
UP Assembly Monsoon Session: उत्तर प्रदेशविधानसभा के मानसून सत्र का तीसरा दिन भी विपक्ष के हंगामे की वजह से बाधित रहा। मंगलवार को योगी सरकार की ओर से पेश किए गए 59,019 करोड़ रुपये के अनुपूरक बजट पर बुधवार को चर्चा होनी थी, लेकिन समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के विरोध-प्रदर्शन के कारण सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से नहीं चल सकी।
लगातार हंगामे के बाद विधानसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई। इसके बाद NDA के कई नेताओं ने विपक्ष के रवैये की आलोचना करते हुए इसे लोकतांत्रिक परंपराओं के विपरीत बताया।
मंत्री मनोज पांडे ने विपक्ष के व्यवहार पर नाराजगी जताते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के सदस्यों ने विधानसभा की गरिमा को ठेस पहुंचाई। उन्होंने कहा कि सदन में स्पीकर के निर्णयों का सम्मान होना चाहिए, लेकिन विपक्ष के रवैये से लोकतांत्रिक और संवैधानिक मूल्यों को नुकसान पहुंचा है।
कैबिनेट मंत्री संजय निषाद ने पूरे घटनाक्रम को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि विधानसभा में सभी मुद्दों पर तथ्यों के आधार पर चर्चा होनी चाहिए। उनके अनुसार, सदन ही वह मंच है जहां सरकार और विपक्ष अपनी-अपनी बात रख सकते हैं और जनता से जुड़े विषयों पर सार्थक बहस संभव होती है।
कैबिनेट मंत्री दानिश आजाद अंसारी ने कहा कि विधानसभा का उद्देश्य प्रदेश के विकास से जुड़े फैसलों पर चर्चा करना है, लेकिन विपक्ष लगातार व्यवधान उत्पन्न कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष के कारण महत्वपूर्ण सरकारी कार्य प्रभावित हो रहे हैं और विकास से जुड़े मुद्दों पर बहस नहीं हो पा रही है।
मंत्री सुनील शर्मा ने कहा कि सरकार अनुपूरक बजट समेत सभी विषयों पर चर्चा के लिए तैयार थी। उन्होंने कहा कि सरकार चाहती थी कि विपक्ष अपने सवाल रखे और सदन में स्वस्थ बहस हो, लेकिन विपक्ष की रणनीति ही कार्यवाही बाधित करने की रही।
भाजपा विधायक अभय सिंह ने कहा कि विधानसभा प्रदेश का सर्वोच्च लोकतांत्रिक मंच है, जहां जनता के हित से जुड़े विषयों पर चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि हजारों करोड़ रुपये के अनुपूरक बजट पर स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क, बिजली, पानी और रोजगार जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा होनी चाहिए थी, लेकिन हंगामे के कारण ऐसा नहीं हो सका।
योगी सरकार ने मंगलवार को वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 59,019 करोड़ रुपये का पहला अनुपूरक बजट पेश किया था। सरकार का उद्देश्य विभिन्न विकास योजनाओं और जनकल्याणकारी कार्यक्रमों के लिए अतिरिक्त वित्तीय प्रावधान करना था। हालांकि विपक्ष के विरोध के चलते बजट पर निर्धारित चर्चा नहीं हो सकी और कार्यवाही समय से पहले समाप्त करनी पड़ी।