
Uttar PradeshNews: चुनाव आयोग को लेकर बीजेपी सांसद सुधांशु त्रिवेदी के बयान पर कांग्रेस ने पलटवार किया है। कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने चुनाव आयोग के अधिकारियों पर बीजेपी के इशारे पर गड़बड़ी करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इस गड़बड़ी का सीधा फायदा बीजेपी को मिल रहा है। राजपूत ने राहुल गांधी की ओर से पहले उठाए गए सवालों का जिक्र करते हुए सुधांशु त्रिवेदी से हरियाणा में जुड़े 19 लाख मतदाताओं को लेकर जवाब मांगा। उन्होंने पूछा कि आखिर ये 19 लाख मतदाता कहां और क्यों जोड़े गए।
कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी धीरे-धीरे गद्दारों का समूह बनती जा रही है। इसके अपने पुराने कार्यकर्ता कालीन बिछा रहे हैं, जबकि हमारी पार्टी छोड़कर बीजेपी में शामिल होने वालों को मुख्यमंत्री, मंत्री या दूसरे बड़े पद दिए जा रहे हैं। यह बीजेपी के कार्यकर्ताओं के लिए भी बेहद चौंकाने वाला और दुखद है। उन्होंने कहा कि बीजेपी के कार्यकर्ताओं को समझना चाहिए कि पार्टी का शीर्ष नेतृत्व उनके साथ कितना अन्याय कर रहा है। जिन्होंने हमारे साथ विश्वासघात किया, उन्हें इनाम दिया जा रहा है और अपने ही कार्यकर्ताओं से कालीन बिछवाए जा रहे हैं।
समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता आशुतोष वर्मा ने कहा कि लोग अपने आकलन के आधार पर चुनाव का विश्लेषण कर सकते हैं कि किस पार्टी की पकड़ मजबूत है या कौन सा क्षेत्र ज्यादा मजबूत है। अगर आप पूरी घटना को देखें, तो हम वहां अपने विधायकों पर पुलिस हमले के विरोध में गए थे, और छात्र सभा के सिलसिले में राहुल लोधी पर हुए हमले के विरोध में भी गए थे। अखिलेश जी ने कहा था कि जब हम वहां पहुंचेंगे, तो उनकी स्थिति अपने आप मजबूत हो जाएगी।
बीजेपी प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने राहुल गांधी के चुनाव आयोग और बीजेपी की मिलीभगत से एंटी-इनकंबेंसी खत्म होने के दावे पर कांग्रेस के लंबे चुनावी रिकॉर्ड का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, बिहार, उत्तर प्रदेश और ओडिशा का उदाहरण दिया। त्रिवेदी ने कहा कि 1967 के बाद से कांग्रेस वहां सत्ता में नहीं लौटी है। उस समय राज्य में बीजेपी कोई बड़ी राजनीतिक ताकत भी नहीं थी। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में 1977, बिहार में 1990, उत्तर प्रदेश में 1989 और ओडिशा में 1999 के बाद कांग्रेस की सरकार नहीं बनी।
चुनाव आयोग को लेकर समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता आशुतोष वर्मा ने कहा कि मेरा मानना है कि चुनाव आयोग के भीतर बढ़ते मतभेदों को पूरा देश देख रहा है। तीन चुनाव आयुक्तों में से दो एक के खिलाफ हैं। इस पर राजनीतिक दलों और पूरे देश में आक्रोश है। इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए एक बड़ा फैसला लिया गया है कि ज्ञानेश कुमार अब उत्तर प्रदेश नहीं जाएंगे। भारतीय जनता पार्टी उत्तर प्रदेश में और जोखिम नहीं उठा सकती। वे जानते हैं कि जब नाव डूब रही हो, तो उसे और डुबाने के लिए किसी और को नहीं लाया जा सकता।