उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर बीजेपी ने तैयारियां तेज कर दी हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की दिल्ली में वरिष्ठ नेताओं के साथ हुई बैठक के बाद यूपी कैबिनेट में बड़े फेरबदल की अटकलें लगाई जा रही हैं।
उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं और इसकी तैयारी अभी से शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की दिल्ली में वरिष्ठ बीजेपी नेताओं से हुई बैठक के कई मतलब निकाले जा रहे हैं। अनुमान है कि जल्द ही यूपी कैबिनेट में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। हालांकि, ये बात अलग है कि हाल ही में मंत्रिमंडल में शामिल किए गए छह नए शामिल मंत्रियों के साथ ही प्रमोट हुए दो मंत्रियों के विभागों का बंटवारा अब तक नहीं हो सका है।
योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को दिल्ली में पार्टी के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। इसके बाद वह के बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन से भी मिले। सीएम ने इसकी जानकारी सोशल मीडिया पर शेयर करते हुए लिखा है- मैंने नई दिल्ली में केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह से शिष्टाचार मुलाकात की। अपना कीमती समय देने के लिए धन्यवाद।
दिल्ली में लगातार हुई इन मुलाकातों से उत्तर प्रदेश की बीजेपी सरकार में बड़े फेरबदल की अटकलें तेज हो गई हैं। सूत्रों का कहना है कि योगी छह नए मंत्रियों को विभाग आवंटित करने से जुड़े मुद्दे पर चर्चा के लिए नहीं, बल्कि कई मौजूदा मंत्रियों के विभागों में बदलाव पर केन्द्रीय नेतृत्व से बातचीत के लिए दिल्ली गए थे। कैबिनेट विस्तार के बाद मुख्यमंत्री की यह पहली दिल्ली यात्रा थी।
पार्टी और सरकार के सूत्रों का कहना है कि नए मंत्रियों को विभागों के आवंटन में देरी किसी उलझन की वजह से नहीं है, बल्कि एक बड़ी संभावित सर्जरी के चलते ऐसा किया जा रहा है। सरकार के कई मौजूदा मंत्रियों के विभाग बदले जा सकते हैं। खासकर ऐसे मंत्रालयों पर फोकस रहेगा, जिनका जनता से सीधा जुड़ाव है।
यूपी कैबिनेट के हालिया विस्तार के बाद आदित्यनाथ सरकार में मंत्रियों की संख्या बढ़कर 60 हो गई है, जिसमें 23 कैबिनेट मंत्री, 16 राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और 21 राज्य मंत्री हैं। कैबिनेट का हिस्सा बने छह नए मंत्रियों में से दो – भूपेंद्र चौधरी और मनोज पांडे – कैबिनेट रैंक के हैं, जबकि चार राज्य मंत्री हैं – अजीत पाल, सोमेंद्र तोमर, कृष्णा पासवान और सुरेंद्र दिलेर। दो मंत्रियों को राज्य मंत्री (MoS) के पद से पदोन्नत कर राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) का दर्जा दिया गया।
सूत्रों के अनुसार, योगी आदित्यनाथ के दिल्ली दौरे में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए संगठनात्मक तालमेल और शासन से जुड़ी तैयारियों पर विस्तार से बात हुई। पार्टी नेतृत्व चाहता है कि उत्तर प्रदेश में सरकार और संगठन के बीच और भी बेहतर तालमेल हो। दरअसल, बीजेपी 2027 के विधानसभा चुनाव में कोई जोखिम नहीं लेना चाहती और इसलिए संगठनात्मक एवं शासन, दोनों ही स्तरों पर तैयारियां पहले ही शुरू हो चुकी हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए पार्टी में संगठनात्मक समीक्षा बैठकें भी की जा रही हैं।
सूत्रों ने यह भी बताया कि कुछ ऐसे मंत्रालय जिनका सीधा जुड़ाव जनता से है, उनके नेतृत्व में बदलाव किया जा सकता है। फिलहाल, मुख्यमंत्री आदित्यनाथ के पास 35 से भी ज़्यादा विभाग हैं, जिनमें गृह, कार्मिक, सतर्कता, आवास एवं शहरी नियोजन, राजस्व, सूचना, नागरिक उड्डयन और लोक निर्माण विभाग जैसे महत्वपूर्ण विभाग शामिल हैं। सूत्रों ने संकेत दिया है कि चुनाव से पहले प्रशासनिक बोझ कम करने और राजनीतिक प्रबंधन को मज़बूत करने की कवायद के तहत, मुख्यमंत्री के पास मौजूद कुछ विभागों को भी री-एलोकेट किया जा सकता है।