उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची (Voter लिस्ट) के विशेष सघन पुनरीक्षण (SIR- Special Intensive Revision) के बाद जो अंतिम मतदाता सूची आएगी क्या वह भाजपा के लिए परेशानी बढ़ाने वाली होगी?
उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची (Voter लिस्ट) के विशेष सघन पुनरीक्षण (SIR- Special Intensive Revision) के बाद ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी किए जाने की तैयारी पूरी हो गई है। पहले इसे 31 दिसंबर को ही जारी करना था, लेकिन अब 6 जनवरी को को किया जाएगा। अंतिम सूची 6 मार्च को आएगी।
ताजा आंकड़ों से संकेत मिल रहे हैं कि अंतिम सूची में 12.55 करोड़ नाम हो सकते हैं। यह आंकड़ा भाजपा को परेशान कर रहा है। उसे शक है कि उसके कम से कम ढाई-तीन करोड़ वोटर्स लिस्ट से बाहर रह सकते हैं। इस चुनौती से निपटने के लिए पार्टी ने रणनीति बनाना भी शुरू कर दिया है।
31 दिसंबर तक के आंकड़ों से जो शुरुआती संकेत मिल रहे हैं, उसके बाद राजनीतिक गलियारों में यह सवाल चर्चा में आ रहा है कि क्या उत्तर प्रदेश में SIR की वजह से भाजपा की परेशानी बढ़ेगी? यह सवाल उठने का कारण बताया जा रहा है कि मतदाता सूची के मसौदे में करीब 2.89 करोड़ मतदाताओं के नाम नहीं रहेंगे। यानि कुल मतदाताओं में से 18.7 प्रतिशत बाहर हो जाएंगे! यह बड़ी संख्या है।
नीचे ग्राफिक में आप देख सकते हैं कि ड्राफ्ट सूची में कहां से कितने मतदाताओं के नाम कट सकते हैं। यह 31 दिसंबर को जारी होने वाले ड्राफ्ट लिस्ट के आधार पर है। अब ड्राफ्ट लिस्ट 6 जनवरी को जारी होगी। उसमें आंकड़े अलग भी हो सकते हैं।
ड्राफ्ट लिस्ट में जिनके नाम नहीं होंगे, उनके पास अपना नाम जुड़वाने का मौका तो रहेगा, लेकिन ड्राफ्ट लिस्ट से इस बात का एक मोटा अनुमान तो लगाया ही जा सकता है कि अंतिम लिस्ट में मतदाताओं की संख्या कितनी रह जाएगी?।
ताजा आंकड़ों के आधार पर यह कहा जा सकता है कि जिन शहरी क्षेत्रों में भाजपा मजबूत हैं वहां की मतदाता सूची से अपेक्षाकृत ज्यादा मतदाता बाहर हो सकते हैं। लखनऊ से करीब 30 फीसदी मतदाताओं (करीब 12 लाख) के वोटर लिस्ट से बाहर होने का खतरा है। गाजियाबाद, कानपुर नगर, मेरठ, प्रयागराज, गौतम बुद्ध नगर और आगरा से सबसे ज्यादा मतदाता बाहर हो सकते हैं। ये सब भाजपा के मजबूत क्षेत्र माने जाते हैं। देखिए ये चार्ट:
| शहर | कुल शहरी सीटें | भाजपा के विधायक |
| लखनऊ | 9 | 7 |
| कानपुर | 10 | 7 |
| वाराणसी | 8 | 7 |
| आगरा | 9 | 9 |
2024 के लोकसभा चुनाव में भी शहरी क्षेत्रों में बीजेपी/एनडीए का दबदबा रहा।
| क्षेत्र | बीजेपी (NDA) वोट शेयर | सपा-कांग्रेस (INDIA) वोट शेयर | सीटों का परिणाम (कुल 80) |
| शहरी (Urban) | 41% (बढ़त) | 30% | बीजेपी ने 17 प्रमुख शहरी सीटों में से 12 पर जीत दर्ज की। |
| ग्रामीण (Rural) | 35% (गिरावट) | 44% (भारी बढ़त) | इंडिया गठबंधन ने ग्रामीण बहुल इलाकों में बीजेपी को कड़ी शिकस्त दी। |
मुस्लिम बहुल जिलों में अपेक्षाकृत कम मतदाताओं के सूची से बाहर होने के संकेत हैं। इन जिलों में मुरादाबाद, रामपुर, बिजनौर, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर शामिल हैं। कहां से कितने मतदाता हट सकते हैं, इस चार्ट में देखिए:
| जिला | प्रतिशत | मतदाताओं की संख्या (लाख में) |
| रामपुर | 18.29 | 3.21 |
| सहारनपुर | 16.37 | 4.32 |
| मुजफ्फरनगर | 16.29 | 3.44 |
| मुरादाबाद | 15.76 | 3.87 |
| बिजनौर | 15.53 | 4.27 |
2011 की जनगणना के मुताबिक यहां मुस्लिम आबादी 40 फीसदी से ज्यादा है। इन इलाकों में भी भाजपा ने अपने और अपने साथियों के दम पर अपनी स्थिति ठीक की है। देखिए, यह चार्ट:
| जिला | लोकसभा क्षेत्र (MP) | पार्टी | विधानसभा क्षेत्र (MLA) | पार्टी |
| रामपुर | मोहिबुल्लाह नदवी | सपा | रामपुर सदर: आकाश सक्सेना | BJP |
| स्वार: शफीक अहमद अंसारी | Apna Dal (S) | |||
