Smart meters prepaid systems.: उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रीपेड स्मार्ट मीटर की योजना को खत्म करने के आदेश दिए हैं। इसके बाद प्रदेश भर में लगाए गए करीब 85 लाख विद्युत उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिली है।
Smart meter prepaid plan ends: लखनऊ सहित प्रदेश के अन्य जिलों में स्मार्ट मीटर योजना के विरोध को देखते हुए सरकार ने अपने कदम वापस खींच लिए हैं। अब यह योजना ठंडे रास्ते में डाल दी गई है और प्रीपेड स्मार्ट मीटर को पोस्टपेड में बदल दिया जाएगा। प्रदेश सरकार के इस कथन से उपभोक्ताओं को राहत मिली है। प्रदेश में अब तक 85 लाख स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं। लेकिन लगाने के साथ ही समस्याएं भी सामने आने लगीं। जिसको लेकर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया था। सपा और आम आदमी पार्टी ने भी स्मार्ट मीटर को लेकर प्रदर्शन किया।
उत्तर प्रदेश में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। योगी सरकार भी अपने तीसरे कार्यकाल की तैयारी कर रही है। जिसमें स्मार्ट मीटर योजना बाधक बनने जा रही थी। इसके खिलाफ पूरे प्रदेश में विरोध प्रदर्शन हो रहा था। स्मार्ट मीटर में बैलेंस कम होते ही बिजली ऑटोमेटिक कट हो जाती थी। उपभोक्ताओं की शिकायत थी कि मीटर भी तेज चल रहा है और बकाया जमा करने के बाद भी ऑटोमेटिक लाइट नहीं आती थी। इन तकनीकी खामियों को लेकर जबरदस्त विरोध हो रहा था।
शुरुआत में स्मार्ट मीटर को लेकर आ रही शिकायतों को सरकार ने राजनीति से प्रेरित बताया। लेकिन बाद में इस पर गंभीरता से मंथन हुआ, समीक्षा के लिए बैठकें की गई। इसके बाद बीते सोमवार को स्मार्ट मीटर योजना वापस लेने की घोषणा की गई। प्रदेश सरकार ने प्रीपेड स्मार्ट बिजली मीटर योजना को लागू करके हो रहे राजनीतिक नुकसान को नियंत्रित करना चाहती है।
केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण ने इस संबंध में अधिसूचना जारी की थी। इसके बाद प्रदेश में अनिवार्य प्रीपेड प्रणाली के रूप में स्मार्ट मीटर योजना लागू की गई। पिछले डेढ़ साल से प्रदेश में बड़े पैमाने पर स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं। शुरुआत में उपभोक्ताओं ने भी सहयोग किया। लेकिन बाद में स्मार्ट मीटर में बड़ी खामियां निकल कर सामने आईं। इसके बाद केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण ने 2026 में अधिसूचना जारी करके 'प्रीपेड मोड' की अनिवार्यता को हटा दिया।
इधर प्रदेश में हो रहे विरोध को देखते हुए उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने भी समीक्षा शुरू की और बिजली कंपनियों से जवाब मांगा। जिसमें माना गया कि मानकों का पालन नहीं किया गया। इसके बाद सरकार ने यह फैसला लिया और बताया गया कि स्मार्ट मीटर योजना को समाप्त नहीं किया गया है केवल अनिवार्य प्रीपेड व्यवस्था को हटाकर पोस्टपेड कर दिया गया है। अब स्मार्ट मीटर पहले की तरह ही काम करेंगे।