभी वर्गों को साथ लेकर चलने का संदेश दिया जा रहा है।
पदयात्रा के दौरान किसान हितों, युवा रोजगार, कौशल विकास और बुनियादी ढांचे जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है। जयंत चौधरी पश्चिमी यूपी में एक्सप्रेसवे, रैपिड रेल और औद्योगिक निवेश की बात पहले भी उठा चुके हैं। पार्टी एनडीए का हिस्सा होने के नाते भाजपा के साथ गठबंधन में अपनी भूमिका मजबूत करना चाहती है। साथ ही अवध और पूर्वांचल में भी विस्तार की योजना है।
सपा के साथ जातीय समीकरणों को लेकर चल रहे सियासी घमासान के बीच आरएलडी का यह अभियान पश्चिमी यूपी की राजनीति को नई दिशा दे सकता है। सपा गुर्जर-पाल-बघेल समीकरण साधने की कोशिश कर रही है, जबकि आरएलडी जाट आधार को सुरक्षित रखते हुए अन्य पिछड़े वर्गों तक पहुंच बना रही है।
सात दिवसीय इस कारवां से आरएलडी कार्यकर्ताओं में नया उत्साह दिख रहा है। गांव स्तर तक सीधा संपर्क बढ़ाने से पार्टी को जमीनी हकीकत समझने और मतदाताओं के बीच अपनी उपस्थिति दर्ज कराने में मदद मिलेगी। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि अगर आरएलडी अति पिछड़ी जातियों और अन्य समुदायों को सफलतापूर्वक जोड़ पाई तो 2027 के चुनाव में पश्चिमी यूपी की कई सीटों पर समीकरण बदल सकते हैं।
कुल मिलाकर, मुरसान से शुरू हुई यह स्वाभिमान सम्मान पदयात्रा आरएलडी की व्यापक रणनीति का प्रतीक है। जयंत चौधरी की अगुवाई में पार्टी पारंपरिक वोट बैंक के साथ नए वर्गों को साधकर अपनी ताकत बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। आने वाले दिनों में यह अभियान अन्य जिलों में भी फैलेगा और चुनावी माहौल को और गर्माएगा।