दिल्ली एनसीआर के तर्ज पर अब लखनऊ में एससीआर बनाया जाएगा। इसके साथ ही प्रदेश में सात डेवलपमेंट होंगे। शहरी विकास के लिए केंद्र सरकार द्वारा गठित कमेटी ने राज्य सरकार से सिफारिश की है।
प्रदेश की राजधानी लखनऊ में शनिवार को दो दिवसीय रीजनल प्लानिंग कॉन्क्लेव का अंतिम था। शहरी विकास के लिए गठित केंद्र सरकार की कमेटी ने राज्य सरकार से एनसीआर की तर्ज पर लखनऊ में स्टेट कैपिटल रीजन बनाने की सिफारिश की है। जहां पर दिल्ली एनसीआर की तर्ज पर सभी सुविधाएं मिलेगी।
शहरी विकास कमेटी के अध्यक्ष केशव ने राज्य सरकार से यूपी में सात डेवलपमेंट रीजन बनाने की भी सिफारिश की है। इसमें रीजनल प्लानिंग के तहत रिवर फ्रंट डेवलपमेंट और ग्लोबल गेटवे सिस्टम के विकास पर फोकस होगा। रिवर डेवलपमेंट से आवास और रोजगार की समस्याएं हल होगीं। हालांकि, केशव ने यह भी कहा है कि डेवलपमेंट रीजन सात की जगह छह भी हो सकते हैं।
एससीआर का मुखिया होंगे मुख्य सचिव
इसमें लखनऊ, कानपुर नगर, कानपुर देहात, उन्नाव, रायबरेली, बाराबंकी, सीतापुर और हरदोई जिलों को शामिल करने का प्रस्ताव है। इसके अतिरिक्त छह अन्य डेवलपमेंट रीजन मेरठ, आगरा, वाराणसी, गोरखपुर, बरेली एवं झांसी में बनाने की सिफारिश की गई है। एससीआर का मुखिया मुख्य सचिव हो सकते हैं। लेकिन अन्य रीजन की जिम्मेदारी मंडलायुक्त को सौंपी जा सकती है।
रीजनल प्लानिंग से शहर से लेकर गांव तक होगा विकास
केशव ने कहा कि रीजनल प्लानिंग से शहर से लेकर गांव तक के विकास का रास्ता खुल जाएगा। इससे वन ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी की लक्ष्य पूरा होने के साथ ही लोगों को आसानी से आवास और रोजगार मिल सकेंगे। उन्होंने आगे कहा कि यूपी में रीजनल प्लानिंग का यह सही समय है। वैश्विक निवेशक सम्मेलन से निवेश आने का सिलसिला शुरू हुआ है। उद्यमी रियल इस्टेट से लेकर उद्योग में निवेश करने के इच्छुक हैं। प्राधिकरण निवेशकों को जमीन और सुविधाएं मुहैया कराए तो प्रदेश की तस्वीर बदल जाएगी।
केशव ने कहा कि प्रदेश भर में मेट्रो का संचालन संभव नहीं है। इसमें जितनी पूंजी का निवेश होता है, उतनी आय नहीं हो रही। ऐसे में राज्य सरकार को छोटे शहरों में सुगम आवागमन के लिए ट्रामा सिस्टम को विकसित करना चाहिए। इससे कम पूंजी से लोगों को सस्ता सफर हासिल हो सकेगा।