लखनऊ

UP Monsoon Back on Track: पांच दिनों की झमाझम बारिश से यूपी में मानसून पटरी पर, लखनऊ समेत कई जिलों में अलर्ट

UP Rain Alert: पिछले पांच दिनों की लगातार बारिश से उत्तर प्रदेश में मानसून पूरी तरह सक्रिय हो गया है। वर्षा विचलन घटकर सामान्य श्रेणी में पहुंच गया, जबकि लखनऊ समेत दक्षिणी यूपी में भारी बारिश का अलर्ट जारी है।
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Aug 08, 2026
दक्षिणी यूपी में अगले चार दिन भारी बारिश के आसार, लखनऊ समेत कई जिलों में राहत और सतर्कता दोनों की जरूरत (फोटो सोर्स : भाषा संवाद WhatsApp News Group)
दक्षिणी यूपी में अगले चार दिन भारी बारिश के आसार, लखनऊ समेत कई जिलों में राहत और सतर्कता दोनों की जरूरत (फोटो सोर्स : भाषा संवाद WhatsApp News Group)

Heavy Rain in UP: उत्तर प्रदेश में पिछले चार-पांच दिनों से लगातार हो रही व्यापक वर्षा ने मानसून की तस्वीर बदल दी है। लंबे समय तक वर्षा की कमी से जूझ रहे प्रदेश में अब मानसूनी गतिविधियां पूरी तरह सक्रिय हो चुकी हैं। लखनऊ मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार दक्षिणी पश्चिमी उत्तर प्रदेश के ऊपर मध्य क्षोभमंडल तक फैले चक्रवाती परिसंचरण के प्रभाव से एक निम्न दबाव क्षेत्र विकसित हुआ है। इसके कारण मानसूनी द्रोणी अपनी सामान्य स्थिति के करीब पहुंच गई है और यही वजह है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश से लेकर राजधानी लखनऊ तथा प्रदेश के कई अन्य हिस्सों में अच्छी बारिश दर्ज की जा रही है। इस व्यापक वर्षा का सबसे बड़ा सकारात्मक प्रभाव यह रहा कि प्रदेश का वर्षा विचलन, जो कुछ दिन पहले तक सामान्य से काफी नीचे था, अब सुधरकर सामान्य श्रेणी में आ गया है।

मानसूनी तंत्र हुआ मजबूत, बदलने लगा मौसम का स्वरूप

भारतीय मौसम विभाग के अनुसार वर्तमान में सक्रिय मानसूनी प्रणाली काफी प्रभावी स्थिति में है। मानसूनी द्रोणी श्रीगंगानगर, दिल्ली, दक्षिण-पश्चिम उत्तर प्रदेश में बने निम्न दबाव क्षेत्र के केंद्र, रांची और दीघा होते हुए पूर्व-मध्य बंगाल की खाड़ी तक फैली हुई है। इस सक्रिय मानसूनी पट्टी के कारण पूरे उत्तर प्रदेश में नमी की मात्रा लगातार बढ़ रही है, जिससे अधिकांश जिलों में बादलों की आवाजाही और वर्षा की गतिविधियां तेज हो गई हैं।

बारिश के बाद मौसम विभाग ने जारी किया अलर्ट  (फोटो सोर्स : Meteorological Department )   

मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि दक्षिणी गांगेय पश्चिम बंगाल और उससे सटे बांग्लादेश के आसपास ऊपरी क्षोभमंडल तक फैला एक और चक्रवाती परिसंचरण भी तेजी से सक्रिय हो रहा है। इसके प्रभाव से आगामी 24 घंटों के भीतर तटीय गांगेय पश्चिम बंगाल तथा उत्तरी-पश्चिमी बंगाल की खाड़ी के आसपास एक नया निम्न दबाव क्षेत्र बनने की संभावना है। यह प्रणाली पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा की ओर बढ़ते हुए मानसूनी द्रोणी के साथ आगे बढ़ेगी और उत्तर प्रदेश में बारिश की गतिविधियों को और मजबूत करेगी।

लखनऊ समेत कई जिलों में राहत की बारिश

मौसम विभाग के वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह ने कहा कि राजधानी लखनऊ सहित मध्य और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अनेक जिलों में बीते कुछ दिनों से रुक-रुककर हो रही वर्षा ने लोगों को उमस और गर्मी से बड़ी राहत दी है। दिन के तापमान में गिरावट दर्ज की गई है, जबकि सुबह और शाम के समय मौसम काफी सुहावना बना हुआ है। खेतों में पर्याप्त नमी पहुंचने से किसानों के चेहरे खिल उठे हैं। धान, मक्का, अरहर, उड़द, तिल और अन्य खरीफ फसलों के लिए यह बारिश किसी वरदान से कम नहीं मानी जा रही है।

