
UP Elections Social Media Surrogate Campaigns:उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। जमीनी तौर पर प्रचार के गति पकड़ने में भले ही अभी कुछ वक्त हो, लेकिन सोशल मीडिया पर प्रचार का बाजार सज गया है। पार्टियां खुद तो प्रचार कर ही रही हैं, उनके अनाम समर्थक भी एक्टिव हो चुके हैं। भारतीय जनता पार्टी (BJP) और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का प्रचार करने वाले कुछ पेज ऐसे हैं, जो सीधे तौर पर पार्टी से नहीं जुड़े हैं। फिर भी उन पर बीजेपी का जोर-शोर से प्रचार हो रहा है और विपक्ष को निशाना बनाया जा रहा है।
अंग्रेजी न्यूज वेबसाइट ‘द प्रिन्ट’ की रिपोर्ट के मुताबिक मेटा की 'ऐड लाइब्रेरी' के अनुसार, फेसबुक और इंस्टाग्राम पर उत्तर प्रदेश के वोटरों को टारगेट करने वाले राजनीतिक विज्ञापनों पर 4 अगस्त से 4 सितंबर के बीच लगभग 15 लाख रुपए खर्च किए गए हैं। फेसबुक पेज 'नॉनस्टॉप यूपी' (Nonstop UP) पर राज्य सरकार के कामकाज का प्रचार किया गया है और अब तक इस पर लगभग 7.2 लाख रुपए खर्च हुए हैं। इसी तरह, 'याद रखेगा यूपी' (Yaad Rakhega UP) ने पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव के खिलाफ लगभग 200 विज्ञापनों का कैंपेन चलाया, जिस पर करीब 5.63 लाख रुपए खर्च हुए। जबकि 'भारत तोड़ो गैंग' (Bharat Todo Gang) ने कांग्रेस और आम आदमी पार्टी को निशान बनाने पर करीब 1.53 लाख रुपए खर्च किए। इनके साथ ही BJP ब्रांड वाले कई दूसरे पेज भी हैं। खास बात ये है कि इन पेजों का सीधे तौर पर बीजेपी से कोई कनेक्शन दिखाई नहीं देता। द प्रिन्ट की रिपोर्ट के अनुसार, ये पेज कौन चलाता है, यह साफ नहीं है। मेटा हर राजनीतिक विज्ञापनदाता के लिए Paid for by डिस्क्लेमर लगाना ज़रूरी बनाता है, ताकि पता चले कि विज्ञापन का भुगतान किसके द्वारा किया गया है। लेकिन इन पेजों के मामले में ऐसा दिखाई नहीं दे रहा।
दो सबसे बड़े पेज, 'नॉनस्टॉप यूपी' और 'याद रखेगा यूपी', अपनी वेबसाइटों (nonstopup.org और yaadrakhegaup.com) से चलाए जाते हैं, और इनमें से किसी पर भी मालिक या ऑपरेटर का नाम नहीं दिया गया है। किसी भी पार्टी ने सार्वजनिक रूप से इन्हें अपना नहीं बताया है, और फाइल में ऐसी कोई जानकारी नहीं है जो इन्हें किसी उम्मीदवार, एजेंसी या ऑफिस से जोड़ती हो, जिससे इनके पीछे लगे पैसे का पता लगाना मुश्किल है। समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता नावेद सिद्दीकी का कहना है कि ये पेज - जिनमें 'भारत तोड़ो गैंग' और 'याद रखेगा यूपी' शामिल हैं - BJP के लिए काम करने वाले ऐसे पेज हैं जो पार्टी का नेगेटिव कैंपेन चलाते हैं।
सोशल मीडिया पर योगी सरकार की तुलना पहले की सरकारों से की जा रही है, ताकि जनता के सामने एक स्पष्ट तस्वीर पेश की जा सके। उदाहरण के तौर पर ‘नॉनस्टॉप यूपी’ राज्य की सकारात्मक तस्वीर पेश करता है। इसके विज्ञापनों में 2017 से पहले के उत्तर प्रदेश की तुलना आज के उत्तर प्रदेश से की गई है। जैसे - पहले हाथ के पंखे, बिजली कटौती और टूटी-फूटी सड़कें थीं, जबकि आज चौबीसों घंटे बिजली और एक्सप्रेसवे हैं। साथ ही पेज दावा करता है कि नौ सालों में नौ लाख सरकारी नौकरियां दी गईं, वह भी बिना किसी रिश्वत या सिफारिश के, और राज्य की अर्थव्यवस्था 13 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर 30 लाख करोड़ से अधिक हो गई है।
