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UP Politics: काशी में जलभराव पर अखिलेश का तंज, बोले विदेशी पर्यटकों के सामने पानी-पानी हुआ विकास मॉडल

Akhilesh Yadav: वाराणसी में जलभराव को लेकर अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर निशाना साधा। विदेशी पर्यटकों के सामने काशी की स्थिति पर तंज कसते हुए विकास मॉडल पर सवाल उठाए।
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लखनऊ

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Ritesh Singh

Sep 12, 2026

अखिलेश यादव का तंज, ‘क्योटो बनाम स्पेन’ कहकर योगी सरकार पर साधा निशाना (फोटो सोर्स : Ritesh Singh )

अखिलेश यादव का तंज, ‘क्योटो बनाम स्पेन’ कहकर योगी सरकार पर साधा निशाना (फोटो सोर्स : Ritesh Singh )

akhilesh yadav varanasi waterlogging: वाराणसी में बारिश के बाद जलभराव को लेकर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने प्रदेश और केंद्र सरकार पर तीखा तंज कसा है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए काशी की जल निकासी व्यवस्था और विकास मॉडल पर सवाल उठाते हुए सरकार को घेरा। अखिलेश यादव ने काशी को ‘प्रधान नगरी’ बताते हुए कहा कि विदेशी पर्यटकों के सामने देश की यह प्रमुख नगरी जलमग्न विकास की तस्वीर पेश कर रही है।

अखिलेश यादव की पोस्ट सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई। उन्होंने अपने पोस्ट में वाराणसी के जलभराव की तुलना गोरखपुर से करते हुए प्रदेश सरकार पर व्यंग्य किया। साथ ही उन्होंने विकास के मुद्दे को लेकर भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए इसे दिल्ली और लखनऊ की राजनीति से आगे बढ़कर अंतरराष्ट्रीय तुलना से जोड़ दिया।

विदेशी पर्यटकों के सामने काशी की तस्वीर पर सवाल

अखिलेश यादव ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि काशी में विदेशी पर्यटकों के सामने देश की ‘प्रधान नगरी’ का जलमग्न विकास नजर आया। उनके इस बयान का सीधा संकेत वाराणसी में बारिश के बाद पैदा हुई जलभराव की स्थिति की ओर था। उन्होंने सवाल उठाया कि जिस काशी को देश और दुनिया के सामने धार्मिक, सांस्कृतिक और आधुनिक विकास के प्रमुख केंद्र के रूप में प्रस्तुत किया जाता है, वहां बारिश के दौरान जल निकासी की समस्या क्यों सामने आती है।

काशी देश-दुनिया से आने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण केंद्र है। ऐसे में बारिश के दौरान सड़कों पर पानी भरने की तस्वीरें सामने आने पर विपक्ष को सरकार पर हमला करने का मौका मिल गया है। अखिलेश ने इसी मुद्दे को राजनीतिक व्यंग्य का रूप देते हुए सरकार की विकास योजनाओं पर सवाल उठाया।

‘गोरखपुर जैसा जलमग्न’ बताकर सरकार पर तंज

अखिलेश यादव ने अपनी पोस्ट में लिखा कि जब तक ‘प्रधान नगरी काशी’ को ‘जलमग्न मुख्य नगरी गोरखपुर’ जैसा नहीं बना देंगे, तब तक लखनऊ वाले मानेंगे नहीं। उनके इस बयान में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृह क्षेत्र गोरखपुर को लेकर भी राजनीतिक तंज छिपा है।

अखिलेश का यह बयान ऐसे समय आया है, जब बारिश के मौसम में प्रदेश के कई शहरों में जलभराव और जलनिकासी की समस्या को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हो जाते हैं। सपा अध्यक्ष ने काशी और गोरखपुर का जिक्र करते हुए सरकार के विकास मॉडल पर सवाल खड़ा करने की कोशिश की है।

दिल्ली बनाम लखनऊ से ‘क्योटो बनाम स्पेन’ तक

अखिलेश यादव ने अपनी पोस्ट में राजनीतिक तंज को और आगे बढ़ाते हुए लिखा कि अब आपस का झगड़ा अंतरराष्ट्रीय हो गया है। बात दिल्ली बनाम लखनऊ से ऊपर उठकर ‘क्योटो बनाम स्पेन’ तक पहुंच गई है।

