
Awadhesh Prasad Pays Tribute to Ram Govind Chaudhary: समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता राम गोविंद चौधरी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद ने उन्हें अपना पुराना और दीर्घकालिक साथी बताया। उन्होंने कहा कि चौधरी ने सत्ता और विपक्ष दोनों में रहते हुए अन्याय के खिलाफ संघर्ष किया और पार्टी को मजबूत करने में योगदान दिया। आज पार्टी के नेता भारी मन से उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए यहां पहुंचे हैं।
सपा के वरिष्ठ नेता राम गोविंद चौधरी के निधन पर सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने कहा, "राम गोविंद चौधरी जी हमारे पुराने साथी थे। उन्होंने 1977 में पहली बार विधानसभा चुनाव जीता था। हम साथ-साथ मंत्री बने। उन्होंने हमेशा पीड़ित जनता के लिए अन्याय और उत्पीड़न के खिलाफ लड़ाई लड़ी और देश के सभी बड़े नेताओं का आशीर्वाद उन्हें प्राप्त था… उन्होंने सरकार में रहते हुए या विपक्ष में, हमेशा अन्याय और उत्पीड़न के खिलाफ संघर्ष किया। जब भी कोई अन्याय हुआ, उन्होंने सक्रिय रूप से उसमें भाग लिया और हमेशा पार्टी को मजबूत करने के लिए काम किया। उनका निधन पार्टी के लिए एक अपार क्षति है और आज हम सब भारी मन से उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए यहां आए हैं।"
समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता नेता राम गोविंद चौधरी का शुक्रवार को 73 साल की उम्र में निधन हो गया। वह लंबे समय से हृदय और किडनी की बीमारी से परेशान थे। लखनऊ के संजय गांधी पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (SGPGI) में उनका इलाज चल रहा था। रात करीब 9 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। सपा के मीडिया प्रभारी सुशील पांडे के मुताबिक, चौधरी को करीब दो सप्ताह पहले SGPGI में भर्ती कराया गया था। इससे पहले लखनऊ के मेदांता अस्पताल में उनकी हार्ट सर्जरी हुई थी। मैक्स अस्पताल में भी उनका लंबे समय तक इलाज चला था और डायलिसिस भी किया गया था।
राम गोविंद चौधरी 8 बार विधायक रहे थे। उन्होंने उत्तर प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी भी संभाली थी। उनके निधन पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना समेत कई नेताओं ने शोक जताया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उन्हें पूर्व नेता प्रतिपक्ष और पूर्व मंत्री बताते हुए निधन को बेहद दुखद बताया।
आपातकाल के दौरान राम गोविंद चौधरी लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए चलाए गए आंदोलन में शामिल रहे। इसी दौरान वह जिले की 'छात्र युवा वाहिनी' के सह-संयोजक बने। आंदोलन के चलते उन्हें जेल भी जाना पड़ा। उन्हें बलिया और बाराबंकी की जेलों में रखा गया था। राम गोविंद चौधरी ने जयप्रकाश नारायण के साथ भी काम किया था।