इसी तरह, कुछ विज्ञापन योगी सरकार को "गुंडा-राज" खत्म कर कानून का शासन लाने का श्रेय देते हैं और बुलडोज़र दर्शाते हैं, जो आदित्यनाथ की पहचान बन चुका है। इन विज्ञापनों में विपक्ष, खासकर समाजवादी पार्टी पर जमकर हमले हुए हैं। जैसे एक विज्ञापन में कहा गया है कि जब 'साइकिल' का टायर 'पंचर' हुआ, तो पार्टी का 'घमंड' भी खत्म हो गया। एक अन्य विज्ञापन बार-बार दर्शकों से पेज की वेबसाइट पर साइन-अप करने के लिए कहता है, जिससे यह विज्ञापन समर्थकों का डेटा इकट्ठा करने का ज़रिया बन गया है। विज्ञापन देने वाले का नाम बताने वाली लाइन में केवल “Nonstop UP” लिखा है। जबकि 'याद रखेगा UP' पेज इसका एकदम उल्टा है और लगभग 200 विज्ञापनों के साथ यह ज़्यादा एक्टिव कैंपेन है। ट्रेंडिंग ऑडियो पर बनाई रील्स में यह एक ही संदेश देता है: 2017 से पहले समाजवादी पार्टी के शासन में उत्तर प्रदेश में डर, दंगे और माफिया का राज था। इसमें पिछली SP सरकार के दौरान हुए 2013 के मुज़फ़्फ़रनगर दंगों और मारे गए गैंगस्टर-नेता अतीक अहमद का ज़िक्र किया जाता है।
ये तीनों सोशल मीडिया पेज राजनीतिक कैम्पेन चला रहे हैं। डिस्क्लेमर में यह तो बताया जाता है कि पेज कौन चला रहा है, लेकिन यह नहीं बताया जाता कि पैसे कौन दे रहा है। इन्हें 'सरोगेट' या 'शैडो' एडवर्टाइज़र कहा जा सकता है, जो हाल के चुनावों में काफी एक्टिव हुए हैं। इस तरह के प्रचार के लिए न कोई आचार संहिता है और न ही खर्च की कोई सीमा, इसलिए ये पेज बिना किसी रोक-टोक के विज्ञापनों पर पैसा खर्च करते हैं। इनमें से दो पेज, जिनकी अपनी वेबसाइटें हैं और जिन पर सैकड़ों विज्ञापन चल रहे हैं - किसी फैन पेज के बजाए सुनियोजित तरीके से चलाए जा रहे ऑपरेशन जैसे लगते हैं। इस तरह के पेज Meta के नियमों को लागू करने की प्रक्रिया में मौजूद खामियों का फायदा उठाते रहे हैं। उदाहरण के तौर पर एडवर्टाइज़र से रजिस्ट्रेशन और पते की जानकारी मांगी जाती है, लेकिन किसी पार्टी से जुड़े कई पेज ऐसा नहीं करते। इससे फर्जी संस्थाओं को बिना किसी जवाबदेही के किसी पार्टी के लिए पैसे खर्च करने का मौका मिल जाता है। द प्रिन्ट की रिपोर्ट बताती है कि मेटा की 'कोऑर्डिनेटेड इनऑथेंटिक बिहेवियर' के खिलाफ भी एक पॉलिसी है। इसका मकसद ऐसे पेज नेटवर्क को हटाना है जो एक ही तरह का नैरेटिव फैलाते हैं लेकिन अपने आपसी संबंधों को छिपाकर रखते हैं। इस लिहाज से यूपी में विपक्ष की बुराई करने वाले पेजों पर कार्रवाई होनी चाहिए, फिर भी मेटा उन पर कोई कार्रवाई नहीं करता।
उत्तर प्रदेश में बीजेपी के सोशल मीडिया हेड हिमांशु राज का कहना है कि पार्टी का ऐसे किसी भी पेज से कोई रिश्ता नहीं है। कोई भी किसी के नाम से पेज बना सकता है। राज ने कहा कि पार्टी का अपना सोशल मीडिया का काम तीन तरह से चलता है। पहला, सरकारी योजनाओं के फायदा उठाने वालों और आउटरीच प्रोग्राम के ज़रिए सरकार के काम को प्रमोट करना; इसमें उन लोगों के बिना स्क्रिप्ट वाले, रॉ फ़ुटेज का इस्तेमाल किया जाता है जिनकी ज़िंदगी बदली है। दूसरा, 'पहले और बाद' की कहानी दिखाना, जिसमें बीजेपी के सत्ता में आने से पहले और बाद की स्थिति की तुलना की जाती है, खासकर पुलिसिंग और क्राइम के मामले में। तीसरा, फैक्ट-चेकिंग, जो दो तरह से काम करती है: सरकार के अपने काम का 'पहले और बाद' का फ़र्क दिखाना, और AI के दौर में लोकल यूट्यूबर और दूसरों द्वारा फैलाए जा रहे फेक और एडिटेड वीडियो और न्यूज़ का जवाब देना।
अब इन पेजों की सच्चाई भले ही जो हो, लेकिन ये जमकर बीजेपी का प्रचार और विपक्ष पर वार कर रहे हैं। राजनीति के जानकारों का कहना है कि अक्सर नेता और पार्टियां इस तरह के अभियानों को फंड करती हैं, लेकिन उसका रिकॉर्ड नहीं रखतीं। अगर नेता और पार्टी के बजाए कोई तीसरा, सरकार की अच्छाई गिनाए तो उसका इम्पैक्ट ज्यादा होता है। इस तरह की सोशल मीडिया एक्टिविटीज़ एक गाइडेड मिसाइल की तरह होती हैं, जिनके निशाने पर लगने की संभावना अधिक है। इसलिए अनाम समर्थकों को जन्म दिया जाता है।