लखनऊ

शिक्षक दिवस पर सपा छात्र सभा का हल्ला बोल, ‘पाठशाला पुकारे’ अभियान से बंद स्कूलों पर सरकार को घेरेगी

SP Student Union:शिक्षक दिवस पर समाजवादी छात्र सभा यूपी में ‘पाठशाला पुकारे’ अभियान शुरू करेगी। बंद स्कूल, पेपर लीक, फीस वृद्धि, रोजगार और आरक्षण जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी।
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Sep 05, 2026
5 से 11 सितंबर तक चलेगा ‘छात्र, नौजवान एवं PDA जागरूकता अभियान’, पेपर लीक, फीस वृद्धि, रोजगार और आरक्षण समेत शिक्षा से जुड़े मुद्दे होंगे केंद्र में (फोटो सोर्स :Akhilesh Yadav/x )
5 से 11 सितंबर तक चलेगा ‘छात्र, नौजवान एवं PDA जागरूकता अभियान’, पेपर लीक, फीस वृद्धि, रोजगार और आरक्षण समेत शिक्षा से जुड़े मुद्दे होंगे केंद्र में (फोटो सोर्स :Akhilesh Yadav/x )

up politics PDA Campaign: शिक्षक दिवस के मौके पर उत्तर प्रदेश की राजनीति में शिक्षा और युवाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर हलचल बढ़ने जा रही है। समाजवादी छात्र सभा ने पांच सितंबर से 11 सितंबर तक प्रदेशव्यापी ‘छात्र, नौजवान एवं PDA जागरूकता अभियान’ शुरू करने का ऐलान किया है। अभियान के जरिए समाजवादी पार्टी की छात्र इकाई सरकारी स्कूलों, उच्च शिक्षा संस्थानों और युवाओं से जुड़े विभिन्न सवालों को लेकर सरकार को घेरने की तैयारी में है। अभियान में बंद बताए जा रहे प्राथमिक और जूनियर हाईस्कूलों से लेकर पेपर लीक, फीस वृद्धि, रोजगार, आरक्षण और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता जैसे मुद्दे प्रमुखता से उठाए जाएंगे।

शिक्षक दिवस के अवसर पर शुरू होने वाले इस अभियान का सबसे प्रमुख कार्यक्रम ‘पाठशाला पुकारे’ रखा गया है। छात्र सभा के अनुसार, प्रदेश में जिन प्राथमिक और जूनियर हाईस्कूलों को बंद किया गया है, उनके आसपास कार्यक्रम आयोजित कर स्थानीय लोगों और ग्रामीणों के बीच शिक्षा व्यवस्था से जुड़े सवालों को उठाया जाएगा। पार्टी का कहना है कि शिक्षा किसी भी समाज की प्रगति का आधार है और सरकारी विद्यालयों की उपलब्धता तथा उनकी स्थिति सीधे तौर पर गरीब और वंचित वर्ग के बच्चों की शिक्षा से जुड़ी है।

‘बंद स्कूल खुलेगा, तो PDA पढ़ेगा’ का संदेश

समाजवादी छात्र सभा ने ‘पाठशाला पुकारे’ कार्यक्रम के लिए ‘बंद स्कूल खुलेगा, तो PDA पढ़ेगा’ का संदेश सामने रखा है। पार्टी का कहना है कि शिक्षा के विस्तार से समाज के कमजोर, गरीब और वंचित तबकों में सामाजिक एवं राजनीतिक जागरूकता बढ़ेगी। इसी विचार को आधार बनाकर छात्र सभा ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंच बनाने की तैयारी में है।

  शिक्षक दिवस पर ‘पाठशाला पुकारे’ अभियान के तहत बंद स्कूलों के मुद्दे को उठाने की तैयारी करती समाजवादी छात्र सभा।  (फोटो सोर्स :Akhilesh Yadav/x )

कार्यक्रम के तहत बंद स्कूलों के परिसर के बाहर या आसपास उपलब्ध स्थान पर स्थानीय स्तर पर आयोजन किए जाने की योजना है। इन कार्यक्रमों में पार्टी के स्थानीय पदाधिकारी, छात्र नेता, कार्यकर्ता और ग्रामीणों की भागीदारी होने की बात कही गई है। छात्र सभा का प्रयास है कि स्कूल बंद होने के मुद्दे को केवल राजनीतिक बहस तक सीमित न रखकर स्थानीय अभिभावकों और विद्यार्थियों के सवाल से जोड़ा जाए।

