
Uttar Pradesh Power Supply:उत्तर प्रदेश में लगातार हो रही बारिश का असर बिजली सप्लाई पर भी पड़ा है। बारिश के कारण पेड़ और टहनियां गिरने से कई जगह बिजली के खंभे और तार टूट गए, जबकि कुछ ट्रांसफार्मर भी जल गए। शनिवार देर रात तक प्रदेश में 11 केवी के 716 फीडर और 33 केवी के 173 सब स्टेशन से बिजली सप्लाई ठप हो गई। इससे करीब 15 लाख उपभोक्ता प्रभावित हुए हैं। बिजली व्यवस्था को जल्द सामान्य करने के लिए विभाग ने मरम्मत का काम तेज कर दिया है।
प्रदेश में करीब चार करोड़ उपभोक्ताओं को लगभग 25 हजार फीडर और 4650 सब स्टेशन के जरिए बिजली दी जाती है। लगातार बारिश के कारण बिजली व्यवस्था पर दबाव बढ़ा है। बिजली आपूर्ति ठप होने की शिकायतें टोल फ्री नंबर 1912 पर लगातार पहुंच रही हैं। बिजली आपूर्ति जल्द बहाल करने के लिए प्रमुख सचिव ऊर्जा और पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष ने अधिकारियों को युद्ध स्तर पर मरम्मत कराने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए लखनऊ स्थित कॉरपोरेशन मुख्यालय शक्तिभवन में कंट्रोल रूम बनाया गया है। यहां मरम्मत के काम पर रात-दिन नजर रखी जा रही है। निदेशक वितरण जीडी द्विवेदी की देखरेख में छह अधीक्षण अभियंताओं को कंट्रोल रूम में तैनात किया गया है।
UPPCL के अध्यक्ष रणवीर प्रसाद ने लेसा समेत सभी विद्युत वितरण निगमों के अधिकारियों को बिजली व्यवस्था की लगातार निगरानी करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही स्थानीय फाल्ट को कम से कम समय में ठीक करने को कहा गया है। निर्देश दिए गए हैं कि बारिश के कारण कहीं भी बिजली आपूर्ति बंद होने पर सक्रिय गैंग तुरंत मौके पर पहुंचे और मरम्मत का काम शुरू करे। स्थानीय फाल्ट की जानकारी संचार माध्यमों के जरिए उपभोक्ताओं तक पहुंचाने को भी कहा गया है, ताकि लोगों को बिजली आपूर्ति बाधित होने की वजह की जानकारी मिल सके।
लगातार बारिश के बीच बिजली से होने वाली दुर्घटनाओं की आशंका को देखते हुए अधिकारियों को सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए गए हैं। मरम्मत का काम सुरक्षा उपकरणों के साथ ही कराने को कहा गया है। अध्यक्ष रणवीर प्रसाद ने उपभोक्ताओं से किसी भी घटना या ब्रेकडाउन की जानकारी तत्काल 1912 पर देने की अपील की है। बिजली आपूर्ति व्यवस्था को लेकर उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश वर्मा ने भी रणवीर प्रसाद से मुलाकात की।
बारिश का एक असर बिजली की मांग पर भी पड़ा है। प्रदेश में बिजली की मांग 28 हजार मेगावाट से घटकर 13 हजार मेगावाट से भी नीचे पहुंच गई है। मांग कम होने के कारण प्रदेश को कटौती मुक्त रखा गया है और महानगरों से लेकर गांवों तक 24 घंटे बिजली दी जा रही है। मांग घटने के चलते कई तापीय बिजली इकाइयों को कम क्षमता पर चलाया जा रहा है। इसके साथ ही अतिरिक्त बिजली पावर एक्सचेंज में बेची जा रही है। यानी एक तरफ बारिश के कारण कई इलाकों में स्थानीय स्तर पर बिजली सप्लाई प्रभावित हुई है, वहीं कुल मांग में बड़ी गिरावट के कारण प्रदेश में उपलब्ध बिजली की स्थिति अलग बनी हुई है।