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सपा-कांग्रेस के बीच 403 सीटों पर मंथन, जानिए 2027 के लिए क्या है सीट बंटवारे का प्लान

Samajwadi Party: उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले सपा-कांग्रेस गठबंधन को लेकर हलचल तेज है। अक्टूबर के दूसरे सप्ताह में अखिलेश यादव और मल्लिकार्जुन खरगे की दिल्ली में बैठक संभव है। सीट बंटवारे पर दोनों दल 403 सीटों पर मंथन करेंगे।
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लखनऊ

•

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Ankit Sai

•

Sep 25, 2026

Samajwadi Party

अखिलेश यादव और मल्लिकार्जुन खरगे

Uttar Pradesh Assembly Election:उत्तर प्रदेश में साल 2027 विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच सीट बंटवारे को लेकर हलचल तेज हो गई है। दोनों दलों के बीच सीटों को लेकर शुरुआती दावे सामने आने के बाद अब शीर्ष नेतृत्व की बैठक की तैयारी है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और सपा प्रमुख अखिलेश यादव के बीच अक्टूबर के दूसरे सप्ताह में दिल्ली में मुलाकात होने की संभावना है। इससे पहले दोनों दलों की समितियां 403 विधानसभा सीटों पर चर्चा करेंगी। बातचीत में 2024 के लोकसभा चुनाव के प्रदर्शन और 2022 के विधानसभा चुनाव के आंकड़ों को भी आधार बनाया जाएगा।

कांग्रेस 125 से 135 सीटों पर दावा करेगी

सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस साल 2027 के चुनाव में 125 से 135 सीटों की मांग कर सकती है। पार्टी की नजर अमेठी और रायबरेली की सभी 10 विधानसभा सीटों पर भी है। इनमें अमेठी की तिलोई, सलोन, जगदीशपुर, गौरीगंज और अमेठी सीटें हैं। वहीं रायबरेली की बछरावां, हरचंदपुर, रायबरेली, सरेनी और उन्चाहार सीटें शामिल हैं।

दूसरी तरफ सपा सूत्रों के मुताबिक पार्टी अपने सहयोगी को करीब 65 सीटें देने की योजना बना रही है। बाकी सीटें सपा और उसके अन्य सहयोगियों के लिए रखी जाएंगी। हालांकि अलग-अलग रिपोर्टों में दोनों दलों की सीटों को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं, इसलिए अंतिम फॉर्मूला बातचीत के बाद ही तय होगा।

पहले समितियां करेंगी सीटों पर चर्चा

प्रस्तावित दिल्ली बैठक से पहले दोनों दलों की ओर से गठित समितियां सीटों के बंटवारे को लेकर चर्चा करेंगी। इसके बाद कांग्रेस और सपा के शीर्ष नेताओं के बीच बातचीत होने की संभावना है। एक वरिष्ठ कांग्रेस नेता के मुताबिक, अक्टूबर के दूसरे सप्ताह तक दोनों दलों का नेतृत्व दिल्ली में गठबंधन को लेकर चर्चा कर सकता है। पहले दोनों पक्षों की समितियों की बैठक होगी। इसके बाद शीर्ष नेतृत्व की बैठक प्रस्तावित है, जिसमें अखिलेश यादव और मल्लिकार्जुन खरगे समेत अन्य नेता शामिल हो सकते हैं। बातचीत अंतिम चरण में पहुंचने पर लोकसभा में विपक्ष के नेता और रायबरेली से कांग्रेस सांसद राहुल गांधी भी इसमें शामिल हो सकते हैं।

संगठन तैयार करने के बाद सीटों की बात

कांग्रेस की ओर से संकेत दिया गया है कि राज्य संगठन के साथ जिला और शहर अध्यक्षों की घोषणा पूरी होने के बाद ही दिल्ली में सीटों को लेकर बातचीत शुरू होगी। पार्टी का मानना है कि संगठन को मजबूत करने के बाद गठबंधन में सीटों पर अपना दावा मजबूती से रखा जा सकेगा। उत्तर प्रदेश कांग्रेस के एआईसीसी प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने कहा कि इसी महीने संगठन सृजन का काम पूरा किया जा रहा है।

इसके बाद सीटों के बंटवारे पर चर्चा के लिए एक समिति गठित की जाएगी, जिसके लिए वह राहुल गांधी से अनुरोध करेंगे। वहीं, सपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता अब्बास हैदर ने कहा कि दोनों दलों के बीच बैठकें होने की संभावना है और बैठक का एजेंडा शीर्ष नेतृत्व तय करेगा।

403 सीटों पर सर्वे भी बनेगा आधार

कांग्रेस और सपा दोनों ही उत्तर प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों पर अपनी स्थिति का आकलन कर रहे हैं। सीटों के बंटवारे पर बातचीत के दौरान 2024 के लोकसभा चुनाव और 2022 के विधानसभा चुनाव के नतीजों के साथ मौजूदा संगठन की ताकत को भी आधार बनाया जाएगा। दोनों दल अपने-अपने सर्वे के आंकड़े भी सीटों पर दावे के समर्थन में रख सकते हैं। वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने बताया कि दोनों पक्षों की पांच-पांच सदस्यीय समितियां बनाई जाएंगी। ये समितियां हर विधानसभा सीट पर चर्चा करेंगी और पिछले चुनावों से मिले अनुभव को सीटों के फैसले में अहम आधार माना जाएगा।

2024 में गठबंधन को मिला था फायदा

2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश की 80 में से 17 सीटों पर चुनाव लड़ा और सपा के साथ गठबंधन में छह सीटें जीतीं। सपा ने 37 सीटें जीतीं। दोनों दलों ने मिलकर 43 सीटें हासिल कीं, जबकि भाजपा 33 सीटों पर रही। इसके मुकाबले साल 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 255 सीटें जीती थीं और सपा को 111 सीटें मिली थीं, जो अब घटकर 101 रह गई हैं। कांग्रेस के पास दो सीटें हैं।

साल 2017 में कांग्रेस ने सपा के साथ गठबंधन में 114 सीटों पर चुनाव लड़ा था और सात सीटें जीती थीं। 2022 में पार्टी ने 399 सीटों पर चुनाव लड़ा और उसे सिर्फ दो सीटें मिलीं।

जून से चर्चा, अब अक्टूबर में बातचीत

दोनों दलों के बीच गठबंधन को लेकर जून से ही चर्चा चल रही थी, लेकिन सीटों को लेकर बड़े दावों के कारण औपचारिक बातचीत आगे नहीं बढ़ सकी। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कहा ने कि अगर गठबंधन होना है तो इसे अंतिम रूप देने का यही सही समय है। उन्होंने आगे कहा कि अगर कोई कांग्रेस के बिना चुनाव लड़ने की योजना बना रहा है, तो वास्तव में वह 2027 में भाजपा को हराने की योजना नहीं बना रहा है।