
महंत अवैद्यनाथ और सीएम योगी आदित्यनाथ (ANI Photo)
Mahant Avaidyanath Death Anniversary: उत्तर प्रदेश की राजनीति में गोरखपुर का गोरखनाथ मठ लंबे समय से सिर्फ धार्मिक केंद्र नहीं रहा है। इस मठ से जुड़े महंतों ने चुनावी राजनीति में भी अपनी मजबूत जगह बनाई। महंत अवैद्यनाथ की पुण्यतिथि पर गोरक्षपीठ की उस राजनीतिक यात्रा पर नजर डालना जरूरी है, जिसने गोरखपुर को यूपी की राजनीति में खास पहचान दिलाई। दिग्विजयनाथ से शुरू हुई यह कहानी अवैद्यनाथ तक पहुंची और फिर उनके उत्तराधिकारी सीएम योगी आदित्यनाथ ने इसे आगे बढ़ाया।
गोरखनाथ मंदिर के आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक, महंत अवैद्यनाथ का निधन 12 सितंबर 2014 को हुआ था। 14 सितंबर को उन्हें गोरखनाथ मंदिर परिसर में उनके गुरु महंत दिग्विजयनाथ की समाधि के पास समाधि दी गई। मंदिर के रिकॉर्ड में अवैद्यनाथ को 45 वर्षों तक गोरक्षपीठाधीश्वर रहने वाला बताया गया है।
गोरखपुर की राजनीति पर प्रकाशित अकादमिक शोध ‘Politics in Gorakhpur since the 1920s: The Making of a Safe Hindu Constituency’ के मुताबिक, गोरक्षपीठ का राजनीतिक प्रभाव अचानक नहीं बना। शोधकर्ताओं ने गोरखपुर की राजनीति के बदलाव को तीन चरणों में देखा है—कांग्रेस के वर्चस्व का दौर, जातीय प्रतिस्पर्धा का उभार और फिर हिंदू पहचान आधारित राजनीति के केंद्र के रूप में गोरक्षपीठ का मजबूत होना।
शोध के मुताबिक, गोरक्षपीठ का प्रभाव केवल धार्मिक पहचान के कारण नहीं बढ़ा। लगातार महंतों के संगठनात्मक प्रयासों और खुद को विकासवादी नेतृत्व के रूप में पेश करने की भूमिका भी इसमें रही। शोधकर्ता इसके उदाहरण के तौर पर शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क निर्माण और जातिगत भेदभाव को दूर करने के प्रयासों का जिक्र करते हैं। उनके मुताबिक, इस प्रक्रिया में गोरक्षपीठ गोरखपुर में एक वैकल्पिक सत्ता केंद्र और संरक्षण के स्रोत के रूप में उभरी।
महंत दिग्विजयनाथ ने गोरक्षनाथ मठ की धार्मिक पहचान को सक्रिय राजनीति से जोड़ा। दिग्विजयनाथ 1934 में गोरखनाथ मठ के महंत बने और सक्रिय राजनीति में शामिल हुए। साल 1967 में उन्होंने गोरखपुर लोकसभा सीट से चुनाव जीता। उन्होंने हिंदू महासभा और जनसंघ के समर्थन से कांग्रेस उम्मीदवार को हराया था।
दिग्विजयनाथ के बाद महंत अवैद्यनाथ ने इस राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाया। अवैद्यनाथ के दौर में इस राजनीतिक प्रभाव का दायरा और बढ़ा। वे सक्रिय चुनावी राजनीति में रहे और राम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़े प्रमुख संत नेताओं में शामिल हुए। वह 1962 में मानीराम विधानसभा सीट से हिंदू महासभा के टिकट पर विधायक बने और बाद में इसी सीट से कई बार चुनाव जीता। 1989 में वह गोरखपुर से लोकसभा पहुंचे। इसके बाद 1991 और 1996 में बीजेपी के टिकट पर भी चुनाव जीता।
अवैद्यनाथ का राजनीतिक प्रभाव सिर्फ चुनाव जीतने तक सीमित नहीं रहा। वह राम जन्मभूमि आंदोलन से भी जुड़े रहे। 1990 के दशक में राम मंदिर का मुद्दा बीजेपी की राजनीति के केंद्र में था और अवैद्यनाथ इस आंदोलन के प्रमुख नेताओं में शामिल थे। इस दौर में गोरक्षपीठ की धार्मिक पहचान के साथ उसकी राजनीतिक भूमिका भी मजबूत हुई। यही वह समय था जब गोरखपुर का मठ पूर्वी उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक प्रभावशाली केंद्र के तौर पर देखा जाने लगा। हालांकि इसे पूरे यूपी की राजनीति बदलने का सीधा कारण बताना सही नहीं होगा, लेकिन गोरक्षपीठ की राजनीतिक मौजूदगी लगातार बढ़ती गई।
अवैद्यनाथ की राजनीतिक विरासत का अगला चरण उनके शिष्य योगी आदित्यनाथ के साथ शुरू हुआ। गोरक्षपीठ के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, 15 फरवरी 1994 को अवैद्यनाथ ने आदित्यनाथ को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया।
योगी 1998 में पहली बार गोरखपुर से लोकसभा पहुंचे और 1998 से 2014 तक लगातार पांच चुनाव जीते। ऑक्सफोर्ड से जुड़े शोधकर्ताओं के अनुसार, 1998 से 2017 तक गोरखपुर लोकसभा सीट पर योगी का प्रभाव बेहद मजबूत रहा। 2017 में मुख्यमंत्री बनने के बाद भी शोधकर्ताओं ने गोरक्षपीठ के प्रभाव को खत्म हुआ नहीं माना।
योगी ने 2023 के एक इंटरव्यू में अपनी यात्रा, गुरु अवैद्यनाथ से मुलाकात और राजनीति में आने की प्रक्रिया पर भी बात की थी। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन को गुरु और नाथ परंपरा से मिली सीख तथा समाजसेवा से जोड़ा।
साल 2017 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 403 में से 312 सीटें जीतीं। इसके बाद पार्टी ने योगी आदित्यनाथ को उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाया। यहीं पर अवैद्यनाथ से शुरू हुई राजनीतिक विरासत का सबसे बड़ा पड़ाव सामने आया। दिग्विजयनाथ ने राजनीति में कदम रखा, अवैद्यनाथ ने इसे चुनावी राजनीति और राम मंदिर आंदोलन से जोड़ा और योगी ने उसी गोरक्षपीठ की विरासत के साथ अपनी अलग राजनीतिक पहचान बनाई।शांतनु गुप्ता की किताब द मोंक हू बिकेम चीफ मिनिस्टर (The Mon k Who Became Chief Minister) भी योगी की इस यात्रा को समझने का अहम स्रोत है।
Updated on:
12 Sept 2026 04:08 pm
Published on:
12 Sept 2026 04:06 pm
