
3 हजार उत्पाद पहुंचेंगे Amazon-Flipkart समेत बड़े डिजिटल बाजारों तक (फोटो सोर्स : Ritesh Singh )
UP Local to Global:उत्तर प्रदेश की ग्रामीण महिलाओं के हुनर और मेहनत को अब गांव और स्थानीय बाजार तक सीमित रखने के बजाय देश-दुनिया के बड़े बाजारों तक पहुंचाने की तैयारी तेज हो गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं के उत्पादों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने के लिए व्यापक नेटवर्क तैयार किया गया है। प्रदेश में 543 प्रेरणा सरस स्टोर स्थापित किए जा चुके हैं, जबकि 3,000 से अधिक उत्पादों के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन मार्केटिंग प्लेटफॉर्म विकसित किए गए हैं। इसके जरिए गांवों में तैयार उत्पादों को ब्रांडिंग, पैकेजिंग, बिक्री और डिजिटल मार्केटिंग की ताकत मिलेगी।
अब स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं के उत्पाद केवल स्थानीय हाट, मेले या आसपास के बाजारों तक सीमित नहीं रहेंगे। ओएनडीसी, ई-सरस, प्रेरणा मार्ट, मीशो, अमेजन और फ्लिपकार्ट जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से इन उत्पादों को बड़े बाजार तक पहुंचाने की व्यवस्था तैयार की जा रही है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में तैयार होने वाले पारंपरिक और स्थानीय उत्पादों को नई पहचान मिलने के साथ उनकी बिक्री का दायरा भी बढ़ेगा।
ग्रामीण महिलाओं के लिए उत्पाद तैयार करना जितना जरूरी है, उससे कम महत्वपूर्ण उन्हें सही बाजार उपलब्ध कराना नहीं है। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं लंबे समय से अलग-अलग तरह के स्थानीय उत्पाद तैयार कर रही हैं, लेकिन बाजार सीमित होने के कारण उनकी पहुंच बड़े ग्राहक वर्ग तक नहीं हो पाती थी।
योगी सरकार की पहल में इसी चुनौती को दूर करने पर जोर दिया जा रहा है। प्रेरणा सरस स्टोर के माध्यम से स्थानीय उत्पादों को बिक्री के लिए व्यवस्थित मंच मिलेगा, जबकि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए इन उत्पादों की पहुंच भौगोलिक सीमाओं से बाहर होगी। इससे किसी गांव या जिले में तैयार खास उत्पाद को दूसरे राज्यों और बड़े शहरों के ग्राहकों तक पहुंचाना आसान होगा।
प्रदेश में स्वयं सहायता समूहों से जुड़े 3,000 से अधिक उत्पादों के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन मार्केटिंग प्लेटफॉर्म तैयार किए गए हैं। यह व्यवस्था ग्रामीण उत्पादों को केवल बेचने तक सीमित नहीं है, बल्कि उनकी पहचान बनाने और उन्हें बाजार की मांग के अनुरूप विकसित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। किसी क्षेत्र की खास पहचान वाले उत्पादों को डिजिटल माध्यम से देश के अलग-अलग हिस्सों में बैठे ग्राहक देख और खरीद सकेंगे। इससे स्थानीय उत्पादों के लिए ग्राहक आधार बढ़ने की संभावना है। साथ ही महिलाओं को यह समझने का अवसर मिलेगा कि बाजार में किस तरह के उत्पादों की मांग अधिक है और ग्राहक गुणवत्ता, पैकेजिंग तथा कीमत के स्तर पर क्या चाहते हैं।
प्रदेश में स्थापित किए गए 543 प्रेरणा सरस स्टोर ग्रामीण उत्पादों को स्थानीय स्तर पर बिक्री का मजबूत आधार देने की दिशा में अहम कदम हैं। जनपद और ब्लॉक स्तर पर विकसित इन स्टोरों के माध्यम से स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों को एक व्यवस्थित बाजार उपलब्ध कराया जा रहा है। इन स्टोरों का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों में उत्पाद तैयार करने वाली महिलाओं को अपने उत्पाद बेचने के लिए अलग-अलग बाजार तलाशने की जरूरत कम होगी। एक व्यवस्थित बिक्री मंच मिलने से उत्पादों की प्रस्तुति, ग्राहक तक पहुंच और बिक्री प्रक्रिया को बेहतर तरीके से संचालित किया जा सकेगा।
ग्रामीण आजीविका मिशन के मिशन निदेशक अरुण कुमार के अनुसार, स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को केवल बचत और ऋण तक सीमित रखने के बजाय उन्हें उद्यमिता के अवसर उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है। उनका कहना है कि उत्पादन के साथ पैकेजिंग, ब्रांडिंग और बाजार से जुड़ाव बढ़ने से ग्रामीण महिलाओं के छोटे उद्यमों को विस्तार का अवसर मिल रहा है। यह बदलाव स्वयं सहायता समूहों की भूमिका को भी व्यापक बना रहा है। अब समूहों का उद्देश्य केवल आर्थिक गतिविधियों के जरिए आजीविका बढ़ाना नहीं, बल्कि उत्पाद तैयार करने से लेकर उसकी ब्रांडिंग, बिक्री और बाजार विस्तार तक की पूरी प्रक्रिया में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना है।
