
Deepika Anand:बहुजन समाज पार्टी में परिवार और उत्तराधिकारी को लेकर चल रही चर्चा के बीच मायावती ने अब एक और बड़ा फैसला साफ कर दिया है। बसपा प्रमुख ने अपने छोटे भाई आनंद कुमार के दोनों बेटों को पार्टी में आगे कोई बड़ी जिम्मेदारी देने से इनकार कर दिया है। इसके साथ ही उन्होंने आनंद कुमार की इकलौती बेटी दीपिका आनंद का नाम सामने रखा है।
मायावती के इस बयान के बाद दीपिका आनंद अचानक चर्चा में आ गई हैं। अभी तक उनका नाम बसपा की सक्रिय राजनीति में लगभग सामने नहीं आया था। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर दीपिका आनंद कौन हैं और मायावती ने उन्हीं का नाम क्यों लिया?
कुमारी दीपिका आनंद, बसपा प्रमुख मायावती के छोटे भाई आनंद कुमार की इकलौती बेटी हैं। आनंद कुमार बसपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं और लंबे समय से मायावती के साथ पार्टी की जिम्मेदारियां संभालते रहे हैं। दीपिका अब तक राजनीति से दूर रही हैं। वह फिलहाल वकालत की पढ़ाई कर रही हैं। सार्वजनिक और राजनीतिक मंचों पर उनकी सक्रियता भी अभी तक देखने को नहीं मिली है। यही वजह है कि मायावती के हालिया बयान के बाद उनका नाम पहली बार बड़े स्तर पर राजनीतिक चर्चा में आया है।
मायावती ने कुछ साल पहले अपने बड़े भतीजे आकाश आनंद को राजनीतिक तौर पर आगे बढ़ाया था। उन्हें पार्टी का राष्ट्रीय समन्वयक बनाया गया और बाद में अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी भी घोषित किया गया। हालांकि, आकाश आनंद के साथ पार्टी में समीकरण कई बार बदले। मायावती ने पिछले तीन वर्षों में उन्हें अलग-अलग मौकों पर पार्टी के पदों से हटाया। उन्हें पार्टी से बाहर भी किया गया और बाद में वापसी हुई। इसी बीच दूसरे भतीजे ईशान आनंद को भी पार्टी में जिम्मेदारी दी गई और उन्हें उत्तर भारत का प्रभारी बनाया गया। अब मायावती ने अपने भाई के दोनों बेटों को लेकर स्थिति स्पष्ट कर दी है।
मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर किए गए एक विस्तृत पोस्ट में अपने फैसले की वजह भी बताई। उन्होंने कहा कि अविवाहित होने के कारण उन्हें अपने भाई-बहनों में से किसी एक को अपने साथ रखने की जरूरत पड़ी। इसके बाद उन्होंने सबसे छोटे भाई आनंद कुमार को अपने साथ रखा। मायावती के मुताबिक आनंद कुमार लंबे समय से उनकी देखभाल करने के साथ-साथ उनकी निगरानी में पार्टी की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां भी निभाते रहे हैं। लेकिन उन्होंने यह भी साफ किया कि आनंद कुमार के परिवार के दूसरे सदस्यों को उनकी इस भूमिका का राजनीतिक लाभ मिलना पार्टी और आंदोलन के हित में उचित नहीं होगा।
मायावती ने कहा कि अब आनंद कुमार के किसी भी बेटे को बसपा में छोटे या बड़े पद पर रहकर राजनीति करने का मौका नहीं दिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि अगर भविष्य में आनंद कुमार को उनकी मदद के लिए परिवार के किसी सदस्य की जरूरत होती है तो वह अपनी इकलौती बेटी दीपिका आनंद की मदद ले सकते हैं। हालांकि, मायावती ने दीपिका को सीधे कोई राजनीतिक पद देने की घोषणा नहीं की है। उन्होंने कहा कि उनकी ईमानदारी, वफादारी और काम करने की क्षमता को देखने के बाद पार्टी में जरूरत के अनुसार जिम्मेदारी दी जा सकती है।
मायावती के बयान से इतना जरूर साफ है कि आनंद कुमार के बेटों के लिए पार्टी में पारिवारिक उत्तराधिकार का रास्ता बंद कर दिया गया है, जबकि दीपिका आनंद के लिए भविष्य में पार्टी की जिम्मेदारी संभालने की संभावना खुली रखी गई है। यानी फिलहाल दीपिका सक्रिय राजनीति में नहीं हैं, लेकिन मायावती के ताजा बयान ने उन्हें बसपा के संभावित भविष्य के चेहरों की चर्चा में जरूर ला दिया है। अब उनकी राजनीतिक सक्रियता और पार्टी में संभावित भूमिका पर नजर रहेगी।