| चमरौआ: नसीर अहमद खान | सपा | |||
| बिलासपुर: बलदेव सिंह औलख | BJP | |||
| मिलक (SC): राजबाला | BJP | |||
| सहारनपुर | इमरान मसूद | कांग्रेस | सहारनपुर नगर: राजीव गुंबर | BJP |
| सहारनपुर: आशु मलिक | सपा | |||
| देवबंद: बृजेश सिंह रावत | BJP | |||
| गंगोह: कीरत सिंह गुर्जर | BJP | |||
| नकुड़: मुकेश चौधरी | BJP | |||
| बेहट: उमर अली खान | सपा | |||
| रामपुर मनिहारन (SC): देवेंद्र निम | BJP | |||
| मुजफ्फरनगर | हरेंद्र सिंह मलिक | सपा | मुजफ्फरनगर सदर: कपिल देव अग्रवाल | BJP |
| बुढ़ाना: राजपाल बालियान | RLD | |||
| चरथावल: पंकज कुमार मलिक | सपा | |||
| खतौली: मदन भैया | RLD | |||
| पुरकाजी (SC): अनिल कुमार | RLD | |||
| मुरादाबाद | रुचि वीरा | सपा | मुरादाबाद नगर: रितेश गुप्ता | BJP |
| मुरादाबाद ग्रामीण: नासिर कुरैशी | सपा | |||
| कुंदरकी: रामवीर सिंह* (उपचुनाव विजेता) | BJP | |||
| ठाकुरद्वारा: नवाब जान | सपा | |||
| बिलारी: मोहम्मद फहीम इरफान | सपा | |||
| कांठ: कमाल अख्तर | सपा | |||
| बिजनौर | चंदन चौहान | RLD | बिजनौर सदर: शुचि चौधरी | BJP |
| नजीबाबाद: तस्लीम अहमद | सपा | |||
| नगीना (SC): मनोज कुमार पारस | सपा | |||
| धामपुर: अशोक कुमार राणा | BJP | |||
| बढ़ापुर: सुशांत सिंह | BJP | |||
| चांदपुर: स्वामी ओमवेश | सपा | |||
| नहटौर (SC): ओम कुमार | BJP |
बता दें कि 2024 के लोकसभा चुनाव के समय से RLD (राष्ट्रीय लोक दल) भाजपा के नेतृत्व वाले NDA गठबंधन में है। सपा और कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव मिल कर लड़ा था। आने वाले विधानसभा चुनाव में ये साथ रहेंगी या अलग लड़ेंगी, यह अभी तय नहीं है।
यह भी भाजपा की परेशानी बढ़ाने वाला आंकड़ा हो सकता है। ‘द प्रिंट’ ने अपने विश्लेषण के आधार पर बताया है कि ग्रामीण की तुलना में शहरी क्षेत्रों के मतदाता ज्यादा संख्या में बाहर होंगे।
शहरी क्षेत्रों में भाजपा के वोटर्स ज्यादा हैं, ऐसा माना जाता है। 2022 के विधानसभा चुनाव में शहरी क्षेत्रों में भाजपा का स्ट्राइक रेट 75 प्रतिशत से ज्यादा रहा था, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह 60 फीसदी के करीब था।
यही नहीं, 2023 के नगर निकाय चुनावों में भी भाजपा ने सभी 17 नगर निगम में परचम लहराया था। शहरी क्षेत्रों में भाजपा के दबदबे का प्रमाण इन आंकड़ों में देखा जा सकता है
| क्षेत्र | कुल सीटें (लगभग) | बीजेपी की जीत (MLAs) | स्ट्राइक रेट / प्रदर्शन |
| शहरी (Urban) | 86 | 65 | 75% से अधिक |
| ग्रामीण/अर्ध-ग्रामीण (Rural) | 317 | 190 | 60%के करीब |
| कुल (Total) | 403 | 255 | कुल बहुमत |
वैसे अंतिम मतदाता सूची 6 मार्च को आएगी, लेकिन ड्राफ्ट लिस्ट में 12.55 करोड़ मतदाताओं के नाम रहने की उम्मीद है। मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ ने अपना आकलन लगाया है कि 25 करोड़ की आबादी वाले उत्तर प्रदेश में करीब 16 करोड़ मतदाता तो होने चाहिए। इस हिसाब से करीब साढ़े तीन करोड़ मतदाता छूट रहे हैं। सीएम योगी का यह भी अनुमान है कि जो साढ़े तीन-चार करोड़ मतदाता छूट रहे हैं, उनमें से 85-90 प्रतिशत भाजपा के वोटर्स होंगे। मतलब तीन-साढ़े तीन करोड़ वोटर्स।
भाजपा के लिए केवल संख्या में कमी ही परेशानी का कारण नहीं है, उसके मजबूत माने जाने वाले क्षेत्र में कमजोर क्षेत्रों की तुलना में ज्यादा नाम बाहर होना भी चिंता का कारण है।
इन परिस्थितियों के मद्देनजर भाजपा का ज़ोर अब नए वोटर्स का रजिस्ट्रेशन बढ़ाने पर है। पार्टी ने कार्यकर्ताओं को सक्रिय कर दिया है, ताकि नए मतदाताओं को मतदाता सूची में शामिल करवाया जा सके और कोई वैध मतदाता सूची से बाहर न रह जाए। पार्टी के लिए राहत की बात यह है कि बिहार की तरह उत्तर प्रदेश में चुनाव से ऐन पहले SIR नहीं हो रहा है। राज्य में अभी चुनाव में देर है।