
जो प्रदेश की सेवा में जुटे, योगी सरकार ने उनके परिवारों को दिया स्वास्थ्य सुरक्षा का कवच (फोटो सोर्स : Ritesh Singh )
Yogi Government:उत्तर प्रदेश में समाज और सरकार की योजनाओं को जमीनी स्तर तक पहुंचाने वाले पीआरडी स्वयंसेवकों, विद्यालयों की रसोइयों और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं-सहायिकाओं के लिए योगी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने इन सेवा वर्गों के मानदेय में बढ़ोतरी के साथ उनके और उनके आश्रित परिवारों के लिए सालाना पांच लाख रुपये तक की कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने का फैसला किया है। सरकार के इस निर्णय से इन कर्मचारियों को न केवल आर्थिक राहत मिलेगी, बल्कि गंभीर बीमारी या आकस्मिक स्वास्थ्य संकट की स्थिति में परिवार पर पड़ने वाले इलाज के भारी खर्च का बोझ भी कम होगा।
प्रदेश में बड़ी संख्या में ऐसे कर्मचारी और स्वयंसेवक हैं, जो सीमित मानदेय के बावजूद लगातार समाज और सरकारी व्यवस्था को मजबूत करने में अपनी भूमिका निभाते हैं। पीआरडी स्वयंसेवक सुरक्षा, यातायात व्यवस्था, आपदा प्रबंधन और विभिन्न प्रशासनिक कार्यों में सहयोग करते हैं। वहीं विद्यालयों की रसोइयां बच्चों के लिए भोजन तैयार करने की जिम्मेदारी निभाती हैं और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता-सहायिकाएं बच्चों, गर्भवती महिलाओं और माताओं से जुड़ी योजनाओं को गांव-गांव तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
सरकार के ताजा फैसले में इन सेवा वर्गों की भूमिका के साथ उनके परिवार की जरूरतों को भी ध्यान में रखा गया है। मानदेय बढ़ाने के साथ स्वास्थ्य सुरक्षा को जोड़ना इस बात का संकेत है कि सरकार केवल कर्मचारी की आय बढ़ाने तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि बीमारी जैसी आकस्मिक परिस्थितियों में परिवार को आर्थिक संकट से बचाने की दिशा में भी कदम बढ़ा रही है।
प्रदेश के 31 हजार से अधिक पीआरडी स्वयंसेवकों और उनके परिवारों को सालाना पांच लाख रुपये तक के कैशलेस इलाज की सुविधा देने का फैसला किया गया है। सरकारी और सूचीबद्ध अस्पतालों में उपचार की सुविधा मिलने से पीआरडी स्वयंसेवकों को गंभीर बीमारी या महंगे इलाज के समय बड़ी रकम जुटाने की परेशानी से राहत मिलने की उम्मीद है। पीआरडी स्वयंसेवक प्रदेश में कानून-व्यवस्था से जुड़े विभिन्न कार्यों में पुलिस और प्रशासन का सहयोग करते हैं। यातायात व्यवस्था से लेकर विभिन्न आयोजनों, आपदा और आपात परिस्थितियों में भी उनकी भूमिका सामने आती है। ऐसे में लंबे समय से सेवा दे रहे इन स्वयंसेवकों के लिए स्वास्थ्य सुरक्षा की व्यवस्था उनके सामाजिक और आर्थिक कल्याण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
कम आय वाले परिवारों के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक अचानक आने वाला बड़ा चिकित्सा खर्च होता है। सामान्य बीमारी से लेकर गंभीर उपचार तक, अस्पताल में भर्ती होने की स्थिति में परिवार की वर्षों की बचत तक खर्च हो सकती है। कई बार इलाज का खर्च जुटाने के लिए कर्ज लेने की नौबत भी आ जाती है। ऐसे में पांच लाख रुपये तक की कैशलेस चिकित्सा सुविधा इन परिवारों के लिए आर्थिक सुरक्षा का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकती है। कैशलेस व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि पात्र परिवारों को उपचार के समय तत्काल बड़ी रकम की व्यवस्था करने की चिंता कम होगी।
परिषदीय विद्यालयों में बच्चों के लिए भोजन तैयार करने वाली रसोइयों को भी सरकार के फैसले से दोहरा लाभ मिलेगा। सरकार ने उनके मानदेय में एक हजार रुपये प्रतिमाह की बढ़ोतरी के साथ परिवार सहित पांच लाख रुपये तक की कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने का निर्णय लिया है। विद्यालयों में बच्चों को भोजन उपलब्ध कराने की व्यवस्था में रसोइयों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। सीमित आय में काम करने वाली इन महिलाओं के लिए मानदेय में वृद्धि सीधे उनकी मासिक आर्थिक स्थिति को प्रभावित करेगी। वहीं परिवार को स्वास्थ्य सुरक्षा मिलने से बीमारी के समय अतिरिक्त आर्थिक दबाव कम करने में मदद मिल सकती है।
आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के लिए भी सरकार ने मानदेय बढ़ोतरी का फैसला किया है। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का मानदेय 8 हजार रुपये से बढ़ाकर 12 हजार रुपये और सहायिकाओं का मानदेय 4 हजार रुपये से बढ़ाकर 6 हजार रुपये किया गया है। इसके साथ दोनों के परिवारों को पांच लाख रुपये तक की सालाना कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने का फैसला किया गया है। यानी आंगनवाड़ी से जुड़े कर्मियों को आय में बढ़ोतरी के साथ स्वास्थ्य सुरक्षा का भी लाभ मिलेगा। इससे इन कर्मचारियों के परिवारों की आर्थिक स्थिरता मजबूत होने की उम्मीद है।
आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं प्रदेश की ग्रामीण व्यवस्था में बेहद महत्वपूर्ण कड़ी हैं। बच्चों के पोषण, मातृ-शिशु स्वास्थ्य, टीकाकरण और विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी लोगों तक पहुंचाने में इनकी भूमिका रहती है। ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी योजनाओं की पहुंच और उनके क्रियान्वयन में इन कर्मियों का योगदान लगातार बना रहता है। इसी तरह पीआरडी स्वयंसेवक और विद्यालयों की रसोइयां भी अपने-अपने स्तर पर सरकारी व्यवस्था को मजबूती देती हैं। सरकार की ओर से इन वर्गों के लिए आर्थिक और स्वास्थ्य सुरक्षा बढ़ाने से इनके मनोबल पर सकारात्मक असर पड़ने की उम्मीद है।
सरकार के इन फैसलों की खास बात यह है कि इसमें केवल मानदेय बढ़ाने पर ध्यान नहीं दिया गया है। कर्मचारियों और उनके परिवारों की स्वास्थ्य जरूरतों को भी समान महत्व दिया गया है। इससे सेवा वर्गों को आर्थिक और स्वास्थ्य सुरक्षा का दोहरा लाभ मिलेगा। मानदेय में बढ़ोतरी जहां रोजमर्रा के घरेलू खर्चों में मदद करेगी, वहीं कैशलेस चिकित्सा सुविधा परिवार को अचानक आने वाले बड़े स्वास्थ्य खर्च से बचाने में सहायक होगी। इस तरह दोनों फैसले मिलकर परिवार की आर्थिक स्थिति को अधिक सुरक्षित बनाने का काम कर सकते हैं।महिला
रसोइयों और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं-सहायिकाओं में बड़ी संख्या में महिलाएं काम करती हैं। ऐसे में मानदेय वृद्धि और परिवार सहित स्वास्थ्य सुरक्षा का लाभ महिला कर्मियों के सामाजिक और आर्थिक सशक्तीकरण से भी जुड़ता है। नियमित आय में वृद्धि से परिवार के खर्चों में योगदान बढ़ेगा और स्वास्थ्य सुविधा मिलने से बीमारी के समय आर्थिक निर्भरता कम हो सकती है। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में काम करने वाली महिला कर्मियों के लिए यह व्यवस्था महत्वपूर्ण है, क्योंकि सीमित संसाधनों वाले परिवारों में स्वास्थ्य संबंधी खर्च अक्सर बड़ी चुनौती बन जाता है।
योगी सरकार के इन फैसलों से यह संदेश देने की कोशिश दिखाई देती है कि सरकारी योजनाओं को जमीन पर लागू करने और समाज की सेवा में योगदान देने वाले कर्मचारियों की सुरक्षा भी सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। पीआरडी स्वयंसेवकों, रसोइयों और आंगनबाड़ी कर्मियों को मिलने वाली सुविधाएं सीधे उनके परिवारों की आर्थिक और स्वास्थ्य सुरक्षा से जुड़ी हैं। मानदेय बढ़ोतरी और कैशलेस इलाज की सुविधा से इन सेवा वर्गों को अपने भविष्य को लेकर अधिक भरोसा मिलने की उम्मीद है। खासकर बीमारी जैसी आकस्मिक परिस्थितियों में परिवार को आर्थिक संकट से बचाने की दिशा में यह कदम अहम साबित हो सकता है।
किसी भी कर्मचारी के लिए केवल आय ही महत्वपूर्ण नहीं होती, बल्कि परिवार की बीमारी और इलाज की चिंता भी उसके जीवन का बड़ा हिस्सा होती है। सरकार की ओर से परिवार को स्वास्थ्य सुरक्षा के दायरे में लाने से सेवा करने वाले कर्मचारियों का भरोसा बढ़ सकता है।
पीआरडी जवानों से लेकर स्कूलों की रसोइयों और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं-सहायिकाओं तक, इन फैसलों का उद्देश्य उन लोगों को राहत देना है जो प्रदेश की व्यवस्था और समाज की जरूरतों से सीधे जुड़े हुए हैं। मानदेय में बढ़ोतरी और पांच लाख रुपये तक के कैशलेस इलाज की सुविधा को मिलाकर सरकार ने इन सेवा वर्गों के लिए आर्थिक सुरक्षा के साथ स्वास्थ्य सुरक्षा का भी मजबूत कवच तैयार किया है।
Updated on:
15 Sept 2026 06:35 pm
Published on:
15 Sept 2026 06:35 pm
