Neha Singh Rathore Police Statement: देशद्रोह के मामले में नेहा सिंह राठौर द्वारा रात में हजरतगंज थाने पहुंचकर बयान दर्ज कराने के बाद वादी कवि अभय सिंह निर्भीक का तीखा बयान सामने आया है। उन्होंने गिरफ्तारी की मांग करते हुए कहा कि हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से राहत न मिलने के बाद सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
Sedition Case Neha Singh Rathore: लोक गायिका और कवयित्री नेहा सिंह राठौर के खिलाफ दर्ज देशद्रोह के मुकदमे ने एक बार फिर राजनीतिक, साहित्यिक और सामाजिक बहस को तेज कर दिया है। शनिवार देर रात नेहा सिंह राठौर द्वारा हजरतगंज थाने पहुंचकर बयान दर्ज कराने के बाद इस मामले के वादी, कवि अभय सिंह ‘निर्भीक’ ने कड़ा बयान जारी किया है। उन्होंने नेहा सिंह राठौर की गिरफ्तारी की मांग करते हुए कहा है कि जिस व्यक्ति को माननीय हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से राहत न मिली हो, उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। यह पूरा मामला अब केवल कानूनी दायरे तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, देश प्रेम, राष्ट्रवाद और सोशल मीडिया की सीमाओं पर एक बड़े विमर्श का रूप ले चुका है।
कवि अभय सिंह निर्भीक ने बताया कि उन्होंने 27 अप्रैल 2025 को लखनऊ के थाना हजरतगंज में तथाकथित लोक गायिका नेहा सिंह राठौर के खिलाफ देशद्रोह का मुकदमा दर्ज कराया था। उनका आरोप है कि पहलगाम आतंकी हमले के दौरान नेहा सिंह राठौर द्वारा सोशल मीडिया पर की गई टिप्पणियां न केवल आपत्तिजनक थीं, बल्कि देश की एकता, अखंडता और राष्ट्रीय भावनाओं को आहत करने वाली थीं। अभय सिंह निर्भीक का कहना है कि यह मामला केवल व्यक्तिगत टिप्पणी का नहीं, बल्कि राष्ट्र विरोधी मानसिकता का प्रतीक है, जिसे कानून के तहत कठोरता से निपटाया जाना चाहिए।
वादी पक्ष का दावा है कि नेहा सिंह राठौर ने इस मुकदमे में पहले उच्च न्यायालय और फिर सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया, लेकिन दोनों ही अदालतों से उन्हें कोई राहत नहीं मिली। अभय सिंह निर्भीक के अनुसार, जिस व्यक्ति को माननीय हाईकोर्ट और माननीय सुप्रीम कोर्ट ने फटकार लगाई हो, उस दोषी की गिरफ्तारी होना स्वाभाविक है।” हालांकि, इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक आदेश सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है, लेकिन वादी पक्ष इस बात को लगातार दोहरा रहा है कि न्यायालयों ने मामले को गंभीर मानते हुए राहत देने से इनकार किया है।
शनिवार देर रात नेहा सिंह राठौर अपने पति के साथ हजरतगंज थाने पहुंचीं और देशद्रोह के मामले में अपना बयान दर्ज कराया। पुलिस सूत्रों के अनुसार, यह प्रक्रिया नोटिस के तहत की गई थी। देर रात होने के कारण विस्तृत पूछताछ नहीं हो सकी और बयान दर्ज करने के बाद उन्हें वापस भेज दिया गया। पुलिस की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया कि फिलहाल उन्हें गिरफ्तार नहीं किया गया है और जांच जारी है। आगे की पूछताछ के लिए उन्हें फिर से बुलाया जा सकता है।
इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कवि अभय सिंह निर्भीक ने कहा कि वह इस समय कवि सम्मेलन के सिलसिले में जबलपुर में हैं, लेकिन पूरे मामले पर उनकी नजर बनी हुई है। उन्होंने कहा, कि देशद्रोह के इस मुकदमे में जिस तरह से कानूनी लड़ाई आगे बढ़ी है, उससे यह स्पष्ट है कि यह मामला साधारण नहीं है। मेरा मानना है कि ऐसे मामलों में कानून को अपना काम करना चाहिए और दोषी की गिरफ्तारी होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि इस लड़ाई को यहां तक पहुंचाने में जिन लोगों ने उनका साथ दिया, वे सभी उनके शुभचिंतक हैं और वह उन सभी का आभार व्यक्त करते हैं।
अपने बयान के साथ-साथ अभय सिंह निर्भीक ने एक कविता के माध्यम से भी अपनी भावनाएं व्यक्त कीं। उन्होंने कहा:
“कुछ देशप्रेम के मंत्र वहां जाकर हमने बाँचे तो हैं।
इस देशद्रोह के विषधर के फन पर चढ़कर नाचे तो हैं।
इस देशद्रोह के अंधड़ को आगे बढ़ ललकारा तो है।
धीमा ही सही तमाचा पर हमने जाकर मारा तो है।”
इस कविता के जरिए उन्होंने यह संदेश देने की कोशिश की कि वह इस लड़ाई को देशप्रेम से जोड़कर देख रहे हैं और इसे वैचारिक संघर्ष मानते हैं।
यह मामला एक बार फिर उस बहस को सामने ले आया है, जिसमें यह सवाल उठता है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की सीमा कहां तक है और कब कोई टिप्पणी देशद्रोह की श्रेणी में आ जाती है। नेहा सिंह राठौर के समर्थकों का कहना है कि वह एक कलाकार हैं और उन्होंने सामाजिक-राजनीतिक घटनाओं पर अपनी राय रखी है, जिसे देशद्रोह नहीं कहा जा सकता। उनका तर्क है कि सरकार या व्यवस्था की आलोचना करना लोकतंत्र का हिस्सा है। वहीं, वादी पक्ष और उनके समर्थक मानते हैं कि आतंकी हमले जैसे संवेदनशील विषयों पर की गई टिप्पणियां यदि राष्ट्र की भावना को कमजोर करती हैं, तो उन्हें केवल राय कहकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।