
SP Spokesperson Amik Jamei Attacks BJP:समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता अमीक जामेई ने गुरुवार को मायावती, सपा-कांग्रेस गठबंधन, सहारनपुर मस्जिद विवाद, आजम खान के खिलाफ नई एफआईआर, गोंडा की घटना और ब्रिक्स सम्मेलन समेत कई मुद्दों पर भाजपा सरकार को घेरा। उन्होंने 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को सामाजिक न्याय और पीडीए की राजनीति से जोड़ते हुए भाजपा को सत्ता से हटाने का दावा किया।
मायावती को लेकर जामेई ने कहा कि सपा और अखिलेश यादव उनका बेहद सम्मान करते हैं। उत्तर प्रदेश के सामाजिक न्याय के इतिहास में लाल और नीले रंग के राजनीतिक मेल का महत्वपूर्ण स्थान रहा है। इसी सहयोग से कांशीराम संसद पहुंचे और मायावती मुख्यमंत्री बनीं। उन्होंने 2027 में सामाजिक न्याय, बंधुत्व और एकता के लिए सपा व बसपा समर्थकों से साथ आने की अपील की। छात्र-युवा भी अब सामाजिक न्याय की राजनीति से जुड़ रहे हैं।
सहारनपुर मस्जिद विवाद पर जामेई ने प्रशासन की जल्दबाजी वाली कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इसका इस्तेमाल हिंदू-मुस्लिम ध्रुवीकरण के लिए किया जा रहा है। सपा हिंदू समाज को मुस्लिम विरोधी नहीं मानती। हिंदू समाज में दया और करुणा है, कार्रवाई की जिम्मेदारी कार्यपालिका की है।
ब्रिक्स को लेकर जामेई ने चीन के बढ़ते प्रभाव का जिक्र किया। उन्होंने भारत सरकार से मंच पर राष्ट्रीय हित के मुद्दे उठाने की मांग की। मुलायम सिंह यादव के आकलन का हवाला देते हुए उन्होंने चीन को बड़ी चुनौती बताया। सीमा विवाद और पाकिस्तान से जुड़े आतंकवाद पर ब्रिक्स से स्पष्ट निंदा की अपील की। पश्चिम एशिया की कूटनीति और गुटनिरपेक्ष नीति पर भी ध्यान देने की बात कही।
आजम खान के खिलाफ हज समिति जमीन मामले में नई एफआईआर पर जामेई ने कहा कि लगातार मामलों से किसी नेता को निशाना बनाना उचित नहीं। कानूनी प्रक्रिया होनी चाहिए। गोंडा साहनी परिवार की घटना पर उन्होंने यूपी पुलिस पर भेदभाव और मनमानी के आरोप लगाए। निषाद, राजभर सहित पिछड़े वर्गों के मुद्दों पर संजय निषाद और ओमप्रकाश राजभर से सरकार के सामने आवाज उठाने की अपील की।
जामेई ने आरोप लगाया कि राज्य में पीडीए वर्गों पर हमला हो रहा है। सपा इसके खिलाफ राजनीतिक लड़ाई लड़ेगी। लखनऊ में भाजपा बूथ अध्यक्ष अरविंद रावत के पुलिस पर मारपीट के आरोपों का जिक्र करते हुए उन्होंने भाजपा-आरएसएस के एससी-ओबीसी नेताओं से संगठन के अंदर सवाल उठाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि सिर्फ मुख्यमंत्री पर भरोसा करने से सामाजिक भेदभाव खत्म नहीं होगा।