लखनऊ

रमापति राम त्रिपाठी को अपना गुरु मानते हैं भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी, क्या दोहरा पाएंगे संगठन का पुराना मॉडल?

Pankaj Chaudhary BJP Ramapati Ram Tripathi : यूपी भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी के सामने 2027 की बड़ी चुनौती है। क्या वे अपने राजनीतिक गुरु डॉ. रमापति राम त्रिपाठी के संगठनात्मक मॉडल को दोहरा पाएंगे? जानिए पूरी रणनीति।
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Jul 02, 2026
Pankaj Chaudhary BJP Ramapati Ram Tripathi
Pankaj Chaudhary BJP Ramapati Ram Tripathi : रमापति राम त्रिपाठी को अपना गुरु मानते हैं भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी, PC- Patrika

लखनऊ : उत्तर प्रदेश भाजपा की कमान संभाल रहे पंकज चौधरी इन दिनों पार्टी की सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक जिम्मेदारी निभा रहे हैं। 2027 विधानसभा चुनाव से पहले उन्हें प्रदेश संगठन को मजबूत करने, ओबीसी वोट बैंक को साधने और सरकार-संगठन के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने का दायित्व मिला है। भाजपा नेतृत्व ने उन्हें गैर-यादव ओबीसी, खासकर कुर्मी समाज में पार्टी की पकड़ मजबूत करने की रणनीति के तहत आगे बढ़ाया है।

राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि पंकज चौधरी भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. रमापति राम त्रिपाठी को अपना राजनीतिक गुरु मानते हैं। ऐसे में उनकी कार्यशैली और संगठन संचालन की तुलना स्वाभाविक रूप से त्रिपाठी के दौर से की जा रही है। (TOI की रिपोर्ट के मुताबिक)

रमापति राम त्रिपाठी को भाजपा में जमीनी संगठन खड़ा करने वाले नेताओं में गिना जाता है। वे बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं से संवाद रखने और संगठन को प्राथमिकता देने के लिए जाने जाते रहे हैं।

पंकज चौधरी ऐसे समय प्रदेश अध्यक्ष बने हैं जब भाजपा उत्तर प्रदेश में कई मोर्चों पर एक साथ लड़ाई लड़ रही है। एक तरफ समाजवादी पार्टी का PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) अभियान है, तो दूसरी तरफ भाजपा के सामने अपने पारंपरिक सामाजिक समीकरणों को फिर से मजबूत करने की चुनौती है। पार्टी नेतृत्व मानता है कि गैर-यादव ओबीसी वर्ग को एकजुट रखना 2027 के चुनाव में निर्णायक होगा।

यही कारण है कि कुर्मी चेहरे के रूप में पंकज चौधरी की ताजपोशी को केवल संगठनात्मक बदलाव नहीं, बल्कि एक बड़े राजनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है। भाजपा को उम्मीद है कि उनकी नियुक्ति से कुर्मी समाज और अन्य पिछड़े वर्गों के बीच पार्टी की स्वीकार्यता और मजबूत होगी।

गुरु के रास्ते पर चलने की कोशिश

प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद पंकज चौधरी लगातार 'संगठन, संवाद और समन्वय' की बात कर रहे हैं। उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा है कि उनका फोकस कार्यकर्ताओं को साथ लेकर चलने और संगठन तथा सरकार के बीच बेहतर तालमेल बनाने पर रहेगा।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह वही शैली है जिसकी पहचान कभी रमापति राम त्रिपाठी के नेतृत्व से जुड़ी रही थी। ऐसे में पंकज चौधरी के सामने सबसे बड़ी चुनौती केवल चुनावी रणनीति बनाना नहीं, बल्कि भाजपा संगठन को बूथ स्तर तक सक्रिय और एकजुट बनाए रखना भी है।

2027 की तैयारी का चेहरा

भाजपा के लिए उत्तर प्रदेश सिर्फ एक राज्य नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति का केंद्र है। इसी वजह से प्रदेश अध्यक्ष का पद हमेशा बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। पंकज चौधरी को पार्टी ने ऐसे समय जिम्मेदारी दी है जब पंचायत चुनावों से लेकर विधानसभा चुनाव तक की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं।

अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या अपने राजनीतिक गुरु रमापति राम त्रिपाठी की संगठनात्मक विरासत से प्रेरणा लेकर पंकज चौधरी भाजपा को 2027 की चुनावी लड़ाई के लिए और मजबूत बना पाएंगे या नहीं। आने वाले महीनों में उनके फैसले और संगठन पर पकड़ ही इस सवाल का जवाब तय करेगी।

Published on:
02 Jul 2026 03:04 pm