UP School Guidelines: भीषण गर्मी को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने स्कूलों के लिए हीटवेव गाइडलाइन जारी की है, जिसमें आउटडोर गतिविधियों पर रोक और बच्चों की सुरक्षा के विशेष निर्देश दिए गए हैं।
UP Schools Issue Heatwave Guidelines: उत्तर प्रदेश में लगातार बढ़ते तापमान और भीषण गर्मी के मद्देनजर बेसिक शिक्षा विभाग ने छात्र-छात्राओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए नई ‘हीटवेव गाइडलाइन’ जारी की है। इस गाइडलाइन का उद्देश्य स्कूली बच्चों को लू (हीट स्ट्रोक) और अन्य गर्मी से संबंधित बीमारियों से बचाना है। विभाग द्वारा जारी ये निर्देश परिषदीय विद्यालयों के साथ-साथ कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों (KGBV) पर भी समान रूप से लागू होंगे।
प्रदेश के कई जिलों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है, जिससे स्कूली बच्चों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका बढ़ गई है। इसी को ध्यान में रखते हुए महानिदेशक स्कूल शिक्षा, मोनिका रानी द्वारा सभी संबंधित अधिकारियों और विद्यालय प्रबंधन को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
नई गाइडलाइन के तहत अब विद्यालयों में किसी भी प्रकार की गतिविधि सीधे धूप में आयोजित नहीं की जाएगी। यह निर्णय बच्चों को तेज धूप और लू से बचाने के लिए लिया गया है।
प्रार्थना सभा में बदलाव:
अब तक सुबह खुले मैदान में होने वाली प्रार्थना सभाओं को बंद कर दिया गया है। इसके स्थान पर प्रार्थना सभा छायादार स्थानों या सीधे कक्षाओं के भीतर आयोजित की जाएगी, ताकि बच्चों को धूप के संपर्क में आने से रोका जा सके।
आउटडोर गतिविधियों का समय निर्धारित:
खेलकूद, पीटी या अन्य बाहरी गतिविधियों को सुबह 9 बजे से पहले ही संपन्न करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके बाद छात्रों के बाहर जाने पर पूरी तरह रोक रहेगी। यह व्यवस्था विशेष रूप से उन क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण है जहां तापमान सुबह के बाद तेजी से बढ़ता है।
गर्मी के प्रभाव को कम करने और बच्चों की सेहत को सुरक्षित रखने के लिए स्कूलों में स्वास्थ्य संबंधी व्यवस्थाओं को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया है।
फर्स्ट-एड किट अनिवार्य रूप से अपडेट:
सभी विद्यालयों को अपनी फर्स्ट-एड किट को अपडेट करने के निर्देश दिए गए हैं। इसमें ओआरएस (ORS) के पैकेट, बुखार, उल्टी-दस्त और डिहाइड्रेशन से संबंधित दवाएं अनिवार्य रूप से उपलब्ध रखनी होंगी।
शिक्षकों की बढ़ी जिम्मेदारी:
शिक्षकों को निर्देशित किया गया है कि वे छात्रों को नियमित अंतराल पर पानी पीने के लिए प्रेरित करें। साथ ही उन्हें लू के लक्षण,जैसे चक्कर आना, सिरदर्द, कमजोरी, उल्टी आदि के बारे में जागरूक करें, ताकि समय रहते उचित कदम उठाए जा सकें।
गाइडलाइन में बच्चों के भोजन और बुनियादी सुविधाओं पर भी विशेष ध्यान देने को कहा गया है।
मिड-डे मील की गुणवत्ता सुनिश्चित:
विद्यालयों को निर्देश दिए गए हैं कि मिड-डे मील (MDM) पूरी तरह से ताजा, पौष्टिक और स्वच्छ हो। बासी, अधिक मसालेदार या जंक फूड बच्चों को देने पर सख्त रोक लगाई गई है।
पेयजल और अन्य सुविधाएं:
स्कूलों में स्वच्छ पेयजल की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करना अनिवार्य किया गया है। इसके साथ ही सभी कक्षाओं में पंखों का सुचारू रूप से कार्य करना और शौचालयों की नियमित सफाई सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
इन सभी निर्देशों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों (BSA) को विशेष जिम्मेदारी सौंपी गई है। उन्हें नियमित रूप से विद्यालयों का निरीक्षण कर यह सुनिश्चित करना होगा कि सभी गाइडलाइनों का पालन सख्ती से किया जा रहा है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि किसी भी प्रकार की लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों और विद्यालय प्रशासन के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
सूत्रों का मानना है कि इस तरह की परिस्थितियों में केवल स्कूल ही नहीं, बल्कि अभिभावकों की भूमिका भी अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। अभिभावकों को चाहिए कि वे बच्चों को हल्के और सूती कपड़े पहनाएं, पानी की बोतल साथ दें और उन्हें खाली पेट स्कूल न भेजें।
सरकार और शिक्षा विभाग का स्पष्ट संदेश है कि बच्चों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। हीटवेव गाइडलाइन इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि भीषण गर्मी के बावजूद बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो और उनका स्वास्थ्य भी सुरक्षित बना रहे।