लखनऊ

चुनाव आयोग विवाद पर सतीश महाना का कांग्रेस पर तीखा हमला, कहा- संस्थाओं का विरोध करना कांग्रेस की पुरानी आदत

Election Commission Controversy: चुनाव आयोग विवाद पर उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने कांग्रेस पर निशाना साधा। सतीश महाना ने कहा कि संस्थाओं का विरोध करना कांग्रेस की आदत बन गई है।
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Sep 26, 2026
Satish Mahana UP Assembly Uttar Pradesh Politics
स्पीकर सतीश महाना (photo- x @brijshyam8)

UP Politics: उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने कांग्रेस पार्टी पर बहुत तीखा हमला बोला है। उन्होंने कांग्रेस के उस रवैये की कड़ी आलोचना की है जिसमें पार्टी लगातार देश की संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल खड़े करती रहती है। सतीश महाना ने दो टूक शब्दों में कहा कि देश की महत्वपूर्ण संस्थाओं का विरोध करना अब कांग्रेस पार्टी का एकमात्र और मुख्य काम बन गया है। जब भी चुनाव परिणाम उनके पक्ष में आते हैं तब वे चुप रहते हैं लेकिन विपरीत परिणाम आने पर वे संस्थाओं पर उंगली उठाने लगते हैं।

'चुनाव जीतते हैं तो आयोग पर सवाल नहीं उठाते'

विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि, "संस्थाओं का विरोध करना अब कांग्रेस पार्टी का एकमात्र काम बन गया है। तेलंगाना में जीत के समय उन्होंने कोई विरोध नहीं किया, न ही हिमाचल प्रदेश में सरकार बनने पर या कर्नाटक में जीत के समय भ्रष्टाचार को लेकर कोई चिंता जताई। देश ने उन्हें नकार दिया है, फिर भी वे इस वास्तविकता को समझने में विफल हैं। यदि मुख्य चुनाव आयुक्त या चुनाव आयोग का इरादा चुनाव प्रक्रिया में धांधली करने का होता, तो क्या कांग्रेस के लिए हाल के चुनाव जीतना संभव होता? संस्थाओं के खिलाफ बोलना कांग्रेस की आदत बन गई है।"

न्यायपालिका, चुनाव आयोग या संविधान में विश्वास नहीं

महाना ने आगे कहा कि, उन्हें न्यायपालिका, चुनाव आयोग या संविधान में कोई विश्वास नहीं है। जिन लोगों को संस्थाओं में विश्वास नहीं होता, वे किसी का भी विरोध कर सकते हैं। सतीश महाना ने कहा कि चुनाव आयोग सहित देश की संवैधानिक संस्थाएं अपनी जिम्मेदारी के अनुसार काम करती हैं। उन्होंने कांग्रेस से चुनाव प्रक्रिया और संस्थाओं को लेकर किए जा रहे सवालों पर पुनर्विचार करने की बात कही।

क्या है चुनाव आयोग को लेकर चल रहा पूरा विवाद

दरअसल चुनाव आयोग को लेकर मौजूदा विवाद स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन(SIR) के जरिए मतदाता सूची में किए जा रहे बदलाव और आयोग के भीतर कथित मतभेदों से जुड़ा है। हाल ही में सामने आई एक मीडिया रिपोर्ट में यह बड़ा दावा किया गया था कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में आयोग के 2 अन्य चुनाव आयुक्तों ने पिछले करीब 10 महीनों के दौरान कई महत्वपूर्ण फैसलों पर अपनी आपत्ति दर्ज कराई थी। इस रिपोर्ट के अनुसार, दोनों आयुक्तों ने कम से कम 14 बार कुछ चुनिंदा फैसलों पर अपने सवाल उठाए थे।

इस पूरे विवाद के सामने आने के बाद कांग्रेस पार्टी और अन्य प्रमुख विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करने शुरू कर दिए हैं। विपक्षी दलों का आरोप है कि आयोग की पारदर्शिता पर अब संदेह पैदा होने लगा है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने तो मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग तक कर डाली है और चुनावों में धांधली होने के गंभीर आरोप लगाए हैं। विपक्ष का यह भी मानना है कि चुनाव आयोग जैसी स्वतंत्र संवैधानिक संस्था का इस तरह से विवादों में आना लोकतंत्र के लिए सही संकेत नहीं है।

दूसरी तरफ चुनाव आयोग ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। आयोग का यह स्पष्ट रूप से कहना है कि आयुक्तों के बीच अलग-अलग विचार होना एक सामान्य निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा होता है और आयोग के सभी महत्वपूर्ण फैसले हमेशा सर्वसम्मति से ही लिए जाते हैं। आयोग ने अपनी सफाई में यह भी कहा है कि उनकी प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी और नियमों के मुताबिक है जिस पर किसी भी प्रकार का संदेह नहीं किया जाना चाहिए।