यूपी में BJP की हिंदू वोट बैंक एकजुट करने की रणनीति को UGC के नए नियमों ने झटका दिया है। ब्राह्मण, क्षत्रिय और अन्य अगड़े वर्ग नाराज हैं और कई पदाधिकारी इस्तीफे दे चुके हैं।
UP Politics: यूपी में भाजपा पिछले कुछ समय से हिंदू वोटरों को धर्म के नाम पर एक करने की कोशिश कर रही थी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नारा दिया कि बंटेंगे तो कटेंगे, एक रहेंगे तो सेफ रहेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि एक रहेंगे तो नेक रहेंगे"। पार्टी का मकसद था कि जाति से ऊपर उठकर हिंदू वोट बैंक मजबूत हो। लेकिन अब ये रणनीति को बड़ा झटका लगा है।
केंद्र सरकार के UGC ने 2026 में नए नियम जारी किए, जिनमें उच्च शिक्षा संस्थानों में जाति आधारित भेदभाव रोकने के लिए SC, ST और OBC को सुरक्षा दी गई। इन नियमों में फर्जी शिकायतों पर सजा का प्रावधान नहीं था, जिससे सामान्य वर्ग (अगड़े) के लोग नाराज हो गए। वे इसे "रिवर्स डिस्क्रिमिनेशन" कह रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इन नियमों पर रोक लगा दी, लेकिन नुकसान हो चुका है। अब हिंदू वोट बैंक फिर से जातियों में बंट रहा है।
राजनीतिक जानकार कहते हैं कि भाजपा का मजबूत आधार ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, कायस्थ और भूमिहार समाज है। ये कोर वोटर हैं, जिन पर पार्टी की नींव टिकी है। लेकिन UGC नियमों ने इन्हीं को नाराज कर दिया। यूपी में कई भाजपा पदाधिकारी और कार्यकर्ता इस्तीफे दे चुके हैं। कुछ ने पार्टी झंडे तक उतार फेंके। ये इतिहास में पहली बार हुआ जब पार्टी के लोग किसी फैसले पर इतने गुस्से में आए।
यूनिवर्सिटी कैंपस में अगड़े और पिछड़े वर्ग के बीच दूरियां बढ़ गई हैं। बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी और इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में छात्रों-शिक्षकों के बीच झड़पें हुईं। सोशल मीडिया पर आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। दलित-पिछड़े युवा अगड़ों के खिलाफ गुस्से में हैं।
2027 विधानसभा चुनाव नजदीक हैं। प्रदेश से मिल रहे फीडबैक ने भाजपा की चिंता बढ़ा दी है। पार्टी अब केंद्र के फैसले का इंतजार कर रही है, ताकि कोई राहत मिले। विश्लेषक कहते हैं कि अगर कोर वोटर नाराज रहा तो बड़ा नुकसान हो सकता है। कोई भी दल अपने मुख्य वोटर को नाराज नहीं करता, लेकिन भाजपा के साथ ऐसा हुआ है। अब समाधान क्या निकलेगा, ये देखना बाकी है।