हालांकि, लगातार वर्षा के कारण कई निचले इलाकों में जलभराव की समस्या भी सामने आई है। नगर निकायों के लिए जल निकासी व्यवस्था को दुरुस्त रखना चुनौती बन गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अगले कुछ दिनों तक इसी प्रकार वर्षा जारी रही तो शहरी क्षेत्रों में जलभराव और ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे नालों तथा नदियों का जलस्तर बढ़ सकता है।

प्रदेश के दक्षिणी हिस्से में भारी बारिश की संभावना

मौसम विभाग ने अगले चार दिनों के दौरान विशेष रूप से दक्षिणी उत्तर प्रदेश में कहीं-कहीं भारी वर्षा होने की संभावना जताई है। मानसूनी प्रवाह के और अधिक सुदृढ़ होने से प्रयागराज, चित्रकूट, बांदा, कौशांबी, फतेहपुर, सोनभद्र, मिर्जापुर, चंदौली, वाराणसी सहित आसपास के जिलों में अच्छी बारिश हो सकती है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में भी मध्यम से भारी वर्षा का दौर जारी रहने की संभावना व्यक्त की गई है।

पिछले पांच दिनों की लगातार बारिश से उत्तर प्रदेश में मानसून पूरी तरह सक्रिय  (फोटो सोर्स : Meteorological Department )   

मौसम वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह के अनुसार इस दौरान कुछ स्थानों पर गरज-चमक के साथ तेज हवाएं भी चल सकती हैं। ऐसे में लोगों को खराब मौसम के दौरान अनावश्यक रूप से खुले स्थानों में जाने से बचने और प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है।

सामान्य श्रेणी में पहुंची मानसूनी वर्षा, कृषि क्षेत्र को बड़ी राहत

प्रदेश के लिए सबसे राहत भरी खबर यह है कि पिछले चार से पांच दिनों के दौरान हुई व्यापक वर्षा ने पूरे मानसून सीजन की तस्वीर बदल दी है। इससे पहले प्रदेश में वर्षा सामान्य से लगभग 29 प्रतिशत कम दर्ज की जा रही थी। लगातार हुई अच्छी बारिश के कारण वर्षा विचलन में लगभग 10 प्रतिशत का सुधार हुआ है और अब यह घटकर -19 प्रतिशत रह गया है।

मौसम विभाग के मानकों के अनुसार -19 प्रतिशत से +19 प्रतिशत तक की वर्षा को सामान्य श्रेणी में रखा जाता है। इस प्रकार उत्तर प्रदेश की कुल मानसूनी वर्षा अब सामान्य श्रेणी में पहुंच चुकी है। यह कृषि, भूजल स्तर, जलाशयों और पेयजल संसाधनों के लिए अत्यंत सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

किसानों में बढ़ी उम्मीद, जलाशयों को मिलेगा संजीवनी

लगातार वर्षा से प्रदेश के तालाब, झील, नहरें और छोटे जलाशय भरने लगे हैं। इससे सिंचाई व्यवस्था को मजबूती मिलेगी और भूजल स्तर में भी सुधार होने की संभावना है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर हुई यह बारिश खरीफ फसलों की वृद्धि के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। यदि आने वाले दिनों में भी संतुलित वर्षा होती रही तो उत्पादन पर इसका सकारात्मक प्रभाव देखने को मिलेगा। हालांकि विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि अत्यधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में खेतों से जल निकासी की समुचित व्यवस्था करना आवश्यक होगा, ताकि फसलों को जलभराव से नुकसान न पहुंचे।

प्रशासन और नागरिकों के लिए सतर्क रहने का समय

मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों तक बारिश का सिलसिला जारी रहने की संभावना जताई है। ऐसे में जिला प्रशासन को जलभराव वाले क्षेत्रों, निचली बस्तियों और संवेदनशील इलाकों पर विशेष निगरानी रखने की आवश्यकता होगी। वहीं नागरिकों से भी अपील की गई है कि तेज बारिश, बिजली चमकने और आंधी के दौरान सुरक्षित स्थानों पर रहें तथा मौसम विभाग द्वारा जारी ताजा अपडेट पर नजर बनाए रखें।

लखनऊ में झमाझम बारिश के दौरान भीगती सड़कें और छाते के सहारे ट्रैफिक संभालती एसपी ट्रैफिक रवीना त्यागी(फोटो सोर्स :  Lucknow Traffic Police )  

कुल मिलाकर, उत्तर प्रदेश में मानसून अब पूरी तरह सक्रिय दिखाई दे रहा है। पिछले पांच दिनों की लगातार वर्षा ने जहां प्रदेश को भीषण गर्मी और सूखे जैसी स्थिति से राहत दिलाई है, वहीं कृषि, जल संसाधनों और पर्यावरण के लिए भी नई उम्मीद जगाई है। यदि आगामी दिनों में भी मानसूनी तंत्र इसी प्रकार सक्रिय बना रहता है तो यह वर्ष प्रदेश के लिए बेहतर मानसून वाले वर्षों में शामिल हो सकता है।