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लखनऊ. लोकसभा चुनावों में बसपा प्रमुख मायावती को जबरर्दस्त फायदा मिलता दिख रहा है। समाजवादी पार्टी से गठबंधन करके बसपा अपना खोया जनाधार पाने की जद्दोजहद कर रही है। अब तक के रुझानों के मुताबिक बसपा कम से कम 12 सीटों पर आगे चल रही है। पिछले चुनाव में बसपा को एक सीट भी नहीं मिली थी। जबकि, समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार कुल सात सीटों पर आगे हैं। गठबंधन में शामिल रालोद के खाते में भी एक सीट आती दिख रही है। लेकिन सबसे खराब हालत कांग्रेस की है। राहुल गांधी अमेठी में स्मृति ईरानी से पीछे चल रहे हैं। यदि वह हारते हैं तो कांग्रेस के लिए उप्र में यह सबसे शर्मनाक स्थिति होगी।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि बसपा का वोट बैंक अब भी पूरी तरह से मायावती के साथ दिख रहा है। मुसलमानों ने भी बसपा का साथ दिया है। लेकिन समाजवादी पार्टी के वोट पूरी तरह से बसपा को शिफ्ट नहीं हो पाए। यही वजह है कि सपा को मोदी लहर के मुकाबले इस बार ज्यादा नुकसान उठाना पड़ रहा है। 2014 के चुनाव में सपा ने पांच सीट जीती थी। इस बार वह सिर्फ सात सीटें जीतते हुए दिख रही है। बदायूं में पार्टी के प्रत्याशी धर्मेंद्र यादव पीछे चल रहे हैं। इस तरह अखिलेश यादव अपने परिवार की सीट बचाने में भी कामयाब नहीं दिख रहे हैं। इस तरह सपा-बसपा गठबंधन कुल 19 सीटों पर सिमटता हुआ दिखाई दे रहा है।