UP Voter List Revision: उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण ( SIR ) की समय-सीमा एक बार फिर बढ़ा दी गई है। चुनाव आयोग के अनुसार अब कच्ची मतदाता सूची 6 जनवरी को प्रकाशित होगी। दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया फरवरी तक चलेगी, जबकि अंतिम सूची 6 मार्च को जारी की जाएगी।
UP Voter List Revision Extended Again: उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन–एसआईआर) की समय-सीमा एक बार फिर बढ़ा दी गई है। चुनाव आयोग ने तीसरी बार SIR कार्यक्रम में संशोधन करते हुए नई तिथियों की घोषणा की है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) नवदीप रिणवा ने बताया कि संशोधित कार्यक्रम के अनुसार अब प्रदेश की कच्ची मतदाता सूची का प्रकाशन 6 जनवरी 2026 को किया जाएगा। इससे पहले यह तिथि 31 दिसंबर 2025 निर्धारित की गई थी।उन्होंने कहा कि मतदाता सूची को अधिक सटीक, पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाने के उद्देश्य से यह निर्णय लिया गया है, ताकि किसी भी पात्र मतदाता का नाम सूची से न छूटे और अपात्र नामों को हटाया जा सके।
चुनाव आयोग द्वारा जारी संशोधित कार्यक्रम के अनुसार अब मतदाता सूची में दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की अवधि 6 जनवरी से 6 फरवरी 2026 तक निर्धारित की गई है। पहले यह अवधि 16 दिसंबर 2025 से 15 जनवरी 2026 तक तय की गई थी। इस अवधि के दौरान नागरिक अपने नाम जोड़ने, हटाने, संशोधन कराने या किसी त्रुटि को ठीक कराने के लिए निर्धारित प्रपत्रों के माध्यम से आवेदन कर सकेंगे। आयोग का कहना है कि इस प्रक्रिया से मतदाता सूची को अधिक भरोसेमंद और अद्यतन बनाया जा सकेगा।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि संशोधित कार्यक्रम के अनुसार 6 जनवरी से 27 फरवरी 2026 तक नोटिस चरण, गणना प्रपत्रों पर निर्णय, दावों और आपत्तियों का निस्तारण किया जाएगा। इस दौरान निर्वाचन अधिकारी प्राप्त सभी आवेदनों की जांच करेंगे और आवश्यकतानुसार नोटिस जारी कर संबंधित पक्षों को सुनवाई का अवसर देंगे। सभी प्रक्रियाओं के पूर्ण होने के बाद उत्तर प्रदेश की अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन 6 मार्च 2026 को किया जाएगा। यह सूची आगामी चुनावों के लिए आधार बनेगी।
चुनाव आयोग इस विशेष गहन पुनरीक्षण को अहंता तिथि 1 जनवरी 2026 के आधार पर करवा रहा है। इसका अर्थ यह है कि वे सभी नागरिक, जिनकी आयु 1 जनवरी 2026 को 18 वर्ष पूर्ण हो जाएगी, वे मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के पात्र होंगे। आयोग का मानना है कि इस अहंता तिथि के आधार पर पुनरीक्षण से नए मतदाताओं को पर्याप्त अवसर मिलेगा और मतदाता सूची अधिक व्यापक बनेगी।
एसआईआर प्रक्रिया में बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। आयोग के निर्देशों के अनुसार प्रत्येक बीएलओ को अपने-अपने क्षेत्र के मतदाताओं के घर-घर जाकर एसआईआर फॉर्म की दो प्रतियां उपलब्ध करानी होंगी।
मतदाता के पास रहने वाली प्रति पर बीएलओ के हस्ताक्षर भी होंगे, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि मतदाता ने SIR फॉर्म विधिवत भर दिया है।
निर्देशों के अनुसार दोनों फॉर्म पर मतदाता की फोटो अनिवार्य रूप से लगाई जाएगी। इससे मतदाता की पहचान सुनिश्चित होगी और फर्जी या दोहरे नामों की संभावना कम होगी। आयोग का कहना है कि इस प्रक्रिया से मतदाता सूची की शुद्धता और विश्वसनीयता में वृद्धि होगी।
गौरतलब है कि चुनाव आयोग ने SIR कराने की घोषणा सबसे पहले 27 अक्टूबर 2025 को की थी। इसके बाद आयोग ने 30 नवंबर और फिर 11 दिसंबर को कार्यक्रम में संशोधन किया। मंगलवार को आयोग ने तीसरी बार एसआईआर की समय-सीमा बढ़ाने का निर्णय लिया। चुनाव आयोग के अधिकारियों के अनुसार, प्रदेश की विशाल जनसंख्या, प्रवासी मतदाता, शहरीकरण और तकनीकी सत्यापन जैसी चुनौतियों को देखते हुए समय-सीमा बढ़ाना आवश्यक हो गया था।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने कहा कि आयोग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मतदाता सूची पूरी तरह पारदर्शी, निष्पक्ष और अद्यतन हो। उन्होंने मतदाताओं से अपील की कि वे इस प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी करें और किसी भी प्रकार की त्रुटि होने पर समय रहते दावा या आपत्ति दर्ज कराएं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आयोग द्वारा तय की गई सभी तिथियों का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाएगा, ताकि किसी भी मतदाता को जानकारी के अभाव में असुविधा न हो।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में एसआईआर प्रक्रिया का सफल संचालन आगामी चुनावों की निष्पक्षता और विश्वसनीयता के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। मतदाता सूची में सुधार से न केवल चुनाव प्रक्रिया मजबूत होगी, बल्कि लोकतंत्र में जनता का विश्वास भी और प्रगाढ़ होगा।