लखनऊ

UP में तबादलों का नया नियम लागू: 31 मई तक होंगे ट्रांसफर, 3-7 साल की सीमा तय, सीएम की मंजूरी अनिवार्य

UP Transfer Policy: उत्तर प्रदेश में नई तबादला नीति लागू, 31 मई तक होंगे ट्रांसफर, 3 और 7 साल की सीमा तय, 20 प्रतिशत नियम लागू, मुख्यमंत्री की मंजूरी जरूरी, कर्मचारियों में हलचल तेज।

2 min read
May 06, 2026
UP Transfer Policy 2026 (फोटो सोर्स : भाषा WhatsApp News Group)

UP Transfer Policy 2026: उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, संतुलित और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से नई तबादला नीति लागू कर दी है। इस नीति के तहत राज्य में 31 मई तक अधिकारियों और कर्मचारियों के तबादले किए जा सकेंगे। मुख्य सचिव एस.पी. गोयल ने इस संबंध में सभी अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव और सचिव स्तर के अधिकारियों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी करते हुए पत्र भेजा है।

नई नीति में समूह ‘क’ और ‘ख’ के अधिकारियों से लेकर समूह ‘ग’ और ‘घ’ के कर्मचारियों तक के स्थानांतरण को लेकर स्पष्ट नियम तय किए गए हैं। सरकार का उद्देश्य है कि प्रशासनिक कार्यों में गति लाई जाए और लंबे समय से एक ही स्थान पर कार्यरत कर्मचारियों का संतुलित तरीके से स्थानांतरण किया जा सके।

ये भी पढ़ें

UP में बड़ा प्रशासनिक बदलाव: 15 दिनों में 102 IAS तबादले, 33 जिलों के डीएम बदले, सरकार सख्त मोड में

तय समय सीमा के भीतर होंगे तबादले

नई नीति के अनुसार, प्रदेश में सभी प्रकार के तबादले 31 मई तक पूरे कर लिए जाएंगे। इसके बाद सामान्य परिस्थितियों में तबादलों पर रोक लग जाएगी। यह समयसीमा प्रशासनिक प्रक्रिया को व्यवस्थित और समयबद्ध बनाने के लिए निर्धारित की गई है।

लंबे समय से एक स्थान पर तैनाती पर रोक

नीति के तहत यह स्पष्ट किया गया है कि यदि कोई अधिकारी किसी जिले में 3 साल या किसी मंडल में 7 साल से अधिक समय तक तैनात है, तो उसका तबादला किया जाना अनिवार्य होगा। इससे प्रशासन में नई ऊर्जा और निष्पक्षता बनी रहेगी।

20 प्रतिशत सीमा का प्रावधान

तबादलों में संतुलन बनाए रखने के लिए सरकार ने 20 प्रतिशत की सीमा निर्धारित की है। इसका मतलब यह है कि किसी भी विभाग में कुल कर्मचारियों के 20 प्रतिशत से अधिक तबादले नहीं किए जाएंगे। यदि इससे अधिक तबादले की आवश्यकता होती है, तो इसके लिए मुख्यमंत्री का अनुमोदन लेना अनिवार्य होगा।

समूह ‘क’ और ‘ख’ के अधिकारियों के लिए नियम

समूह ‘क’ और ‘ख’ के अधिकारियों के तबादले के लिए विशेष दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। इन अधिकारियों के स्थानांतरण विभागीय मंत्री के साथ विचार-विमर्श के बाद किए जाएंगे, जिससे निर्णय प्रक्रिया में पारदर्शिता और संतुलन बना रहे।

समूह ‘ख’ कर्मचारियों के तबादले

समूह ‘ख’ के कर्मचारियों के तबादले संबंधित विभागाध्यक्ष (HOD) द्वारा किए जाएंगे। हालांकि, इसमें भी विभागीय मंत्री की राय को ध्यान में रखा जाएगा।

समूह ‘ग’ और ‘घ’ के कर्मचारियों के लिए प्रावधान

समूह ‘ग’ और ‘घ’ के कर्मचारियों के तबादले भी इस नीति के तहत किए जाएंगे। इनके स्थानांतरण विभागाध्यक्ष के अनुमोदन से होंगे, जिससे प्रक्रिया में स्पष्टता और जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।

सचिवालय पर लागू नहीं होगी नीति

नई तबादला नीति का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि यह नीति सचिवालय में कार्यरत कर्मचारियों पर लागू नहीं होगी। सचिवालय की अपनी अलग प्रशासनिक व्यवस्था होती है, इसलिए वहां के लिए अलग नियम लागू रहते हैं।

पति-पत्नी को एक ही जिले में तैनाती

नई नीति में कर्मचारियों के हितों का भी ध्यान रखा गया है। यदि पति-पत्नी दोनों सरकारी सेवा में हैं, तो उन्हें संभव हो तो एक ही जिले में तैनाती देने का प्रयास किया जाएगा। इससे पारिवारिक जीवन में संतुलन बनाए रखने में मदद मिलेगी।

पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर

सरकार ने इस नीति के माध्यम से स्पष्ट संकेत दिया है कि तबादलों में पारदर्शिता और जवाबदेही को प्राथमिकता दी जाएगी। किसी भी प्रकार की अनियमितता या पक्षपात को रोकने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश बनाए गए हैं।

कर्मचारियों में हलचल

नई नीति लागू होने के बाद कर्मचारियों और अधिकारियों के बीच हलचल तेज हो गई है। कई लोग संभावित तबादलों को लेकर तैयारियां करने में जुट गए हैं, जबकि कुछ अपने वर्तमान स्थान पर बने रहने की उम्मीद कर रहे हैं।

ये भी पढ़ें

Lucknow Crime: बिजनौर में मॉर्निंग वॉक से लौट रही महिला से लूट का खुलासा: किन्नर गिरोह के तीन सदस्य गिरफ्तार
Also Read
View All