डिजिटल मार्केटिंग की दिशा में बिजनौर राज्य एग्रीगेशन सेंटर के माध्यम से ऑनलाइन विपणन कार्य शुरू किया जा चुका है। अलग-अलग स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों को एक मंच पर लाकर उनकी बिक्री और बाजार तक पहुंच को व्यवस्थित करने का प्रयास किया जा रहा है। डिजिटल प्लेटफॉर्म का सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि किसी एक जिले में तैयार होने वाला उत्पाद स्थानीय ग्राहक वर्ग से आगे निकलकर दूसरे शहरों और राज्यों के लोगों तक पहुंच सकेगा। इससे स्थानीय उत्पादों की पहचान बढ़ेगी और ग्रामीण महिलाओं को अपने उत्पादों के लिए व्यापक बाजार मिलने की संभावना बनेगी।
ग्रामीण क्षेत्रों में बनने वाले कई उत्पाद गुणवत्ता और स्थानीय विशेषता के मामले में मजबूत होते हैं, लेकिन प्रभावी ब्रांडिंग और पैकेजिंग के अभाव में बड़े बाजार में अपनी जगह नहीं बना पाते। अब इसी अंतर को खत्म करने की दिशा में काम किया जा रहा है। प्रेरणा सरस स्टोर और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए उत्पादों को केवल बिक्री की वस्तु के रूप में नहीं, बल्कि एक पहचान और ब्रांड के रूप में विकसित करने पर जोर है। बेहतर पैकेजिंग, डिजिटल प्रस्तुति और व्यवस्थित मार्केटिंग से ग्राहकों के बीच उत्पादों की विश्वसनीयता बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
बड़े बाजार से जुड़ने के बाद स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को ग्राहकों की पसंद और बाजार की मांग को समझने का अवसर भी मिलेगा। अभी तक कई ग्रामीण उत्पाद स्थानीय जरूरतों और सीमित बाजार के हिसाब से तैयार किए जाते रहे हैं। डिजिटल बाजार से जुड़ने के बाद उत्पादों की गुणवत्ता, डिजाइन, पैकेजिंग और कीमत में बदलाव की जरूरत को बेहतर तरीके से समझा जा सकेगा। इससे ग्रामीण महिलाएं अपने छोटे कारोबार को धीरे-धीरे बड़े उद्यम में बदलने की दिशा में आगे बढ़ सकती हैं। बाजार से मिलने वाली प्रतिक्रिया के आधार पर उत्पादन बढ़ाने और नए उत्पाद तैयार करने के रास्ते भी खुलेंगे।
उत्तर प्रदेश की ग्रामीण महिलाओं के लिए यह पहल स्थानीय हुनर को बड़े बाजार से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है। गांव में तैयार होने वाले उत्पाद अब केवल गांव या आसपास के कस्बों तक सीमित नहीं रहेंगे। प्रेरणा सरस स्टोर से लेकर ऑनलाइन मार्केटप्लेस तक तैयार हो रहा नेटवर्क उन्हें व्यापक ग्राहक वर्ग तक पहुंचाने का माध्यम बनेगा। 3,000 से अधिक उत्पाद, 543 प्रेरणा सरस स्टोर और ऑनलाइन-ऑफलाइन मार्केटिंग प्लेटफॉर्म मिलकर ग्रामीण महिला उद्यमिता को नई दिशा देने की कोशिश कर रहे हैं। इससे स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं उत्पाद बनाने वाली ‘दीदियों’ से आगे बढ़कर अपने उत्पादों की ब्रांडिंग, बिक्री और बाजार रणनीति तय करने वाली ग्रामीण उद्यमी के रूप में पहचान बना सकेंगी।
योगी सरकार की इस पहल का व्यापक उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक भागीदारी को मजबूत करना और उनके उत्पादों को बाजार की मुख्यधारा से जोड़ना है। यदि स्थानीय उत्पादों की गुणवत्ता, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और डिजिटल बिक्री को लगातार मजबूती मिलती है तो आने वाले समय में उत्तर प्रदेश के कई ग्रामीण उत्पाद देश के साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी अपनी जगह बना सकते हैं। यह पहल केवल उत्पादों की बिक्री बढ़ाने की कवायद नहीं, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के आत्मविश्वास, आर्थिक आत्मनिर्भरता और उद्यमिता को मजबूत करने का माध्यम भी बन सकती है। लोकल हुनर को ग्लोबल बाजार से जोड़ने की यह कोशिश यूपी की ‘दीदियों’ के लिए कारोबार की नई उड़ान का रास्ता तैयार कर रही है।
Updated on:
15 Sept 2026 04:21 pm
Published on:
15 Sept 2026 04:21 pm
