
Kukrail Night Safari Lucknow: सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (15 जुलाई) को उत्तर प्रदेश सरकार की लंबे समय से लंबित कुकरेल नाइट सफारी परियोजना को मंजूरी दे दी। इसके साथ ही लखनऊ के कुकरेल रिजर्व फॉरेस्ट में भारत के पहले नाइट सफारी के निर्माण का रास्ता साफ हो गया है। हालांकि, अदालत ने परियोजना को पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी कई सख्त शर्तों के पालन के साथ अनुमति दी है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली 3 सदस्यीय पीठ ने सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी (CEC), सेंट्रल जू अथॉरिटी (CZA) और पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) की सिफारिशों पर विचार करने के बाद परियोजना को मंजूरी दी। अदालत ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार ने CEC की सभी शर्तों का पालन करने पर सहमति जताई है। चूंकि CZA और पर्यावरण मंत्रालय पहले ही परियोजना को मंजूरी दे चुके हैं, इसलिए आवेदन स्वीकार किया जाता है।
सुनवाई के दौरान कुकरेल रिजर्व फॉरेस्ट पर संभावित प्रभाव को लेकर आपत्तियां भी उठाई गईं। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर पर्यावरणीय सुरक्षा उपाय सुनिश्चित किए गए हैं तो विकास परियोजनाओं को केवल आशंकाओं के आधार पर रोका नहीं जा सकता।
मुख्य न्यायाधीश ने टिप्पणी की कि, "क्या देश ठहरकर रह जाए? पुराने चिड़ियाघरों को भी आधुनिक बनाने की जरूरत है। इस तरह के मामलों को देखने के लिए विशेषज्ञ मौजूद हैं।"
सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देश दिया है कि वह CEC, CZA और पर्यावरण मंत्रालय द्वारा निर्धारित सभी शर्तों का पूरी तरह पालन करे। अदालत ने CEC के सदस्य सचिव को समय-समय पर परियोजना का निरीक्षण कर अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने का भी निर्देश दिया है। साथ ही स्पष्ट किया कि किसी भी शर्त के उल्लंघन को गंभीरता से लिया जाएगा।
यह परियोजना लखनऊ के बाहरी क्षेत्र में स्थित लगभग 5,000 हेक्टेयर के कुकरेल रिजर्व फॉरेस्ट में प्रस्तावित है। इसे भारत का पहला शहरी (अर्बन) नाइट सफारी बताया जा रहा है। इस परियोजना की अनुमानित लागत करीब 1,500 करोड़ रुपये है और इसे दो चरणों में विकसित किया जाएगा।
परियोजना के शुरुआती प्रस्ताव में ट्राम राइड, रात के समय जंगल भ्रमण, एडवेंचर गतिविधियां और ऑगमेंटेड रियलिटी थिएटर जैसी सुविधाएं शामिल थीं। हालांकि, पर्यावरण संबंधी आपत्तियों के बाद इन प्रस्तावित सुविधाओं में से कई को योजना से हटा दिया गया।
सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी ने परियोजना के पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने के लिए कई कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इनके तहत केवल उन्हीं पेड़ों की कटाई की अनुमति होगी, जो परियोजना के पुनः डिज़ाइन, रियलाइनमेंट या इंजीनियरिंग कार्यों के लिए अनिवार्य हों। इसके अलावा, प्रत्येक एक पेड़ की कटाई के बदले 10 नए पेड़ लगाने (1:10 प्रतिपूरक वृक्षारोपण) की शर्त भी लागू की गई है।
उत्तर प्रदेश सरकार को निर्माण कार्य शुरू करने से पहले सभी आवश्यक वैधानिक मंजूरियां भी प्राप्त करनी होंगी। यह प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के फरवरी 2024 के उस आदेश के अनुरूप होगी, जिसमें देश में किसी भी नए चिड़ियाघर या सफारी परियोजना के लिए न्यायिक मंजूरी अनिवार्य की गई थी।