शिक्षक दिवस पर छात्र सम्मेलन और शिक्षक सम्मान

पांच सितंबर को शिक्षक दिवस के अवसर पर विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में छात्र सम्मेलन आयोजित किए जाने की योजना है। इसके साथ ही शिक्षकों के सम्मान के लिए कार्यक्रम भी होंगे। छात्र सभा इन आयोजनों के माध्यम से शिक्षा के महत्व, शिक्षकों की भूमिका और विद्यार्थियों से जुड़े मुद्दों पर संवाद स्थापित करने की तैयारी में है।

पार्टी की छात्र इकाई का कहना है कि शिक्षक केवल शिक्षा देने तक सीमित भूमिका नहीं निभाते, बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण और सामाजिक चेतना विकसित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में शिक्षक दिवस को केवल औपचारिक कार्यक्रम के बजाय शिक्षा व्यवस्था से जुड़े व्यापक सवालों पर चर्चा का अवसर बनाने की कोशिश की जाएगी।

बंद स्कूलों से ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था तक

‘पाठशाला पुकारे’ कार्यक्रम का केंद्र ग्रामीण क्षेत्र और बंद बताए जा रहे विद्यालय रहेंगे। छात्र सभा का दावा है कि बड़ी संख्या में प्राथमिक और जूनियर हाईस्कूल बंद किए गए हैं। पार्टी इस दावे के जरिए सरकार की शिक्षा नीति पर सवाल उठाने की तैयारी में है।

समाजवादी छात्र सभा का कहना है कि सरकारी विद्यालय ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों के लिए शिक्षा का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। ऐसे में विद्यालयों के बंद होने से विद्यार्थियों को दूसरे स्कूलों तक अधिक दूरी तय करनी पड़ सकती है। पार्टी इस मुद्दे को स्थानीय स्तर पर उठाकर अभिभावकों की समस्याएं सामने लाने की कोशिश करेगी।

7 सितंबर से अभियान में आएगी तेजी

अभियान के अगले चरण में सात सितंबर को PDA वृक्षारोपण और पर्चा वितरण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इसके जरिए छात्र सभा अपने संदेश और अभियान से जुड़े मुद्दों को अधिक से अधिक विद्यार्थियों तथा आम लोगों तक पहुंचाने की कोशिश करेगी। आठ सितंबर को विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में शिविर लगाकर छात्रों से संपर्क किया जाएगा। इस दौरान पर्चे बांटने के साथ विद्यार्थियों से शिक्षा और कैंपस से जुड़े मुद्दों पर बातचीत की जाएगी। छात्र सभा का उद्देश्य छात्रों को अभियान से जोड़ना और उनकी समस्याओं को संगठन के मंच तक पहुंचाना बताया गया है।

छात्रों से सुझाव और संकल्प पत्र

नौ सितंबर को अभियान के तहत छात्र-छात्राओं से सुझाव लिए जाएंगे। विद्यार्थियों से संकल्प पत्र भरवाने और उनकी समस्याओं को सुनने की योजना है। छात्र सभा का कहना है कि शिक्षा व्यवस्था को लेकर विद्यार्थियों के अनुभव और सुझाव महत्वपूर्ण हैं, इसलिए अभियान में उन्हें सीधे संवाद का अवसर दिया जाएगा।

इसके माध्यम से छात्र संगठन कैंपस से जुड़े मुद्दों के साथ-साथ रोजगार, प्रतियोगी परीक्षाओं और शिक्षा की लागत जैसे विषयों पर युवाओं की राय जानने का प्रयास करेगा। छात्र सभा का कहना है कि विद्यार्थियों की वास्तविक समस्याओं को समझे बिना शिक्षा और रोजगार से जुड़ी नीतियों पर सार्थक चर्चा संभव नहीं है।

राजनीति में युवाओं की भूमिका पर संगोष्ठी

10 सितंबर को वर्तमान राजनीति में छात्र-छात्राओं और युवाओं की भूमिका को लेकर संगोष्ठी आयोजित की जाएगी। इसमें युवा राजनीति, लोकतांत्रिक भागीदारी और सामाजिक मुद्दों पर छात्रों की भूमिका को केंद्र में रखा जाएगा। समाजवादी छात्र सभा इस आयोजन के जरिए युवाओं को राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों से जोड़ने का प्रयास करेगी। पार्टी का कहना है कि देश और प्रदेश की राजनीति में युवाओं की भागीदारी जरूरी है और विद्यार्थियों को अपने अधिकारों तथा जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक होना चाहिए।