अखिलेश का यह तंज वाराणसी को जापान के क्योटो की तर्ज पर विकसित करने के दावों से जुड़ा माना जा रहा है। वाराणसी के विकास को लेकर लंबे समय से काशी और क्योटो की तुलना राजनीतिक विमर्श का हिस्सा रही है। वहीं, स्पेन का जिक्र करते हुए अखिलेश ने विकास के दावों पर व्यंग्य किया है। उनकी पोस्ट का मकसद सरकार के विकास मॉडल को लेकर विपक्ष की आलोचना को धार देना माना जा रहा है।

काशी के विकास मॉडल पर विपक्ष का हमला

वाराणसी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र है और पिछले वर्षों में यहां कई बड़े विकास कार्य हुए हैं। सड़क, घाट, कॉरिडोर, पर्यटन सुविधाओं और शहरी बुनियादी ढांचे से जुड़े कई प्रोजेक्टों को काशी के बदलते स्वरूप के तौर पर प्रस्तुत किया जाता रहा है। ऐसे में बारिश के दौरान जलभराव की तस्वीरें सामने आने पर विपक्ष इन समस्याओं को विकास के दावों से जोड़कर सरकार को घेरता रहा है।

अखिलेश यादव की ताजा पोस्ट भी इसी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा दिखाई देती है। उन्होंने किसी विस्तृत तकनीकी रिपोर्ट का उल्लेख किए बिना जलभराव की तस्वीर को आधार बनाकर सरकार की विकास नीति पर सवाल उठाया। उनके बयान के बाद सोशल मीडिया पर भी इसे लेकर राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना है।

जलभराव बना शहरी व्यवस्था के लिए चुनौती

बारिश के दौरान शहरों में जलभराव केवल वाराणसी की समस्या नहीं है। उत्तर प्रदेश समेत देश के कई बड़े शहरों में तेज बारिश के बाद जलनिकासी व्यवस्था की कमियां सामने आती हैं। कम समय में अधिक बारिश, नालों की क्षमता, जलनिकासी मार्गों में रुकावट और शहरी विस्तार जैसी वजहों से कई इलाकों में पानी जमा हो जाता है।

वाराणसी जैसे पर्यटन और धार्मिक महत्व वाले शहर में यह समस्या और संवेदनशील हो जाती है। यहां देश के अलग-अलग हिस्सों के साथ विदेशों से भी बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं। ऐसे में शहर की सड़कों पर जलभराव होने से आम लोगों के साथ पर्यटकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

सियासत में भी गरमाया बारिश का मुद्दा

बारिश और जलभराव का मुद्दा अब सिर्फ नगर व्यवस्था तक सीमित नहीं रह गया है। विपक्षी दल इसे सरकार के विकास कार्यों और शहरी प्रबंधन की परीक्षा के रूप में देख रहे हैं। वहीं, सत्ता पक्ष की ओर से आमतौर पर ऐसे हालात को अत्यधिक बारिश और प्राकृतिक परिस्थितियों से जोड़कर देखा जाता है।

अखिलेश यादव के बयान के बाद वाराणसी का जलभराव एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। सपा अध्यक्ष ने जिस तरह काशी, गोरखपुर, दिल्ली, लखनऊ, क्योटो और स्पेन का जिक्र करते हुए सरकार पर तंज कसा है, उससे साफ है कि विपक्ष आने वाले समय में शहरी विकास और जल निकासी को लेकर सरकार को घेरने की कोशिश करेगा।

‘प्रधान नगरी’ पर तंज, सरकार के सामने सवाल

अखिलेश यादव की पोस्ट ने काशी के विकास मॉडल को लेकर कई राजनीतिक सवाल खड़े किए हैं। विपक्ष का सवाल है कि यदि किसी शहर को अंतरराष्ट्रीय स्तर के विकास मॉडल के रूप में पेश किया जाता है तो वहां बुनियादी सुविधाएं भी उसी स्तर की होनी चाहिए। खासकर बारिश के मौसम में जलनिकासी की व्यवस्था को लेकर सरकार और स्थानीय प्रशासन से जवाब मांगा जा सकता है।

फिलहाल अखिलेश यादव की टिप्पणी राजनीतिक तंज और आरोप के रूप में सामने आई है। काशी में जलभराव की वास्तविक स्थिति, उसके कारण और जल निकासी व्यवस्था को लेकर प्रशासनिक स्तर पर क्या कदम उठाए जाते हैं, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा। लेकिन इतना तय है कि बारिश के पानी ने एक बार फिर काशी के विकास मॉडल को लेकर सियासी बहस को जरूर तेज कर दिया है।

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