लखनऊ

School Fees: “बचपन मत कुचलो!” फीस के खिलाफ लखनऊ में छात्रों का फूटा गुस्सा

School Fee Hike: लखनऊ में निजी स्कूलों की फीस के खिलाफ छात्र सड़कों पर उतरे, गांधी प्रतिमा पर जोरदार प्रदर्शन, महंगी फीस और किताबों के विरोध में सरकार से सख्त कानून की मांग उठी।

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Apr 10, 2026
फीस के खिलाफ सड़कों पर छात्र: लखनऊ में शिक्षा व्यवस्था पर उठे तीखे सवाल (फोटो सोर्स : भाषा WhatsApp News Group)

School Fees Issue: राजधानी लखनऊ में निजी स्कूलों की बढ़ती फीस और मनमानी के खिलाफ अब विरोध खुलकर सड़कों पर दिखाई देने लगा है। राष्ट्रीय छात्र पंचायत के बैनर तले गुरुवार को हजरतगंज स्थित गांधी प्रतिमा और जीपीओ पार्क पर छात्रों ने जोरदार प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में जुटे छात्रों ने शिक्षा व्यवस्था में व्याप्त खामियों और निजी स्कूलों की कथित लूट के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

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गांधी प्रतिमा पर गूंजे विरोध के स्वर

प्रदर्शन के दौरान “शिक्षा का व्यापार बंद करो”, “भविष्य बेचना बंद करो” और “फीस के बोझ से बचपन मत कुचलो” जैसे नारों से पूरा हजरतगंज गूंज उठा। छात्रों के हाथों में तख्तियां और बैनर थे, जिन पर शिक्षा व्यवस्था को लेकर तीखी टिप्पणियां लिखी गई थीं।

इस विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व राष्ट्रीय छात्र पंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवम पांडेय ने किया। उन्होंने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षा अब सेवा नहीं, बल्कि एक बड़ा व्यवसाय बन चुकी है, जिसका खामियाजा आम और मध्यमवर्गीय परिवारों को भुगतना पड़ रहा है।

निजी स्कूलों पर मनमानी के आरोप

छात्रों और अभिभावकों का आरोप है कि निजी स्कूल हर साल मनमाने तरीके से फीस बढ़ा देते हैं। इसके अलावा, किताबों, यूनिफॉर्म और अन्य आवश्यक चीजों के नाम पर भी भारी-भरकम रकम वसूली जाती है। प्रदर्शन में शामिल छात्रों ने कहा कि हर साल नई किताबें खरीदने की बाध्यता से अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है। कई बार स्कूल विशेष दुकानों से ही किताबें और यूनिफॉर्म खरीदने के लिए बाध्य करते हैं, जिससे एक तरह का “सिंडिकेट” बन जाता है।

किताबों और यूनिफॉर्म के खेल पर सवाल

छात्रों ने आरोप लगाया कि निजी स्कूलों में हर साल पाठ्यक्रम में मामूली बदलाव के नाम पर पूरी किताबें बदल दी जाती हैं। इससे पुराने छात्रों की किताबें किसी काम की नहीं रहतीं और अभिभावकों को नई किताबें खरीदनी पड़ती हैं। यही नहीं, यूनिफॉर्म में भी बार-बार बदलाव किया जाता है, जिससे अतिरिक्त खर्च बढ़ता है। छात्रों का कहना है कि यह सब एक सुनियोजित व्यवस्था के तहत किया जा रहा है, जिससे स्कूलों और उनसे जुड़े विक्रेताओं को फायदा हो।

फीस रेगुलेशन बिल लागू करने की मांग

प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने सरकार से फीस रेगुलेशन बिल को तुरंत लागू करने की मांग की। उनका कहना है कि जब तक फीस पर नियंत्रण के लिए सख्त कानून नहीं बनेगा, तब तक स्कूलों की मनमानी जारी रहेगी। शिवम पांडेय ने कहा कि सरकार को इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करना चाहिए और ऐसा कानून लाना चाहिए, जिससे फीस वृद्धि पर रोक लग सके और शिक्षा सभी के लिए सुलभ बन सके।

छिपे हुए शुल्कों पर भी उठे सवाल

छात्रों ने एनुअल चार्ज, डेवलपमेंट फीस, स्मार्ट क्लास फीस और अन्य कई छिपे हुए शुल्कों पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि ये शुल्क पारदर्शी नहीं होते और अभिभावकों से बिना स्पष्ट जानकारी के वसूले जाते हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि इन अतिरिक्त शुल्कों के कारण वास्तविक फीस कई गुना बढ़ जाती है, जिससे मध्यम वर्ग के परिवारों के लिए बच्चों की पढ़ाई कराना मुश्किल हो जाता है।

 प्रशासन की सख्ती, भारी पुलिस बल तैनात

प्रदर्शन को देखते हुए हजरतगंज क्षेत्र में भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित रखने के लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए थे। हालांकि, प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा और छात्रों ने अपनी मांगों को लोकतांत्रिक तरीके से रखा।

 छात्रों का बढ़ता जागरूकता स्तर

इस प्रदर्शन ने यह भी दिखाया कि अब छात्र केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं हैं, बल्कि अपने अधिकारों और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर भी जागरूक हो रहे हैं। वे खुलकर अपनी आवाज उठा रहे हैं और बदलाव की मांग कर रहे हैं।

शिक्षा व्यवस्था पर व्यापक असर

विशेषज्ञों का मानना है कि निजी स्कूलों की बढ़ती फीस और व्यावसायिक दृष्टिकोण ने शिक्षा के मूल उद्देश्य को प्रभावित किया है। शिक्षा, जो कभी समाज के विकास का माध्यम थी, अब कई जगहों पर मुनाफे का साधन बनती जा रही है। इसका सबसे ज्यादा असर उन परिवारों पर पड़ रहा है, जिनकी आय सीमित है। वे अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा दिलाने के लिए आर्थिक दबाव में आ जाते हैं।

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