मेधावी छात्रों के सम्मान के साथ होगा समापन

11 सितंबर को अभियान का समापन मेधावी छात्र-छात्राओं के सम्मान के साथ किया जाएगा। छात्र सभा के मुताबिक, शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित कर उन्हें प्रोत्साहित किया जाएगा। संगठन का कहना है कि अभियान का उद्देश्य केवल राजनीतिक विरोध करना नहीं, बल्कि छात्रों और युवाओं के बीच शिक्षा, रोजगार और सामाजिक मुद्दों को लेकर जागरूकता पैदा करना भी है। इसी वजह से अभियान में छात्र संवाद, शिक्षक सम्मान और मेधावी विद्यार्थियों के सम्मान जैसे कार्यक्रम शामिल किए गए हैं।

पेपर लीक और फीस वृद्धि भी बनेंगे मुद्दा

अभियान के दौरान प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक के आरोपों, फीस वृद्धि और रोजगार जैसे मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाया जाएगा। छात्र सभा का कहना है कि परीक्षाओं की प्रक्रिया में पारदर्शिता और युवाओं को रोजगार के पर्याप्त अवसर मिलना जरूरी है।

उच्च शिक्षा के क्षेत्र में फीस बढ़ोतरी को लेकर भी संगठन अपनी बात रखेगा। छात्र सभा का तर्क है कि आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा तक पहुंच आसान होनी चाहिए। इसके साथ ही समान कोर्स और शिक्षा व्यवस्था में समान अवसर जैसे मुद्दों को भी अभियान का हिस्सा बनाया गया है।

आरक्षण और नियुक्तियों में पारदर्शिता पर जोर

समाजवादी छात्र सभा विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में नियुक्तियों से जुड़े कथित भ्रष्टाचार और आरक्षण में पारदर्शिता के सवाल को भी अभियान में शामिल करेगी। संगठन का कहना है कि उच्च शिक्षण संस्थानों में नियुक्तियों और आरक्षण से संबंधित प्रक्रियाएं स्पष्ट और पारदर्शी होनी चाहिए।

इसके अलावा रोस्टर प्रणाली, डिजिटल डिवाइस, पुस्तकालयों के निर्माण और नए विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों की स्थापना जैसे मुद्दे भी उठाए जाएंगे। छात्र सभा का कहना है कि आधुनिक शिक्षा के दौर में विद्यार्थियों को डिजिटल संसाधनों और बेहतर शैक्षणिक सुविधाओं तक पहुंच मिलनी चाहिए।

मुफ्त पढ़ाई और डिजिटल सुविधाओं की मांग

अभियान में मुफ्त शिक्षा की मांग भी प्रमुखता से रखी जाएगी। पार्टी छात्र संगठन का कहना है कि आर्थिक स्थिति के कारण कोई विद्यार्थी शिक्षा से वंचित न हो, इसके लिए सरकार को ऐसी नीतियां बनानी चाहिए जिनसे गरीब और जरूरतमंद विद्यार्थियों को राहत मिले।

डिजिटल डिवाइस और पुस्तकालयों को लेकर भी छात्र सभा अपनी मांग रखेगी। संगठन के अनुसार, शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए विद्यार्थियों को तकनीकी संसाधन उपलब्ध कराना जरूरी है। साथ ही नए कॉलेज और विश्वविद्यालय स्थापित करने की मांग भी उठाई जाएगी, ताकि उच्च शिक्षा के अवसरों का विस्तार हो सके।

शिक्षा के मुद्दे पर सियासी मुकाबले के संकेत

शिक्षक दिवस से शुरू हो रहा यह अभियान उत्तर प्रदेश में शिक्षा और युवाओं के मुद्दों पर सियासी गतिविधियों को तेज करने वाला माना जा रहा है। समाजवादी छात्र सभा ने जिस तरह बंद स्कूलों से लेकर पेपर लीक, रोजगार, फीस वृद्धि और आरक्षण तक के मुद्दों को एक अभियान में शामिल किया है, उससे साफ है कि पार्टी छात्र और युवा वर्ग के बीच अपनी राजनीतिक सक्रियता बढ़ाने की तैयारी में है।

आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ‘पाठशाला पुकारे’ और ‘छात्र, नौजवान एवं PDA जागरूकता अभियान’ को ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में कितना समर्थन मिलता है। साथ ही सरकार और भाजपा की ओर से इन आरोपों और मांगों पर क्या प्रतिक्रिया आती है, यह भी राजनीतिक बहस का अहम हिस्सा होगा।