UP Govt Approves: उत्तर प्रदेश सरकार ने पूर्वी पाकिस्तान से विस्थापित 99 हिंदू बंगाली परिवारों के स्थायी पुनर्वासन का बड़ा फैसला लिया है। मेरठ में वर्षों से झील क्षेत्र में रह रहे इन परिवारों को अब कानपुर देहात में जमीन आवंटित होगी, जिससे उन्हें सुरक्षित आवास, कानूनी पहचान और बेहतर भविष्य की स्थिरता मिल सकेगी।
UP Government Cabinet Decision: उत्तर प्रदेश सरकार ने एक संवेदनशील और लंबे समय से लंबित मानवीय मुद्दे पर बड़ा फैसला लेते हुए पूर्वी पाकिस्तान (वर्तमान बांग्लादेश) से विस्थापित होकर प्रदेश में रह रहे हिंदू बंगाली परिवारों के स्थायी पुनर्वासन को मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में मेरठ जनपद से जुड़े इस मामले पर मुहर लगाई गई। इस निर्णय से दशकों से अस्थायी और असुरक्षित हालात में जीवन बिता रहे 99 परिवारों को स्थायी पहचान, जमीन और भविष्य की स्थिरता मिलने का रास्ता साफ हो गया है।
यह प्रकरण मेरठ जिले की मवाना तहसील के ग्राम नंगला गोसाई से जुड़ा है। यहां पूर्वी पाकिस्तान से विस्थापित 99 हिंदू बंगाली परिवार वर्षों से झील की भूमि पर अवैध रूप से रह रहे थे। ये परिवार ऐतिहासिक परिस्थितियों में अपना घर-बार छोड़कर भारत आए थे, लेकिन लंबे समय तक इनके पुनर्वासन का स्थायी समाधान नहीं निकल सका। झील क्षेत्र में बसी यह बस्ती पर्यावरण की दृष्टि से भी संवेदनशील मानी जाती है। ऐसे में सरकार के सामने दोहरी चुनौती थी।
सरकार ने इन 99 परिवारों को जनपद कानपुर देहात में बसाने का निर्णय लिया है। पुनर्वासन की व्यवस्था दो गांवों में की जाएगी।
| स्थान | भूमि क्षेत्रफल | बसाए जाने वाले परिवार |
| ग्राम भैंसाया, तहसील रसूलाबाद | 11.1375 हेक्टेयर (27.5097 एकड़) | 50 परिवार |
| ग्राम ताजपुर तरसौली, तहसील रसूलाबाद | 10.530 हेक्टेयर (26.009 एकड़) | 49 परिवार |
दोनों स्थानों की भूमि पुनर्वास विभाग के नाम दर्ज है, जिससे प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रिया सुगम रहेगी।
सरकार ने प्रत्येक परिवार को 0.50 एकड़ भूमि देने का निर्णय लिया है। यह भूमि प्रीमियम या लीज रेंट पर दी जाएगी। प्रारंभिक पट्टा अवधि: 30 वर्ष,आगे 30-30 वर्ष के लिए नवीनीकरण संभव। अधिकतम पट्टा अवधि 90 वर्ष का होगा । इस व्यवस्था से परिवारों को दीर्घकालिक सुरक्षा मिलेगी, जबकि भूमि का स्वामित्व सरकार के पास रहेगा।
नंगला गोसाई क्षेत्र में जहां ये परिवार रह रहे थे, वह झील से जुड़ा इलाका होने के कारण पारिस्थितिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। वहां स्थायी बस्तियां बसने से जल संरक्षण और जैव विविधता पर खतरा था। सरकार का यह निर्णय झील क्षेत्र को अतिक्रमण से मुक्त करेगा। पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में मदद करेगा। परिवारों को असुरक्षित और अवैध स्थिति से बाहर निकालेगा .इस तरह यह फैसला केवल पुनर्वासन नहीं, बल्कि सतत विकास (Sustainable Development) की दिशा में भी कदम माना जा रहा है।
अब तक ये परिवार बुनियादी सुविधाओं से वंचित थे। कानूनी पहचान और जमीन के अधिकार से दूर थे। शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार में असुरक्षा की स्थिति में थे
इन परिवारों के लिए यह फैसला वर्षों के इंतजार का अंत है। पीढ़ियों से अस्थायी जीवन जी रहे लोगों को अब एक स्थायी ठिकाना और भविष्य की स्पष्ट दिशा मिलेगी। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि पुनर्वासन योजनाएं इस तरह नियोजित ढंग से लागू होती रहीं, तो प्रदेश में अन्य लंबित विस्थापन मामलों का समाधान भी आसान हो सकेगा।