लखनऊ

‘एनकाउंटर मैन’ के नाम से मशहूर हैं यूपी का यह STF अधिकारी, अपराधियों के लिए मौत का दूसरा नाम

डीके शाही की पहचान सख्त और तेजतर्रार STF अधिकारी के रूप में है। अगस्त 2024 में मथुरा में पंकज यादव मुठभेड़ उनकी बड़ी कामयाबी रही।

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Feb 16, 2026
STF के डीके शाही बने अपराधियों के लिए खौफ का नाम

DSP Dharmesh Kumar Shahi Encounter Man: उत्तर प्रदेश की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) में तैनात पुलिस उपाधीक्षक धर्मेश कुमार शाही, जिन्हें लोग डीके शाही के नाम से जानते हैं, आज प्रदेश में ‘एनकाउंटर मैन’ के रूप में पहचाने जाते हैं। सख्त छवि, तेज कार्रवाई और अपराधियों के खिलाफ लगातार अभियान ने उन्हें यह पहचान दिलाई है। गणतंत्र दिवस 2026 के मौके पर भारत सरकार ने उन्हें वीरता पदक से सम्मानित किया है। यह सम्मान उन्हें एक बड़े इनामी अपराधी के खिलाफ सफल ऑपरेशन के लिए दिया गया।

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पंकज यादव एनकाउंटर एक बड़ी कामयाबी

7 अगस्त 2024 को STF की टीम ने एक लाख रुपये के इनामी बदमाश पंकज यादव को मुठभेड़ में मार गिराया था। यह मुठभेड़ मथुरा जिले के फरहा थाना क्षेत्र में हुई थी। STF और पंकज यादव के बीच हुई गोलीबारी में वह गंभीर रूप से घायल हो गया। पुलिस उसे तुरंत अस्पताल लेकर पहुंची, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। पंकज यादव पर उत्तर प्रदेश और बिहार के अलग-अलग जिलों में हत्या, लूट और गैंगस्टर एक्ट जैसी गंभीर धाराओं में करीब 39 मुकदमे दर्ज थे। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, वह लंबे समय से फरार चल रहा था और उस पर एक लाख रुपये का इनाम घोषित था। बताया जाता है कि पंकज यादव का संबंध कुख्यात माफिया मुख्तार अंसारी, शहाबुद्दीन और मुन्ना बजरंगी जैसे अपराधियों से रहा था और वह उनके लिए शूटर के तौर पर काम कर चुका था। ऐसे खतरनाक अपराधी को ढेर करना STF के लिए बड़ी सफलता मानी गई। इसी ऑपरेशन के लिए डीके शाही को वीरता पदक से सम्मानित किया गया।

50 से ज्यादा एनकाउंटर, पांचवीं बार सम्मान

डीके शाही का नाम यूपी पुलिस में एक सख्त और तेज अधिकारी के रूप में लिया जाता है। अब तक वे 50 से ज्यादा एनकाउंटर कर चुके हैं। अपराधियों के खिलाफ उनकी कार्रवाई को देखते हुए उन्हें कई बार सम्मानित किया जा चुका है। यह पांचवां मौका है जब उन्हें किसी बड़े ऑपरेशन के लिए सम्मान मिला है। उनका काम करने का तरीका साफ और सीधा माना जाता है। वे अपराधियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाने के लिए जाने जाते हैं। STF में रहते हुए उन्होंने कई बड़े गैंग और इनामी बदमाशों के खिलाफ अभियान चलाए हैं।

अपराधियों में खौफ, जनता में भरोसा

डीके शाही की छवि ऐसी बन गई है कि अपराधियों के बीच उनका नाम सुनते ही डर का माहौल बन जाता है। वहीं आम जनता उन्हें कानून-व्यवस्था मजबूत करने वाले अधिकारी के रूप में देखती है। ‘एनकाउंटर मैन’ की यह पहचान उन्हें यूं ही नहीं मिली। लगातार जोखिम भरे ऑपरेशन, टीम के साथ तालमेल और सटीक रणनीति ने उन्हें अलग मुकाम पर पहुंचाया है। गणतंत्र दिवस 2026 पर मिला वीरता पदक उनके साहस और कर्तव्यनिष्ठा की बड़ी पहचान है। यूपी में अपराध के खिलाफ चल रही मुहिम में डीके शाही जैसे अधिकारियों की भूमिका अहम मानी जाती है। यही वजह है कि वे आज अपराधियों के लिए मौत का दूसरा नाम और पुलिस विभाग के लिए गर्व का चेहरा बन चुके हैं।

Published on:
16 Feb 2026 09:45 am
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